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प्रदीप देवीशरण भट्ट
  • Male
  • हैदराबाद (तेलांगाना)
  • India
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  • Sheikh Shahzad Usmani
  • Samar kabeer
 

प्रदीप देवीशरण भट्ट's Page

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Samar kabeer commented on प्रदीप देवीशरण भट्ट's blog post मेंरी लाडली
"जनाब प्रदीप देवीशरण भट्ट जी आदाब,बहुत अच्छी भावपूर्ण कविता लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । 'जब तूने पलकें 'झपकाई'--"झपकाईं" 'औरआज खुशियाँ की'--"ख़ुशियों की""
yesterday
प्रदीप देवीशरण भट्ट posted a blog post

मेंरी लाडली

जब तू पैदा हुई थीतो मैं झूम के नाचा था मेरी गोद में आकरजब तूने पलकें झपकाई मैंने अप्रतिम प्रसन्नता क़ोअनुभव किया था फ़िर तू शनै शनैबेल की तरह बड़ी होने लगी तेरे हाथ पीले करने कीमुझे फ़िक्र होने लगी औऱ आज खुशियाँ कीबारात आ रही है मेरी लाड़ली मुझे छोड़गैरों के घर जा रही है आज मैं पलकें झपकाउंगामगर आँसू छिपाने के लिए - प्रदीप देवीशरण भट्ट - मौलिक व अप्रकाशितSee More
Monday
प्रदीप देवीशरण भट्ट commented on Sushil Sarna's blog post ख़्वाब ... (क्षणिका )
"बेहतरीन क्षणिका"
Monday
प्रदीप देवीशरण भट्ट shared Sushil Sarna's blog post on Facebook
Monday
प्रदीप देवीशरण भट्ट commented on प्रदीप देवीशरण भट्ट's blog post -ट्विंकल ट्विंकल लिट्ल स्टार-
"जनाब समर जी एव्म सुशील जी  बहुत आभार"
Monday
Samar kabeer commented on प्रदीप देवीशरण भट्ट's blog post -ट्विंकल ट्विंकल लिट्ल स्टार-
"जनाब प्रदीप देवीशरण भट्ट जी आदाब,हालात-ए-हाज़िर: पर तंज़ करती अच्छी रचना हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Saturday
Sushil Sarna commented on प्रदीप देवीशरण भट्ट's blog post -ट्विंकल ट्विंकल लिट्ल स्टार-
"आदरणीय वर्तमान हालात पर तीक्ष्ण कटाक्ष। अब तो अखबार से भी मासूम क्रंदन की आबाजें आती हैं। जाने वहशी पंजों से कब मासूम सुरक्षित हो पाएंगे। इस रचना हेतु हार्दिक आभार।"
Saturday
Samar kabeer and प्रदीप देवीशरण भट्ट are now friends
Friday
प्रदीप देवीशरण भट्ट updated their profile
Friday
प्रदीप देवीशरण भट्ट commented on Sushil Sarna's blog post कर्म आधारित दोहे :
"बहुत खुब सुशील जी"
Friday
प्रदीप देवीशरण भट्ट posted a blog post

-ट्विंकल ट्विंकल लिट्ल स्टार-

ट्विंकल ट्विंकल लिट्ल स्टारबंद करो ये अत्याचारनज़रो में वहशत है पसरीजीना बच्चों का दुश्वारशहर नया हर रोज़ हादसाक्यूँ चुप बैठी है सरकारनज़र गड़ाए बैठे हैं फूल पर कितने ज़ालिम किरदारनेह की आड़ में रोज़ ना जानेकितने टूट रहे  करारमनुज नहीँ इन्हें कहो दरिंदेइनसे तो बेहतर हैं खार नोचा मारा इन खबरों सेभरे पड़े सारे अख़बार'दीप' वकीलों की ना पूछोवो बेज्ज्त करते बारम्बार - प्रदीप देवीशरण भट्ट -मौलिक व अप्रकाशितSee More
Jun 18
प्रदीप देवीशरण भट्ट commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"बहुत खूब अच्छि गज़ल  हुई ।बधाई"
Jun 18
प्रदीप देवीशरण भट्ट shared Naveen Mani Tripathi's blog post on Facebook
Jun 18
प्रदीप देवीशरण भट्ट posted a blog post

माँ भी बोझ लगती है

बोझ उठाती हैअकेली माँ कई बच्चोँ काकई बच्चोँ को मगर माँ भी बोझ लगती है लहू से सींचकर जिसको बडा किया उसकोबहु के साथ ही रहने में मौज लगती है रुठ जाता था सड्क पे जो एक खिलौने कोटूटी ऐनक भी उसे अब माँ की बोझ लगती है वो पूछ्ता ही नही क्या खाना खा लिया तुमनेभूख तो भूख है माँ को भी रोज़ लगती है पांव जब से बहू के भारी हो गये हैं ‘प्रदीप’सास में माँ की उसको फिरोज़ लगती है-प्रदीप देविशरण भट्ट-मौलिक व अप्रकाशितSee More
Jun 1
प्रदीप देवीशरण भट्ट shared Sushil Sarna's blog post on Facebook
May 27
प्रदीप देवीशरण भट्ट commented on Mohit mishra (mukt)'s blog post ऐसा न करना लौट कर तुम फिर चले आना
"मोहित जी,उत्तम रचना हुई"
May 27

Profile Information

Gender
Male
City State
हैदराबाद
Native Place
रुडकी (उत्तराखंड)
Profession
Government
About me
Superintendent in KVIC, हैदराबाद

प्रदीप देवीशरण भट्ट's Blog

मेंरी लाडली

जब तू पैदा हुई थी

तो मैं झूम के नाचा था

मेरी गोद में आकर

जब तूने पलकें झपकाई

मैंने अप्रतिम प्रसन्नता क़ो

अनुभव किया था

फ़िर तू शनै शनै

बेल की तरह बड़ी…

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Posted on June 24, 2019 at 11:30am — 1 Comment

-ट्विंकल ट्विंकल लिट्ल स्टार-

ट्विंकल ट्विंकल लिट्ल स्टार

बंद करो ये अत्याचार

नज़रो में वहशत है पसरी

जीना बच्चों का दुश्वार

शहर नया हर रोज़ हादसा

क्यूँ चुप बैठी है सरकार

नज़र गड़ाए बैठे हैं फूल पर …

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Posted on June 18, 2019 at 3:00pm — 3 Comments

माँ भी बोझ लगती है

बोझ उठाती हैअकेली माँ कई बच्चोँ का

कई बच्चोँ को मगर माँ भी बोझ लगती है

 

लहू से सींचकर जिसको बडा किया उसको

बहु के साथ ही रहने में मौज लगती है…

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Posted on May 30, 2019 at 3:00pm

श्वान  का दर्द

जब से शहर में चुनाव का बिगूल बज गया

श्वान का भी श्वान से खौफ निकल गया

शोर और सिर्फ शोर मच रहा सुबह शाम

पांच साल बाद नेता को पडा जनता से काम

  

श्वान हैरान परेशान घूमता रहता इधर उधर…

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Posted on April 4, 2019 at 11:00am — 4 Comments

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At 7:12am on November 21, 2018, Ahmed Maris said…

Good Day,
How is everything with you, I picked interest on you after going through your short profile and deemed it necessary to write you immediately. I have something very vital to disclose to you, but I found it difficult to express myself here, since it's a public site.Could you please get back to me on:( mrsstellakhalil5888@gmail.com ) for the full details.

Have a nice day
Thanks God bless.
Stella.

 
 
 

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