For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

बस तेरी चुप्पी मुझे खलने लगी

जब से मजबूरी मेरी बढ़ने लगी

दोस्तों से दूरी भी बनने लगी

 

उनकी हाँ में हाँ मिलाया जब नहीं 

बस मेरी मौजूदगी डसने लगी

 

कद मेरा उस वक्त से बढ़ने लगा

आजमाइस दुनिया जब करने लगी

 

भा गई फिर सब्र की तौफीक भी 

ज़ुल्म की शिद्दत भी जब बढ़ने लगी

 

दूर मुझसे आप जब से हो गए

ज़िंदगी से हर खुशी झड़ने लगी

 

तेरी हर तकलीफ से वाकिफ़ हूँ मै

बस तेरी चुप्पी मुझे खलने लगी 

Views: 724

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by नादिर ख़ान on February 20, 2013 at 10:21am

आदरणीय, अशोक जी एवं  अजय जी हौसला अफजाई के लिए बहुत शुक्रिया ....

Comment by ajay yadav on February 19, 2013 at 11:30pm

दूर मुझसे आप जब से हो गए

ज़िंदगी से हर खुशी झड़ने लगी......बहुत खूबसूरत शेर |बधाई |

Comment by Ashok Kumar Raktale on February 19, 2013 at 11:28pm

 

आदरणीय नादिर खान साहब सादर, सुन्दर गजल बधाई स्वीकारें.

Comment by नादिर ख़ान on February 19, 2013 at 11:22pm

 आरती जी बहुत शुक्रिया 

कोशिश को सराहा आपने...

Comment by Aarti Sharma on February 19, 2013 at 8:33pm

प्रणाम नादिर सर ..बेहद सुन्दर ग़ज़ल के लिए बधाई स्वीकारें..

Comment by नादिर ख़ान on February 19, 2013 at 3:35pm

सभी आदरणीय,

विजय निकोर जी, डॉ प्राची जी, विजय मिश्र जी, डॉ. अजय खरे जी, राजेश कुमारी जी, संदीप पटेल जी, मीना पाठक जी एवं लक्ष्मण प्रसाद जी आप सबका स्नेह मिला। आपने हमारी छोटी सी कोशिश  को सराहा  इसके लिए मै आप सभी का शुक्र गुजार हूँ ।

आप सभी का बहुत आभार आपने मेरा हौसला बढ़ाया ......

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on February 19, 2013 at 2:00pm

सच्चाई बयां की है आपने सुंदर गजल के माध्यम से, हार्दिक बधाई श्री नादिर खान भाई 

हां में हां कहे जब तलक,आपके साथ है तब तलक ।
हा में हां मिलाना छोड़ दिया,  फतवा- उसे घमंड आ गया 
Comment by Meena Pathak on February 19, 2013 at 1:06pm

बेहतरीन गज़ल नादिर जी .... बधाई 

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on February 19, 2013 at 12:52pm

वाह वाह
सुंदर गजल क्या ही खूबसूरत अश्आर बने हैं

सब्र की तौफीक फिर अच्छी लगी
ज़ुल्म की शिद्दत भी जब बढ़ने लगी

वाह दाद क़ुबूल कीजिए आदरणीय


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on February 19, 2013 at 12:20pm

सुंदर ग़ज़ल लिखी है नादिर जी बधाई आपको 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi" replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
" कृपया और भी सदस्य अपना मंतव्य दें ।"
6 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"तरही का मुख्य उद्देश्य अभ्यास तक सीमित है, इस दृष्टि से और बहरों पर भी तरही मिसरे देना कठिन न होगा…"
13 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . . घूस

दोहा सप्तक. . . . . घूस बिना कमीशन आजकल, कब होता है काम । कैसा भी हो काम अब, घूस हुई है आम ।। घास…See More
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सादर नमस्कार। मुझे ऐसी ही एक चर्चा की अपेक्षा थी। आवश्यकता महसूस हो रही थी। हार्दिक धन्यवाद और…"
yesterday

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के सभी सम्मानित सदस्यों को सादर नमस्कार। आदरणीय तिलक राज कपूर सर द्वारा…"
yesterday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सभी आदरणीय सदस्यों को नमस्कार, एक महत्वपूर्ण चर्चा को आरम्भ करने के लिए प्रबन्धन समिति बधाई की…"
yesterday
Admin posted a discussion

ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा

साथियों,विगत कई माह से ओ बी ओ लाइव आयोजनों में कतिपय कारणवश सदस्यों की भागीदारी बहुत ही कम हो रही…See More
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आदरणीय  अखिलेश जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय जी । सहमत एवं संशोधित "
yesterday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आदरणीय सुशीलजी हार्दिक बधाई। लगातार बढ़िया दोहा सप्तक लिख रहें हैं। घूस खोरी ....... यह …"
yesterday
Jaihind Raipuri posted a blog post

वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं

ग़ज़ल 2122  1212  22वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैकितने दुःख दर्द से भरा दिल हैये मेरा क्यूँ हुआ है…See More
Mar 5
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन आपकी मनोहारी प्रतिक्रिया से समृद्ध हुआ । हार्दिक आभार आदरणीय । फागोत्सव…"
Mar 4
Nilesh Shevgaonkar and Dayaram Methani are now friends
Mar 4

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service