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ग़ज़ल नूर की- मेरी आँखों में तुम को ख़ाब मिला?

मेरी आँखों में तुम को ख़ाब मिला?
या निचोडे से  सिर्फ आब मिला.
.

सोचने दो मुझे समझने दो
जब मिला बस यही जवाब मिला.
.

दिल ने महसूस तो किया उस को   
पर न आँखों को ये सवाब मिला.
.

मैकदे में था जश्न-ए-बर्बादी
जिस में हर रिन्द कामयाब मिला.
.

इतना अच्छा जो मिल गया हूँ मैं
इसलिए कहते हो “ख़राब मिला.”
.

“नूर” चलने से पहले इतना कर
अपने हर कर्म का हिसाब मिला.
.
निलेश "नूर"
मौलिक/ अप्रकाशित  

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Comment

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Comment by Rupam kumar -'मीत' on October 31, 2020 at 3:52pm

आ, नीलेश साहिब प्रणाम

बहुत ख़ूब ग़ज़ल हुई बधाई स्वीकार करें, 

"ख़राब मिला" डबल quote में क्यों लिखा है साहिब यह, ?? सादर।

Comment by Samar kabeer on October 31, 2020 at 3:47pm

जनाब निलेश 'नूर' जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल कही आपने,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।

Comment by TEJ VEER SINGH on October 31, 2020 at 12:42pm

हार्दिक बधाई आदरणीय नीलेश "नूर" जी।बेहतरीन गज़ल।

.

सोचने दो मुझे समझने दो
जब मिला बस यही जवाब मिला.

कृपया ध्यान दे...

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