For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

लघुकथा : सब्जीवाला (गणेश जी बाग़ी)

उफ्फ !! ये सब्जी वाले भी न, बड़ा हल्ला करते हैं । साहित्यिक एवं सामाजिक संस्था के राष्ट्रीय सचिव खान साहब ने संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री गुप्ता से कहा ।
"वो सब छोड़िए खान साहब, ये बताइये कि कितने कवियों और कवयित्रियों की अंतिम सूची बनी जिन्हें सम्मानित करने का प्रस्ताव है ?"
"जी गुप्ता साहब, आपके निदेशानुसार 25 कवियों और 125 कवयित्रियों की सूची तैयार कर ली गयी है, किंतु एक बात समझ नही आयी कि इनमें से अधिकतर तो कोई स्तरीय साहित्यकार भी नही हैं, फिर क्यों आपने उन्हें साहित्य और समाज मे योगदान के नाम पर सम्मानित करने की घोषणा कर दी ?"
"आप नही समझेंगे खान साहब ! आप बस ये बताइये कि आपने उन लोगो के सोसल मीडिया पर प्रोफाइल चेक कर ली ?"
"जी गुप्ता साहब, सभी अपने सम्मानित होने की सूचना सोसल मीडिया पर खूब प्रचारित कर रहे हैं"
"एय शाबास !! अब एक काम कीजिये, सबको व्यक्तिगत मैसेज भेजिये कि संस्था वित्तीय संकट से गुजर रही है इसलिए संस्था अब सिर्फ सीमित साहित्यकारों को ही सम्मानित करेगी, यदि आप सम्मान समारोह में सम्मानित होना चाहते है तो मात्र 2500 रुपये की छोटी राशि से संस्था का सहयोग करें"
"आपको लगता है ! वो लोग पैसा देंगे ?"
"हा हा हा खूब देंगे... अब तक वे लोग इतना न सोसल मीडिया पर हवा बनाये होंगे कि वापस होना मुश्किल है, कुछ नही तो 90-100 लोग तो आ ही जाएंगे"
"वाह वाह गुप्ता साहब...मान गये, खर्च वगैरह काट भी दे तो सवा-डेढ़ लाख तो कही नही गये"
हा हा हा हा हा....
दोनो की तेज हँसी में "आलू लेलो, कांदा लेलो, हरी ताजी सब्जियाँ लेलो" की आवाज दब सी गयी थी ।

.

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Views: 650

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by रवि भसीन 'शाहिद' on March 10, 2020 at 9:41pm

आदरणीय गणेश जी बाग़ी साहब, बहुत उम्दा लघुकथा लिखी है आपने, आपको दिली मुबारक़बाद।

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on March 8, 2020 at 9:03pm

बहुत उम्दा लघुकथा हुई है आदरणीय बागी सर। आजकल ऐसा माहौल हर जगह दिखाई देता है। दौड़ औऱ होड़ लगी हुई है। अवार्ड देने वाले मंच भी तय बढ़ रहे हैं। सादर।


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on March 8, 2020 at 10:38am

आदरणीय समर साहब, प्रणाम, आपकी महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया हेतु दिल से आभार।


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on March 8, 2020 at 10:37am

आदरणीया नयना जी, सराहना हेतु बहुत बहुत आभार।


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on March 8, 2020 at 10:37am

डॉ दीपक पांडेय साहब, लघुकथा आप तक पहुँचने और सराहना पाने में सफल रही इसके लिए बहुत बहुत आभार।


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on March 8, 2020 at 10:36am

महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया हेतु बहुत बहुत आभार आदरणीया नमिता सुन्दर जी। 


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on March 8, 2020 at 10:35am

आदरणीय लक्ष्मण भाई, आपकी सराहना युक्त प्रतिक्रिया हेतु दिल से आभार।


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on March 8, 2020 at 10:34am

आदरणीय गुरुदेव योगराज जी, आप की टिप्पणी और सराहना पाकर लघुकथा पूर्ण हुई, बहुत बहुत आभार।

Comment by Samar kabeer on March 7, 2020 at 3:20pm

जनाब गणेश जी 'बाग़ी' साहिब आदाब,आज के हालात पर तंज़ करती उम्द:लघुकथा लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by नयना(आरती)कानिटकर on March 6, 2020 at 4:29pm

 वाह! वाह बहुत ही समसामयिक लघुकथा है सर. चारों तरफ़ इन सम्मान देनेवालो का शोर सा मचा हैं और खरिदने वाला कुछ भी दाम देने को तैयार. मुझे खासकर "शीर्षक" बहुत पसंद आया. 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Hiren Arvind Joshi left a comment for Saurabh Pandey
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम! मैंने चित्र से काव्य 129 में अपनी रचना प्रेषित की थी परन्तु रचना एवं…"
2 hours ago
Usha Awasthi shared their blog post on Facebook
4 hours ago
Usha Awasthi shared their blog post on Facebook
4 hours ago
Profile IconChetan Prakash, अमीरुद्दीन 'अमीर' and 2 other members joined Admin's group
Thumbnail

अतिथि की कलम से

"अतिथि की कलम से" समूह में ऐसे साहित्यकारों की रचनाओं को प्रकाशित किया जायेगा जो ओपन बुक्स ऑनलाइन…See More
4 hours ago
Usha Awasthi posted a blog post

साल पचहत्तर बाद

कैसे अपने देश की नाव लगेगी पार?पढ़ा रहे हैं जब सबक़ राजनीति के घाघजिनके हाथ भविष्य की नाव और…See More
5 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Admin's group अतिथि की कलम से
"जी, आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी। आदरणीय वरिष्ठ सदस्यगण अशोक रक्ताले जी और लक्ष्मण धामी मुसाफ़िर जी…"
6 hours ago
Nilesh Shevgaonkar posted a blog post

ग़ज़ल नूर की- ज़ुल्फ़ों को ज़ंजीर बना कर बैठ गए

.ज़ुल्फ़ों को ज़ंजीर बना कर बैठ गए किस किस को हम पीर बना कर बैठ गए. . यादें हम से छीन के कोई दिखलाओ…See More
7 hours ago
Aazi Tamaam posted a blog post

ग़ज़ल: आख़िरश वो जिसकी खातिर सर गया

2122 2122 212आख़िरश वो जिसकी ख़ातिर सर गयाइश्क़ था सो बे वफ़ाई कर गयाआरज़ू-ए-इश्क़ दिल में रह…See More
7 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' posted a blog post

ग़ज़ल (क़वाफ़ी चंद और अशआर कहने हैं कई मुझको)

1222 - 1222 - 1222 - 1222 क़वाफ़ी चंद और अशआर कहने हैं कई मुझकोचुनौती दे रहे हैं चाहने वाले नई…See More
7 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा त्रयी. . . . . .राजनीति

दोहा त्रयी : राजनीतिजलकुंभी सी फैलती, अनाचार  की बेल ।बड़े गूढ़ हैं क्या कहें, राजनीति के खेल…See More
7 hours ago
Anamika singh Ana added a discussion to the group पुस्तक समीक्षा
7 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Admin's group अतिथि की कलम से
"आदरणीय अमीरुद्दीन अमीर जी, यह ग्रुप ओबीओ के शैशवकाल से ही है.  सो जितना पुराना ओबीओ उतना…"
15 hours ago

© 2022   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service