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Gurpreet Singh
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dandpani nahak left a comment for Gurpreet Singh
"आदरणीय गुरप्रीत सिंह जी आदाब , बहुत बहुत शुक्रिया हौसला अफ़जाई का मेरे ग़ज़ल कहने का प्रयास आपको पसंद आया दिल से शुक्रगुज़ार हूँ!"
Jul 27
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-109
"सर जी आपकी ग़ज़ल भी दिखाई नहीं दे रही इस बार "
Jul 27
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-109
"आदरणीय नीलेश सर जी नमस्कार ,  बहुत समय बाद आपकी ग़ज़ल पढ़ने को मिली । एक अजीब सी ख़ुशी महसूस हुई । हमेशा की तरह ग़ज़ल बेहतरीन ग़ज़ल । "
Jul 27
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-109
"आदरणीय अनीस शेख जी ,  इस बेहतरीन ग़ज़ल के लिए मुबारकबाद क़ुबूल करें जी । "
Jul 27
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-109
"वाह वाह आदरणीय दंडपाणि नाहक जी ,  बहुत ही खूबसरत ग़ज़ल कही आपने । भाषा की सरलता और वाक्य बनावट बहुत अच्छी लगी । इस बह्र को भी बहुत आसानी से निभाया आपने ।  बहुत बहुत बधाई । "
Jul 27
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-109
"आदरणीय मुनीश तन्हा जी वाह बहुत अच्छे अशआर कहे आपने इस ग़ज़ल में ।  ' उसने जो देखा प्यार भरी शोख नजर से'    इस मिसरे में ' देखा'  शब्द शायद बह्र में फिट नहीं हो रहा जी । "
Jul 27
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-109
"आदरणीय बासुदेव अग्रवाल 'नमन'  जी ,  आपकी  ग़ज़ल बहुत पसंद आई ।  बहुत ही सुंदर भाव पिरोए हैं आपने ग़ज़ल में ।  बहुत बहुत बधाई "
Jul 27
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-109
"वाह वाह जनाब नादिर खान जी बहुत बढ़िया कही आपने । कई अशआर में तक़ाबुल-ए-रदीफ़ दोष आ गया है जिसे आप दूर कर लेंगे "
Jul 27
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-109
"आदरणीया राजेश कुमारी जी ,  बहुत अच्छी ग़ज़ल कही आपने हमेशा की तरह ।  बहुत बहुत मुबारकबाद । "
Jul 27
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-109
"आदरणीय अमित जी ,  बहुत खूबसरत ग़ज़ल हुई है जी ।  जो खामियां समर सर ने बताई हैं उन्हें दूर करने का प्रयास करें जी । "
Jul 27
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-109
"वाह वाह आदरणीय आसिफ़ ज़ैदी जी , बहुत उम्दा ग़ज़ल से शुरुआत की आपने मुशायरे की ।  बहुत बहुत बधाई आपको "
Jul 26
Gurpreet Singh posted a blog post

दो ग़ज़लें (2122-1212-22)

1.शमअ  देखी न रोशनी देखी । मैने ता उम्र तीरगी देखी । देखा जो आइना तो आंखों में, ख़्वाब की लाश तैरती देखी । टूटे दिल का हटाया मलबा तो, आरज़ू इक दबी पड़ी देखी । एक इक पल डरावना सा लगा, इतने पास आ के ज़िन्दगी देखी । मैने इंसानियत रह ए हक़ पर, दो कदम चल के हांफती देखी 2.आप ने क्या कभी परी देखी । मैने यारो अभी अभी देखी । उसकी आँखों में सुब्ह सी देखी, और ज़ुल्फ़ों में शाम भी देखी । लब थे अंगार आँख थी बिजली, फ़िर भी चहरे पे सादगी देखी । उस से ज्यूँ ही नज़र मिली यारो, गिरती मैने तो बर्क़ सी देखी । उस नज़र सा…See More
Jul 24
Gurpreet Singh commented on Gurpreet Singh's blog post दो ग़ज़लें (2122-1212-22)
"'उससे ज्यूँ ही नज़र मिली यारो'   वाह सर जी ।  बहुत बहुत धन्यवाद "
Jul 23
Samar kabeer commented on Gurpreet Singh's blog post दो ग़ज़लें (2122-1212-22)
"//उस से इक पल निगाह टकराई // इस मिसरे को यूँ कर सकते हैं:- 'उससे ज्यूँ ही नज़र मिली यारो'"
Jul 23
Gurpreet Singh commented on Gurpreet Singh's blog post दो ग़ज़लें (2122-1212-22)
"बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय अजय तिवारी जी "
Jul 23
Gurpreet Singh commented on Gurpreet Singh's blog post दो ग़ज़लें (2122-1212-22)
"आदाब समर सर जी । ग़ज़ल की सरहना के शुक्रिया । ये मिसरा ऐसे ठीक रहेगा क्या    ' उस से इक पल निगाह टकराई '    जी बहुत दिनों बाद obo पर आ पाया । क्या बताएं सर जी        दुनियादारी ने ऐसे उलझाया है…"
Jul 23

Profile Information

Gender
Male
City State
Patiala Punjab
Native Place
India
Profession
Govt Employee
About me
I love to write, but dont have an ustaad so dont know the rules. Thats why i am here

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दो ग़ज़लें (2122-1212-22)

1.

शमअ  देखी न रोशनी देखी । 

मैने ता उम्र तीरगी देखी । 

देखा जो आइना तो आंखों में, 

ख़्वाब की लाश तैरती देखी । 

टूटे दिल का हटाया मलबा तो, 

आरज़ू इक दबी पड़ी देखी । 

एक इक पल डरावना सा लगा, 

इतने पास आ के ज़िन्दगी देखी । 

मैने इंसानियत रह ए हक़ पर, 

दो कदम चल के हांफती देखी 

2.

आप ने क्या कभी परी देखी । 

मैने यारो अभी अभी देखी । 

उसकी आँखों में सुब्ह सी…

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Posted on July 14, 2019 at 12:30pm — 6 Comments

ग़ज़ल

(2122-2122-2122-212)

मुश्किलें कितनी हैं अपने दरमियाँ गिनता रहा ।

बैठ कर मैं राह की दुश्वारियाँ गिनता रहा ।

आँखों में अश्कों का दरिया चढ़ के जब उतरा तो फ़िर,

मैं तो बस ख़्वाबों की डूबी कश्तियाँ गिनता रहा ।

और करता भी तो क्या वो नौजवां बेरोज़गार,

दी हैं कितनी नौकरी कीअरज़ियाँ गिनता रहा ।

राजनेता को न था मतलब किसी इंसान से,

वो तो केवल धोतियाँ और टोपियाँ गिनता रहा ।

वो रहे गिनते मुनाफ़ा कारख़ाने का उधर,…

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Posted on July 8, 2018 at 7:50am — 17 Comments

(ग़ज़ल - इस्लाह के लिए) अक्सर तन्हाई में रोया करता हूँ -(गुरप्रीत सिंह)

22-22-22-22-22-2



अक्सर तन्हाई में रोया करता हूँ।

अपने आँसू ख़ुद ही पोंछा करता हूँ।



देर तलक आईना देखा करता हूँ।

जाने उसमें किसको ढूँढा करता हूँ।



दिल में दर्द उठे तो फ़िर क्या करता हूँ?

बस उसकी तस्वीर से शिक्वा करता हूँ।



क्या वो अब भी याद मुझे करता होगा?

ख़ुद से ऐसी बातें पूछा करता हूँ।



एक न इक दिन पत्थर पिघलेगा पगले!

ये कह के दिल को बहलाया करता हूँ।



शाम ढले वो तोड़ दिया करता हूँ मैं,

सुब्ह जो अक्सर ख़ुद… Continue

Posted on November 4, 2017 at 11:30am — 12 Comments

तरही ग़ज़ल (पहले ये बतला दो उसने छुप कर तीर चलाए तो)- गुरप्रीत सिंह

लाख करे कोशिश सोने की फ़िर भी नींद न आए तो।

एक अधूरा ख़्वाब किसी को सारी रात जगाए तो ।



तुम तो हौले से 'ना' कह के अपने रस्ते चल दोगे,

लेकिन किसी का अम्बर टूटे और धरती फट जाए तो ।



हाँ मैं तेरे ज़ुल्म के बारे में न ज़ुबाँ से बोलूँगा,

पर क्या होगा गर महफ़िल में आँख मेरी भर आए तो ।



फ़िर बतलाना सीने ऊपर वार बचाना है कैसे,

पहले ये बतला दो उसने छुप कर तीर चलाए तो ।



वो गर नज़रों से ही छू ले तो दिल धक धक करने लगे,

जाने क्या हो गर वो सचमुच आकर… Continue

Posted on November 2, 2017 at 1:30pm — 9 Comments

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At 8:13pm on July 27, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय गुरप्रीत सिंह जी आदाब , बहुत बहुत शुक्रिया
हौसला अफ़जाई का मेरे ग़ज़ल कहने का प्रयास आपको पसंद आया दिल से शुक्रगुज़ार हूँ!
At 4:55pm on August 30, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय गुरप्रीत सिंह जी, आप नई चर्चा आरम्भ कर सकते हैं किन्तु ग़ज़ल के सम्बन्ध में "ग़ज़ल की कक्षा" और "ग़ज़ल की बातें" में पूर्व से ही कई चर्चाएँ चल रही है. जहाँ तक मुझे लगता है उन चर्चाओं में ग़ज़ल के लगभग सभी पहलुओं पर चर्चा हुई है और सतत हो रही है. अतः जिस विषय पर चर्चा पूर्व में ही आरम्भ हो चुकी है उसे आप निरंतर कर सकते है. वहीं अपने प्रश्न भी पूछ सकते हैं. गुनीजन स्वमेव ही उत्तर के साथ वहां उपस्थित हो जायेंगे. सादर 

At 10:42pm on August 21, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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