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sharadindu mukerji
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ओबीओ, लखनऊ-चैप्टर की साहित्य-संध्या माह अगस्त,2017 – एक प्रतिवेदन

ओबीओ, लखनऊ-चैप्टर की साहित्य-संध्या माह अगस्त,2017 – एक प्रतिवेदनडॉ0गोपाल नारायण श्रीवास्तव 12 अगस्त 2017, माह का द्वितीय शनिवार, सामान्यतः अवकाश का दिन, स्थान-  प्रोफेशनल इंस्टिट्यूट, पुरनिया…Continue

Started Aug 20

ओ बी ओ लखनऊ चैप्टर की साहित्य संध्या – माह जुलाई 2017 – एक प्रतिवेदन - डॉ0 गोपाल नारायण श्रीवास्तव

ओ बी ओ लखनऊ चैप्टर की साहित्य संध्या – माह जुलाई  2017 – एक प्रतिवेदन - डॉ0 गोपाल नारायण श्रीवास्तव         बाल गंगाधर तिलक एवं चंद्रशेखर आजाद सरीखे महानुभावों के जयंती दिवस 23 जुलाई  2017 को ओ बी ओ…Continue

Started Aug 8

ओ बी ओ लखनऊ चैप्टर की साहित्य संध्या – माह जून 2017 – एक प्रतिवेदन - डॉ0 गोपाल नारायण श्रीवास्तव

ओ बी ओ लखनऊ चैप्टर की साहित्य संध्या – माह जून 2017 – एक प्रतिवेदन - डॉ0 गोपाल नारायण श्रीवास्तव24 जून 2010 अमेरिका के जॉन इसनर और फ्रांस के निकोला मायू के बीच ग्यारह घंटे पाँच मिनट तक चले विश्व के…Continue

Started Jun 30

ओपेन बुक्स ऑनलाईन – लखनऊ चैप्टर की पाँचवी जयंती समारोह पर एक संक्षिप्त प्रतिवेदन
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ओपेन बुक्स ऑनलाईन – लखनऊ चैप्टर की पाँचवी जयंती समारोह पर एक संक्षिप्त प्रतिवेदनसमय की पगडंडी पर कभी छोटे, कभी लंबे डग भरता हुआ ओबीओ लखनऊ चैप्टर का नन्हा सा परिवार अदम्य साहस और जुनून के साथ चार वर्ष…Continue

Started this discussion. Last reply by Ravi Prabhakar May 24.

 

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मासिक साहित्यिक गोष्ठी at C/o श्री पी.के.श्रीवास्तव, "दीप लोक", MDH 5/1, सेक्टर - H

September 24, 2017 from 2:30pm to 4pm
ओपन बुक्स ऑनलाईन, लखनऊ चैप्टर तथा अमर भारती साहित्य एवं संस्कृति संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में मासिक साहित्यिक गोष्ठी रविवार दिनांक 24 सितम्बर 2017 को आयोजित किया जाएगा. सुश्री आभा खरे जी के सौजन्य से आयोजित इस गोष्ठी में सभी सुधी-जन सादर आमंत्रित हैं.विनीत,शरदिंदु मुकर्जी                          संध्या सिंहसंयोजक                                  अध्यक्ष     ओबीओ लखनऊ चैप्टर                अमर भारती सा. एवं सं. संस्थान,                                              लखनऊ…See More
5 hours ago

Profile Information

Gender
Male
City State
lucknow, uttar pradesh
Native Place
west bengal
Profession
retired dy.director general, geological survey of india
About me
bengali born and educated in u.p. basically a geologist with experience of working in antarctica and high altitude areas of kashmir, h.p. and uttarakhand himaalayas. married to coontee who hails from mauritius. write in hindi, bengali and english, mainly poetry and travelogues

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शुभ जन्मदिन ओ.बी.ओ.

शुभ जन्मदिन ओ.बी.ओ.

जन्मदिन फिर से आया है

नए वसंत का हार लिए

कविता, गीत, मुक्तक, ग़ज़ल के

अनुपम सब उपहार लिए.

(2)

कहीं परिचर्चा, कहीं टिप्पणी

कहीं पर मुक्त विचार मिले

यह वह उपवन है जिसमें

शिक्षा का हर फूल खिले.

(3)

मन की भावना व्यक्त करना ही

शब्दों का खेल है

फिर भी देखो विचित्र विचारों का

यहाँ कैसा मेल है.

(4)

यहाँ अग्रज हैं, हैं अनुज भी

कहीं लेखनी साज़…

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Posted on April 1, 2016 at 2:49am — 4 Comments

बगावत

बगावत

बगावत की है कलम ने

उसे भी अब आरक्षण चाहिए-

कुछ भी लिख दे

पुस्तकाकार में छपना चाहिए!

मैं अड़ गया अपना ईमान लेकर

तो

कलम ने अट्टहास किया,

तोड़ा, मरोड़ा, उखाड़ फेंका

उन शब्दों की पटरी को

जिन पर भूले-भटके

मेरी कल्पना की रेलगाड़ी

कभी-कभी खिसकती महसूस होती थी

और मैं बंद खिड़की के भीतर से

अनायास देखता रहता था पीछे सरकते

लहलहाते हुए, सूखाग्रस्त या

बाढ़ के गंदे पानी में…

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Posted on February 25, 2016 at 9:52pm — 1 Comment

जाने क्यों

जाने क्यों

क्या ढूँढ़ने उतरते हो

रात के अंधेरे में ओ कोहरे,

चुपचाप, इस धरती की छाती पर

फिर अक्सर थक कर सो जाते हो

पत्तियों के ठिठुरते गात पर

और सहमी, पीली पड़ गयी

तिनके की नोक पर –

गाड़ी के शीशे से

न जाने कहाँ झाँकने की कोशिश में

चिपक जाते हो तुम,

अक्सर.

सुबह की थाप तुम्हें सुनायी नहीं देती

उद्दण्ड बालक की तरह

धरती का बिस्तर पकड़कर,

मुँह फेरकर सोये रहते हो

जब तक कि फुटपाथ पर

रात भर करवटें…

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Posted on December 16, 2015 at 2:30am — 6 Comments

एक पहाड़ी स्त्री का दर्द

एक पहाड़ी स्त्री का दर्द

 

मेरे और उनके बीच

एक पारदर्शी दीवार खड़ी है.

वे हँसती, ठिठोली करती

कभी बुरांश की लाली को छेड़ती

चाय के बागानों में उछलती कूदती

मुझे बुलाती हैं –

मैं पारदर्शी दीवार के इस पार

छटपटाकर रह जाती हूँ.

जब काले-सफेद बादलों के हुजूम

आसमान से उतरते, वादियों से चढ़ते

उन्हें घेर लेते,

वे ओझल हो जाती हैं और,

मैं प्यासी, बोझिल ह्र्दय ले

पारदर्शी दीवार के इस पार

छटपटाकर रह जाती…

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Posted on July 27, 2015 at 9:30pm — 9 Comments

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At 12:42pm on November 9, 2014,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

हृदय की अतल गहराइयों से शुभकामनायें, भइयाजी..

At 12:09pm on November 9, 2014,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

At 10:47am on November 9, 2014, लक्ष्मण रामानुज लडीवाला said…

जन्म दिन की हार्दिक बधाई | प्रभु आपको स्वस्थ,सुखी और दीर्घायु जीवन प्रदान करे |

At 1:01pm on December 6, 2013, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आदरणीय शारदेन्दु जी

शायद मैंने  यह नही कहा की आपकी कविता में कुंठा है i मैंने  श्लोक के माध्यम से श्लोक  रचनाकार की उस भाव्ना से परिचित  कराने का प्रयास किया जिसमे वह कहता है कि  कुंठा से कवियो  में गुणवत्ता आती है i आपकी कविता तो तारक मंडल की तरह मृदु भावो से सुप्रकाशित है ही i  सादर i

At 8:48pm on November 28, 2013, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आदरणीयम जी

प्रिय ब्रजेश ने बताया कि 'परो को खोलते हुए ' आपसे मिल सकती है  i मित्र आपकी भेट यात्रा  का वादा तो अभी है ही i इस पुस्तक के साथ मिलन का गरिमा ही बढ़ जायेगी  i  सादर अभिवादन i

At 7:08am on November 19, 2013, Vindu Babu said…
सादर नमस्ते आदरणीय,
सर मुझे भी इस बात का दुःख है की मई आप दोनों से दो मिनुत बात भी नही कर पाई।
मैं जरुर आउंगी आदरणीय और जल्दी ही आउंगी,आपके स्नेह ने सच में मुझे बांध लिया है।
शुभ शुभ
सदर
At 9:51pm on November 18, 2013, VIJAY KUMAR JOSHI said…

धन्यवाद शरदिन्दु. तुम्हारी रचना पढ़ने के लिए इससे अच्छी जगह और क्या मिल सकती थी! सर्वप्रथम तो तुमको अनेकानेक बधाईयाँ. अभी ओबीओ में नया हूँ. शीघ्र ही आदी हो जाऊंगा और तुमसे तथा अन्य मित्रों से और अधिक विचारों का आदान-प्रदान कर सकूंगा.

At 8:57pm on November 18, 2013, MAHIMA SHREE said…

आदरणीय शरदेन्दु सर, नमस्कार  ... बहुत -२ हार्दिक  बधाई महीने  की सर्वश्रेष्ठ रचना  पुरूस्कार से  सम्मान होने के लिए ..... 

At 4:04pm on November 14, 2013, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

मित्र मुझे कुछ नहीं विचित्र चाहिए

स्नेह द्रष्टि आपकी पवित्र चाहिए

मै हृदय में कल्पना के रंग भर सकूं

मुझे एक कवि सा चरित्र चाहिए

              गो न श्रीवास्तव

At 4:51am on November 11, 2013, Abhinav Arun said…

आपकी प्रशंसित रचना आँखों देखी - 5 आकाश में आग की लपटें के लिए आ.
 
श्री शारदिन्दु जी आपको
"महीने की सर्वश्रेष्ट रचना पुरस्कार" प्रदान किये जाने पर बहुत बहुत बधाइयाँ और शुभ कामनाएं और जन्म दिन की भी दिली मुबारकबाद !!

 
 
 

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