For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

जिस्म तो नश्वर है, ये मिट जाएगा

प्रेम पर अपना अमर हो जाएगा

 

सोच मत खोया क्या तूने है यहाँ

एक लम्हा भी दहर हो जाएगा

 

माना ये छोटा है पर धीरज तो धर

बीज एक दिन ये शजर हो जाएगा

 

भाग्य में जितना लिखा था मिल गया

अपना इसमें भी गुजर हो जाएगा

 

जीस्त बेफिक्री में काटी है मगर

मौत का उस पर असर हो जाएगा

 

तिरगी से डर के क्यूँ रहना भला

आज या फ़िर कल सहर हो जाएगा

 

सीख कुछ मेरे तजरबे से ‘प्रदीप’

वरना तू भी दर बदर हो जाएगा

 

                    मौलिक व अप्रकाशित                                                                                                                  

-प्रदीप देवीशरण भट्ट -16.01.2020

Views: 56

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Samar kabeer on January 28, 2020 at 2:36pm

जनाब प्रदीप देवीशरण भट्ट जी आदाब,अगर ये ग़ज़ल है तो इसके मतले में क़वाफ़ी नहीं हैं,दूसरी बात शीर्षक भी ग़लत है 'सहर हो जाएगा' 'सहर' शब्द स्त्रीलिंग है,देखियेगा ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

रवि भसीन 'शाहिद' commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़ज़ल - एक अरसे से जमीं से लापता है इन्किलाब
4 minutes ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़ज़ल - एक अरसे से जमीं से लापता है इन्किलाब
"आदरणीय Ram Awadh VIshwakarma साहिब, आपको ग़ज़ल की पेशकश पर बधाई। जनाब मैं ये समझने में पूरी तरह…"
6 minutes ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post करेगा तू क्या मिरी वकालत (ग़ज़ल)
"आदरणीय रूपम कुमार 'मीत' साहिब, जी नहीं नहीं, मैं भी नौ-मश्क़ शाइर ही हूँ, इसलिए कई बार…"
1 hour ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post ख़ुदा ख़ैर करे (ग़ज़ल)
"आदरणीय रूपम कुमार 'मीत' साहिब, ग़ज़ल तक आने के लिए और अपनी अमूल्य उत्साहवर्धक टिप्पणी देने…"
1 hour ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post जो तेरी आरज़ू (ग़ज़ल)
"आदरणीय रूपम कुमार 'मीत' साहिब, आपकी हौसला-अफ़ज़ाई के लिए तह-ए-दिल से आपका आभारी हूँ! आप जिस…"
1 hour ago
Ram Awadh VIshwakarma commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़ज़ल - एक अरसे से जमीं से लापता है इन्किलाब
"आदरणीय दयाराम जी आदाब। ग़ज़ल पसन्द करने के लिए सादर आभार"
1 hour ago
Ram Awadh VIshwakarma commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़ज़ल - एक अरसे से जमीं से लापता है इन्किलाब
"आदरणीया डिम्पल शर्मा जी आदाब। ग़ज़ल सराहना एवं उत्साह वर्धन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।"
1 hour ago
Ram Awadh VIshwakarma commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़ज़ल - एक अरसे से जमीं से लापता है इन्किलाब
"आदरणीय सुरेन्द्र नाथ जी। सादर अभिवादन। ग़ज़ल पर टिप्पणी एवं उत्साह वर्धन के लिए हृदय से आभार"
1 hour ago
Ram Awadh VIshwakarma commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़ज़ल - एक अरसे से जमीं से लापता है इन्किलाब
"आदर्णीय तेजवीर सिंह जी नमस्कार। ग़ज़ल पर टिप्पणी करने एवं उत्साह वर्धन के लिए हार्दिक आभार"
1 hour ago
Ram Awadh VIshwakarma commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़ज़ल - एक अरसे से जमीं से लापता है इन्किलाब
"आदरणीय समर कबीर साहब ग़ज़ल पर टिप्पणी करने, उत्साह बढ़ाने एवं सुझाव के लिए तहे दिल से शुक्रिया। मैं…"
1 hour ago
Dayaram Methani commented on Dimple Sharma's blog post कहीं नायाब पत्थर है , कहीं मन्दिर मदीना है
" आदरणीय डिंपल शर्मा जी सुंदर गज़ल सृजन के लिए बहुत बहुत बधाई आपको। कोई मन्दिर पे सर टेके, कोई…"
2 hours ago
Dayaram Methani commented on Sushil Sarna's blog post उल्फ़त पर दोहे :
" आदरणीय सुशील सरना जी, अति सुंदर दोहा सृजन के लिए बधाई स्वीकार करें।"
2 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service