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Gurpreet Singh
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Gurpreet Singh's blog post ग़ज़ल --इस्लाह के लिए
"बहुत बहुत बधाई आदरणीय.."
23 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Gurpreet Singh's blog post ग़ज़ल इस्लाह के लिए (गुरप्रीत सिंह)
"आद0 गुरप्रीत जी सादर अभिवादन, बहुत खूबसूरत ग़ज़ल, बहुत उम्दा, दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ"
yesterday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Gurpreet Singh's blog post ग़ज़ल इस्लाह के लिए (गुरप्रीत सिंह)
"आद0 गुरप्रीत जी सादर अभिवादन, बहुत खूबसूरत ग़ज़ल, बहुत उम्दा, दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ"
yesterday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Gurpreet Singh's blog post ग़ज़ल --इस्लाह के लिए
"आद0 गुरप्रीत जी समर साहब की बातों से हम भी सहमत हैं। शेष सृजन पर बधाइयाँ आपको।"
yesterday
Mohammed Arif commented on Gurpreet Singh's blog post ग़ज़ल --इस्लाह के लिए
"आदरणीय गुरप्रीत जी आदाब,ग़ज़ल का बहुत ही बेहतरीन प्रयास रहा आपको , सबसे पहले इस प्रयास के लिए आपको बधाई । आपकी सदशयता और सहजता का मैं कायल हो गया क्योंकि आपने सबसे पहले ही लिखा कि"ग़ज़ल इस्लाह के लिए" यह दर्शाता है कि आप ग़ज़ल को कितनी शिद्दत से…"
Wednesday
Samar kabeer commented on Gurpreet Singh's blog post ग़ज़ल --इस्लाह के लिए
"जनाब गुरप्रीत सिंह जी आदाब,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ । सात अशआर पर मुश्तमिल ग़ज़ल के तीन अशआर एक ही तरकीब से कहे गए है 'वो',हालांकि ये कोई दोष नहीं है,मगर ये अमल ठीक भी नहीं,इससे बचना चाहिये । 'वो…"
Wednesday
Gurpreet Singh posted a blog post

ग़ज़ल --इस्लाह के लिए

      (122-122-122-12)रहे हम तो नादां ये क्या कर चले कि दौर ए जफ़ा में वफ़ा कर चले।वो तूफ़ान के जैसे आ कर चले मेरा आशिआना फ़ना कर चले।वो ज़िक्र अपनी रंगीनी का कर चले ये चेहरा मेरा ज़र्द सा कर चले।दबे पांव बिन कोई आहट किए हम आँखों में सपने सुला कर चले।ज़मीं बुज़दिली से जो वाक़िफ़ हुई तो फिर हम ये नज़रें उठा कर चले।तड़पते रहे अधजले कुछ हुरूफ़ वो जब मेरे खत को जला कर चले।बताओ मुझे नींद आएगी क्या कि वो मेरा बिस्तर बिछा कर.... चले।See More
Wednesday
Gurpreet Singh commented on surender insan's blog post ग़ज़ल " जिंदगी से जी भर गया कब का "
"आदरणीय सुरेंद्र इंसां जी,,बहुत ही बढ़िया ग़ज़ल कही है आपने,,,मकता विशेष तौर पर बेहद पसंद आया "
Monday
Gurpreet Singh commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(आज चढ़ता जा रहा पारा बहुत)
"बर्फ पिघली,बह गया पानी कहाँ?हो गया ऊँचा शिखर बौना बहुत।2वाह आदरणीय मनन कुमार सिंह जी,, बहुत अच्छी ग़ज़ल कही आपने,, "फिर चिरागों ने दबोचा रोशनी को"इस मिसरे में अंत में एक मात्रा बढ़ रही है,, सो बे बह्र हो रहा है,,,"
Monday
Gurpreet Singh commented on rajesh kumari's blog post ये जो इंसान आज वाले हैं (एक ही रदीफ़ पर दो गज़लें ---'राज')
"दोनों ही ग़ज़लें बहुत अच्छी हुई है आदरणीया राजेश कुमारी जी,,, आपको बहुत बहुत बधाई "
Monday
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Gurpreet Singh's blog post ग़ज़ल इस्लाह के लिए (गुरप्रीत सिंह)
"आदरणीय विजय सर सादर आभार"
Aug 7
Gurpreet Singh commented on Gajendra shrotriya's blog post ग़ज़ल - इक जलतरंग दिल में बजाकर चले गए
"आदरणीय गजेंद्र जी,, बहुत दिलकश अशआर हुए हैं,,, इस खूबसूरत  ग़ज़ल के लिए आपको बधाई "
Aug 7
Gurpreet Singh commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- ज़िन्दगी की ग़ज़ल हो रही है ( दिनेश कुमार )
"खूबसूरत अशआर से सजी इस शानदार ग़ज़ल के लिए बहुत बहुत बधाई  आदरणीय दिनेश कुमार जी "
Aug 7
Gurpreet Singh commented on surender insan's blog post ग़ज़ल "दिखाना ख़्वाब यूँ अच्छा नहीं है"
"बहुत खूब आदरणीय सुरेंद्र इंसां जी,, बहुत अच्छी ग़ज़ल  कही है आपने "
Aug 4
Gurpreet Singh and vijay nikore are now friends
Aug 2
Gurpreet Singh commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल -कायम रहा रुतबा तेरा
"आदरणीय नवीन मणि जी,, बहुत खूबसूरत ग़ज़ल कही  है आपने,, बधाई कुबूल करें "
Aug 2

Profile Information

Gender
Male
City State
Patiala Punjab
Native Place
India
Profession
Govt Employee
About me
I love to write, but dont have an ustaad so dont know the rules. Thats why i am here

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ग़ज़ल --इस्लाह के लिए

      (122-122-122-12)

रहे हम तो नादां ये क्या कर चले

कि दौर ए जफ़ा में वफ़ा कर चले।

वो तूफ़ान के जैसे आ कर चले

मेरा आशिआना फ़ना कर चले।

वो ज़िक्र अपनी रंगीनी का कर चले

ये चेहरा मेरा ज़र्द सा कर चले।

दबे पांव बिन कोई आहट किए

हम आँखों में सपने सुला कर चले।

ज़मीं बुज़दिली से जो वाक़िफ़ हुई

तो फिर हम ये नज़रें उठा कर चले।

तड़पते रहे अधजले कुछ हुरूफ़

वो जब मेरे खत को जला कर…

Continue

Posted on August 16, 2017 at 4:43pm — 4 Comments

इस्लाह की गुज़ारिश के साथ एक ग़ज़ल पेश है (गुरप्रीत सिंह )

2122 -1212 -22

मुझ पे तू मेहरबां नहीं होता
मैं तेरा क़द्रदां नहीं होता।

बोलने वाले कब ये समझेंगे
चुप है जो बेज़ुबां नहीं होता।

कोई अरमान हम भी बोते. . .गर
मौसम-ए-दिल ख़िज़ाँ नहीं होता।

ख्वाहिशो सीने पे न दस्तक दो
अब मेरा दिल यहां नहीं होता।

जो बचाए किसी को कातिल से
वो सदा पासबाँ नहीं होता।

चाहे कितना उठे धुआँ ऊपर
वो कभी आसमाँ नहीं होता।
(मौलिक व् अप्रकाशित)

Posted on July 20, 2017 at 1:41pm — 14 Comments

ग़ज़ल इस्लाह के लिए (गुरप्रीत सिंह)

2122 -1212 -22


आस दिल में दबी रही होगी
और फिर ख़्वाब बन गई होगी।

टूट जाए सभी का दिल या रब
दिलजले को बड़ी ख़ुशी होगी।

ज़ह्न हारा हुआ सा बैठा है
दिल से तक़रार हो गई होगी।

जिसकी खातिर लुटा दी जान उसने
चीज़ वो भी तो कीमती होगी।

जब मुड़ा तेरी ओर परवाना
शमअ बेइन्तहा जली होगी।

(मौलिक व् अप्रकाशित)

Posted on July 11, 2017 at 1:26pm — 28 Comments

ग़ज़ल --इस्लाह के लिए (गुरप्रीत सिंह )

(2122-2122-2122-212)

पहले सूरज सा तपें खुद को ज़रा रोशन करें

फिर थमें मत फिर किसी को चाँद सा रोशन करें।

ये नहीं, कोई दिया बस इक दफ़ा रोशन करें

गर करें, बुझने पे उसको बारहा रोशन करें।

मेरी भी वो ही तमन्ना है जो सारे शह्र की

आप मेरे घर में आएं घर मेरा रोशन करें।

सामने है इक चराग़ और आप के हाथों में शमअ

आप किस उलझन में हैं जी?क्या हुआ? रोशन करें!

तीरगी के हैं नुमाइंदे सभी इस शह्र में

कौन है…

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Posted on May 23, 2017 at 10:04am — 22 Comments

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At 4:55pm on August 30, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय गुरप्रीत सिंह जी, आप नई चर्चा आरम्भ कर सकते हैं किन्तु ग़ज़ल के सम्बन्ध में "ग़ज़ल की कक्षा" और "ग़ज़ल की बातें" में पूर्व से ही कई चर्चाएँ चल रही है. जहाँ तक मुझे लगता है उन चर्चाओं में ग़ज़ल के लगभग सभी पहलुओं पर चर्चा हुई है और सतत हो रही है. अतः जिस विषय पर चर्चा पूर्व में ही आरम्भ हो चुकी है उसे आप निरंतर कर सकते है. वहीं अपने प्रश्न भी पूछ सकते हैं. गुनीजन स्वमेव ही उत्तर के साथ वहां उपस्थित हो जायेंगे. सादर 

At 10:42pm on August 21, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

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