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सालिक गणवीर
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सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post ग़ज़ल ( ये नया द्रोहकाल है बाबा...)
"आदरणीय अमीरुद्दीन ख़ान साहब. आदाब. ग़ज़ल पर उपस्थिती तथा हौसला अफजाई के लिए आपका तहे-दिल से शुक्रिया अदा करता हूँ."
13 hours ago
अमीरुद्दीन खा़न "अमीर " commented on सालिक गणवीर's blog post ग़ज़ल ( ये नया द्रोहकाल है बाबा...)
"आदरणीय जनाब सालिक गणवीर जी, आदाब । दमदार अश'आ़र से सुसज्जित शानदार ग़ज़ल के लिए बहुत बहुत बधाई स्वीकार करें। सादर। "
14 hours ago
सालिक गणवीर posted blog posts
17 hours ago
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-62 (विषय: मर्यादा)
"आदरणीय भाई तेज वीर सिंह जीआदाबकथा का वार्तालाप सिहरन पैैैदा कर गया.  कथा का नयापन ही इसे अलग स्थापित कर रहा हूँ. नये सवाल उठाती कथा की प्रस्तुति के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाएं स्वीकारें."
17 hours ago
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post ग़ज़ल ( ये नया द्रोहकाल है बाबा...)
"आदरणीय तेज वीर सिंह जी सादर अभिवादन ग़ज़ल पर उपस्थिति एवं सराहना के लिए हृदय से आभार."
18 hours ago
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post ग़ज़ल ( ये नया द्रोहकाल है बाबा...)
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी आदाब ग़ज़ल पर उपस्थिति एवं सराहना के लिए हृदय से आभार. आपकी इस्लाह पर अमल करता हूँ, आदरणीय."
18 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on सालिक गणवीर's blog post ग़ज़ल ( ये नया द्रोहकाल है बाबा...)
"हार्दिक बधाई आदरणीय सालिक गणवीर जी। बेहतरीन गज़ल। आंख इतना बरस चुकी है किआंसुओं का अकाल है बाबा"
21 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on सालिक गणवीर's blog post ग़ज़ल ( ये नया द्रोहकाल है बाबा...)
"आ. भाई गणवीर जी, सादर अभिवादन । अच्छी गजल हुई है हार्दिक बधाई । "आंख इतना बरस चुकी अब तो" मिसरे को ऐसे भी किया जा सकता है  क्या ? सादर.."
21 hours ago
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post ग़ज़ल ( ये नया द्रोहकाल है बाबा...)
"आदरणीय राम अवध विश्वकर्मा जी सादर अभिवादन ग़ज़ल पर उपस्थिति एवं सराहना के लिए हृदय से आभार. ख़याल और ख़्याल दो भिन्न शब्द हैंं,आदरणीय, पहले का अर्थ कल्पना और दूजे का देखभाल होता है. रही बात मात्राओं के उठा ने या गिराने की,तो ऐसा करने से बचना चाहिए. गिरा…"
21 hours ago
Ram Awadh VIshwakarma commented on सालिक गणवीर's blog post ग़ज़ल ( ये नया द्रोहकाल है बाबा...)
"आदरणीय सालिक गणवीर जी नमस्कार। खूबसूरत ग़ज़ल के लिये बधाई मेरे विचार से ये गरीबों का ख्याल है बाबा में ख्याल की जगह "खयाल " शब्द का प्रयोग होता है आँख इतनी बरस चुकी है कि यहां " कि"  का वज़्न 2 लिया गया है शायरी में वज्न गिराया…"
23 hours ago
सालिक गणवीर commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post आज कल झूठ बोलता हूँ मैं
"प्रिय रुपम कुमार  अच्छी ग़ज़ल हुई है. बधाईयां स्वीकार करो.गुरु जनों की इस्लाह पर अमल करते रहें. मुझे आपमें अपार संभावनाएं दिखती हैं. निरंतर लिखते रहें. सप्रेम"
yesterday
सालिक गणवीर commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post अहसास की ग़ज़ल -मनोज अहसास
"प्रिय भाई मनोज एहसास जी सादर नमस्कार शानदार ग़ज़ल के लिए बधाइयाँ स्वीकार करें. दिल में कोई भीड़ सलामत है लेकिन तेरा चेहरा साफ नहीं दिख पाता है...... वा"
yesterday
सालिक गणवीर commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post करता रहा था जानवर रखवाली रातभर - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर अभिवादन क्या खूब दोस्ती यहाँ तूफान कर गए.।वाह एक और अच्छी ग़ज़ल के लिए मेरी शुभकामना स्वीकारें."
yesterday
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय समर कबीर साहब आदाब मेरे ब्लॉग की सारी ग़ज़लों पर आपकी इस्लाह और मार्ग दर्शन मिला है. ये ग़ज़ल आपकी नज़र में नहीं आई है ,मोहतरम. जनाब एक दफ्अ पढ़ लें तो आगे कुछ लिखने की हिम्मत जुटाऊँ."
Tuesday
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post ग़ज़ल ( नहीं था इतना भी सस्ता कभी मैं....)
"आदरणीय अमीरुद्दीन ख़ान साहब आदाब ग़ज़ल पर उपस्थिति एवं सराहना के लिए हृदय से आभार."
Tuesday
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post ग़ज़ल ( नहीं था इतना भी सस्ता कभी मैं....)
"आदरणीय समर कबीर साहब आदाब ग़ज़ल पर उपस्थिति एवं सराहना के लिए हृदय से आभार. जनाब क्या सस्ते और मंहगे में कोई रब्त नहीं?फ़िर भी आपकी इस्लाह पर मतला बदलने की कोशिश करता हूँ."
Tuesday

Profile Information

Gender
Male
City State
Bhilai, Chhattisgarh
Native Place
Bhilai
Profession
Retired from SAIL,as a Senior Electrical engineer
About me
Reading,writing and photography were my hobbies and after retirement I am totally indulged to fulfill my dreams.

सालिक गणवीर's Blog

ग़ज़ल ( ये नया द्रोहकाल है बाबा...)

(2122 1212 22/112)

शह्र में फ़िर बवाल है बाबा

ये नया द्रोहकाल है बाबा

एक तालाब अब नहीं दिखता

क्या यही नैनीताल है बाबा?

क्या इसे ही उरूज कहते हैं?

अस्ल में ये ज़वाल है बाबा

भूख हर रोज़ पूछ लेती है

रोटियों का सवाल है बाबा

फ़िक्र करता रहा अमीरों की

ये ग़रीबों का ख़्याल है बाबा

आंख इतना बरस चुकी अब तो

आंसुओं का अकाल है बाबा

मैं अकेला ही लड़ पड़ा सबसे

देखकर…

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Posted on May 31, 2020 at 8:00am — 8 Comments

ग़ज़ल ( नहीं था इतना भी सस्ता कभी मैं....)

(1222 1222 122)

नहीं था इतना भी सस्ता कभी मैं

बशर हूँ ,था बहुत मंहगा कभी मैं

अभी जिसने रखा है घर से बाहर

उसी के दिल में रहता था कभी मैं

जिसे कहते हो तुम भी झोपड़ी अब

मिरा घर है वहीं पर था कभी मैं

वहाँ पर क़ैद कर रक्खा है उसने

जहाँ देता रहा पहरा कभी मैं

सड़क पर क़ाफिला है साथ मेरे

नहीं इतना रहा तन्हा कभी मैं

मुझे भी तुम अगर तिनका बनाते

हवा के साथ उड़ जाता कभी…

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Posted on May 24, 2020 at 8:30am — 8 Comments

ग़ज़ल ( अंधी गली के मोड़ पर.....)

 (221 2121  1221 212)

अंधी गली के मोड़ पे सूना मकान है

तन्हा-सा आदमी अब इस घर की शान है

हमसे उन्होंने आज तलक कुछ नहीं कहा

हर बार उससे पूछा है जो बेज़बान है

हालात-ए- माज़ूर यक़ीनन हुये बुरे

ऊपर चढ़ाई है वहीं नीचे ढलान है

बदक़िस्मती का ये भी नमूना तो देखिये

गड्ढे नहीं मिले थे जहाँ पर खदान है

मरने के बाद भी तो फ़राग़त नहीं मिली

सारे बदन पे बोझ है मिट्टी लदान है

*मौलिक एवं…

Continue

Posted on May 21, 2020 at 6:00pm — 6 Comments

ग़ज़ल ( हम सुनाते दास्ताँ फिर ज़िन्दगी की....)

( 2122 2122 2122 )

हम सुनाते दास्ताँ फिर ज़िन्दगी की

काश हम भी काटते फसलें ख़ुशी की

अब चुरा लो शम्स की भी धूप सारी

कोई तो बदलो  ये सूरत तीरगी की

जानवर अब हैं ज़ियादा जंगलों में

नस्ल घटती जा रही है आदमी की

हैं अंधेरे घर में अपने क़ैद सारे

कौन खींचेगा लकीरें रौशनी की

जो भी हो सागर मिलेगा तिश्नगी को

बाढ़ ले जाये हमें अब तो नदी की

आंखेंं फट जाएँगी हैरत से…

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Posted on May 15, 2020 at 7:00pm — 10 Comments

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