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"है मधुर जीवंत बेला "

गीत
___

“है मधुर जीवंत बेला”
_______________

नैन में सपने पले हैं अब नहीँ हूँ मैँ अकेला ।

फिर जहां मुस्कान लाया, है मधुर जीवन्त बेला |

झूठ झंझट जग के सारे , हैं सभी तो ये हमारे ,

दीप आशा के जले हैं नेह से सारे सजाये

सत्य का निर्माण होगा, फिर सजेगा एक मेला ||

फिर जहाँ मुस्कान लाया, है मधुर जीवंत बेला..............

स्वप्न भी पूरे करूँ मैं, इस जगत को घर बना के,

और खुशियों से सजा दूँ, सत्य की बगिया सजा के

दूर तक मुस्कान होगी, रम्य इक जीवन का खेला |

फिर जहाँ मुस्कान लाया, है मधुर जीवंत बेला..............

कर्म सारे हों दिलों से, रंग तब निखरे जहां के,

पुष्प महकाएं जगत को, एक सुन्दर घर बना के,

दर्द-दुख भी तो सभी ने, साथ रहकर संग झेला |

फिर जहाँ मुस्कान लाया, है मधुर जीवंत बेला..............

( मौलिक अप्रकाशित )

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Comment

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Comment by Chhaya Shukla on December 23, 2014 at 8:30pm

मदन मोहन सक्सेना जी हार्दिक धन्यवाद सुंदर प्रतिक्रिया के लिए सादर !

Comment by Madan Mohan saxena on December 3, 2014 at 3:13pm

बहुत सुंदर बेह्तरीन अभिव्यक्ति ...!!शुभकामनायें.

Comment by Chhaya Shukla on September 26, 2014 at 1:44pm

आ. जीतेन्द्र गीत जी !
रचना की सराहना के लिए हार्दिक धन्यवाद 
सादर नमन ! 

Comment by Chhaya Shukla on September 26, 2014 at 1:42pm

आ. गिरिराज भंडारी जी ! 
रचना की सराहना के लिए दिल से धन्यवाद आपको 
सादर नमन ! 

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on September 25, 2014 at 2:12pm

बहुत ही सुंदर गीत. बधाई आदरणीया छाया जी


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on September 25, 2014 at 7:29am

आदरणीया छाया जी ,  मन में आशा जगाती आपकी सि गीत रचना के लिए बधाई |

Comment by Chhaya Shukla on September 23, 2014 at 9:56am

आ. नरेन्द्र सिंह चौहान जी हार्दिक धन्यवाद !
सादर नमन !

Comment by Chhaya Shukla on September 21, 2014 at 8:20pm

आदरनीय संतलाल करुन जी आपकी प्रतिक्रिया मनोबल बढ़ा गई बहुत - बहुत शुक्रिया सादर नमन 

Comment by Santlal Karun on September 21, 2014 at 7:33pm

आदरणीया छाया शुक्ला जी,

झूठी झंझटों को सच के सहारे दरकिनार करते हुए स्वप्नों को साकार करने की जीवन-यात्रा का यह सुमधुर गीत अत्यंत सुन्दर बन पड़ा है --

"झूठ झंझट जग के सारे , हैं सभी तो ये हमारे ,

दीप आशा के जले हैं नेह से सारे सजाये

सत्य का निर्माण होगा, फिर सजेगा एक मेला ||"

... हार्दिक साधुवाद एवं सद्भावनाएँ ! 

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