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प्रदीप देवीशरण भट्ट
  • Male
  • हैदराबाद (तेलांगाना)
  • India
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  • Sheikh Shahzad Usmani
  • Samar kabeer
 

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प्रदीप देवीशरण भट्ट commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल इस्लाह के लिए मनोज अहसास
"वाह बहुत खूब"
yesterday
प्रदीप देवीशरण भट्ट shared Manoj kumar Ahsaas's blog post on Facebook
yesterday
Pratibha Pandey commented on प्रदीप देवीशरण भट्ट's blog post नया भारत
"आदरणीय प्रदीप जी नमस्कार बहुत ही अच्छी कविता , बधाई स्वीकार करें  साथ ही "वियोग " के लिए भी हार्दिक आभार "
yesterday
Pratibha Pandey commented on प्रदीप देवीशरण भट्ट's blog post नया भारत
"आदरणीय प्रदीप जी नमस्कार बहुत ही अच्छी कविता , बधाई स्वीकार करें  साथ ही "चाँद सितारे " के लिए भी हार्दिक आभार "
yesterday
प्रदीप देवीशरण भट्ट commented on Pratibha Pandey's blog post वियोग
"कृपया इसे यूँ कर लें " बस तुम्हारी लगाई बगिया को सहेज रहा हूँ" बधाई,"
yesterday
प्रदीप देवीशरण भट्ट shared Pratibha Pandey's blog post on Facebook
yesterday
प्रदीप देवीशरण भट्ट commented on प्रदीप देवीशरण भट्ट's blog post नया भारत
"शुक्रिया धामी जी,"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on प्रदीप देवीशरण भट्ट's blog post नया भारत
"आ. भाई प्रदीप देवीशरण जी, सुंदर रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
yesterday
प्रदीप देवीशरण भट्ट posted a blog post

नया भारत

बरसों से जो ख्वाब थे देखे, पूरे हमने कर डाले मंसूबे हर एक दुश्मन के, बिना सर्फ़ के धो डाले धाराओं के जाल में, मज़लूमों का जो हक थे मार रहे हमने ऐसी धाराओं के हर्फ वो सारे धो डाले सदियों से जो जमी हुई थी, साफ़ नही कर पाया कोई हमने ऐसी जमी मैल के, बर्फ वो सारे धो डाले तीन दुकाने चलती रहती थीं, कश्मीर की घाटी में हमने ऐसे बीन बीन कर, ज़र्फ वो सारे धो डाले बार बार समझाया सबको, पर वो समझ नही पाए हमने 'दीप' फ़िर मजबूरी में कम-ज़र्फ़ वो धो डाले -प्रदीप देवीशरण भट्ट- मौलिक व अप्रकशित सर्फ- फ़ेनिल…See More
Thursday
प्रदीप देवीशरण भट्ट commented on प्रदीप देवीशरण भट्ट's blog post मैं कोई तारा नही खुर्शीद हूँ
"लक्ष्मण जी शुक्रिया, मैं इस विद्या का एक विद्यार्थी हूँ, प्रयास करता रहता हूँ।"
Aug 9
प्रदीप देवीशरण भट्ट commented on प्रदीप देवीशरण भट्ट's blog post मैं कोई तारा नही खुर्शीद हूँ
"समर जी शुक्रिया, मैंने आपको एक व्याक्तिगत संदेश इसी आशय से दिया था कि कृपया आप अपना मोबाइल नम्बेर दे देवें ताकि पोस्ट करने से पूर्व मैं आपसे इस्लाह करा सकूँ। गज़ल लिखने का प्रयास करता हूँ किंतु कई बार कुछ दिक्कत आ जाती है जिससे इस्लाह की ज़रुरत पड्ती…"
Aug 9
Samar kabeer commented on प्रदीप देवीशरण भट्ट's blog post मैं कोई तारा नही खुर्शीद हूँ
"जनाब प्रदीप जी आदाब,अगर ये ग़ज़ल है तो इसमें मतला नहीं है,और क़ाफ़िया दोष भी है,बहरहाल इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Aug 8
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on प्रदीप देवीशरण भट्ट's blog post मैं कोई तारा नही खुर्शीद हूँ
"आ. भाई प्रदीप जी, गजल का अच्छा प्रयास हुआ है। हार्दिक बधाई। कई शेर रदीफ दोष लिए हैं देखिएगा।"
Aug 7
C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" commented on प्रदीप देवीशरण भट्ट's blog post शहर के हंकाई
"सुन्दर "
Aug 6
C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" commented on प्रदीप देवीशरण भट्ट's blog post बच्चा ज्यों-ज्यों होता बडा
"सुन्दर रचना "
Aug 6
C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" commented on प्रदीप देवीशरण भट्ट's blog post मैं कोई तारा नही खुर्शीद हूँ
"सुन्दर "
Aug 6

Profile Information

Gender
Male
City State
हैदराबाद
Native Place
रुडकी (उत्तराखंड)
Profession
Government
About me
Superintendent in KVIC, हैदराबाद

प्रदीप देवीशरण भट्ट's Blog

नया भारत

बरसों से जो ख्वाब थे देखे, पूरे हमने कर डाले

मंसूबे हर एक दुश्मन के, बिना सर्फ़ के धो डाले



धाराओं के जाल में, मज़लूमों का जो हक थे मार रहे

हमने ऐसी धाराओं के हर्फ वो सारे धो डाले



सदियों से जो जमी हुई थी, साफ़ नही कर पाया कोई

हमने ऐसी जमी मैल के, बर्फ वो सारे धो डाले



तीन दुकाने चलती रहती थीं, कश्मीर की घाटी में

हमने ऐसे बीन बीन कर, ज़र्फ वो सारे धो डाले



बार बार समझाया सबको, पर वो समझ नही पाए

हमने 'दीप' फ़िर मजबूरी में कम-ज़र्फ़…

Continue

Posted on August 15, 2019 at 9:00am — 3 Comments

मैं कोई तारा नही खुर्शीद हूँ

मुझसे ना उलझे कोई ये जान ले

मैं कोई श्लाघा नही ताकीद हूँ

तेरी मंज़िल तक तुझे पहुँचाऊगाँ

मैं कोई छलिया नही मुर्शिद हूँ

हंस रहे हैं मुझपे वो ये जान…

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Posted on August 6, 2019 at 4:30pm — 5 Comments

शहर के हंकाई

लहू बुज़ुर्गो का मिट्टी में बहाने वालो

दागदारोँ को सरेआम बचाने वालो

बच्चोँ के हाथ में शमशीर थमाने वालो

बात फूलोँ की तुम्हारे मुँह से नहीं अच्छी लगती



खुदा के नाम पे दुकानों को चलाने वालो

धर्म् के नाम पर इंसा को बाँट्ने वालो…

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Posted on July 30, 2019 at 12:30pm — 3 Comments

बच्चा ज्यों-ज्यों होता बडा

बच्चा ज्यों-ज्यों होता बड़ा

हँसता कभी रोता ज़रा

उँगली थामे दौड़ रहा वह

गिरता कभी होता खड़ा
देखें बचपन तो जी ललचाए

काश हम भी बच्चे बन जाएँ

अट्खेली से सबै…
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Posted on July 29, 2019 at 2:00pm — 3 Comments

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At 7:12am on November 21, 2018, Ahmed Maris said…

Good Day,
How is everything with you, I picked interest on you after going through your short profile and deemed it necessary to write you immediately. I have something very vital to disclose to you, but I found it difficult to express myself here, since it's a public site.Could you please get back to me on:( mrsstellakhalil5888@gmail.com ) for the full details.

Have a nice day
Thanks God bless.
Stella.

 
 
 

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