For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मोहन बेगोवाल
  • Male
  • Amritsar
  • India
Online Now
Share

मोहन बेगोवाल's Friends

  • Amit Kumar "Amit"
  • गिरिराज भंडारी
  • Dr. Swaran J. Omcawr
  • राजेन्द्र सिंह कुँवर 'फरियादी'
  • मिथिलेश वामनकर

मोहन बेगोवाल's Groups

 

मोहन बेगोवाल's Page

Latest Activity

मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-60 (विषय: धरोहर)
"आदरणीया बबिता जी, बहुत अच्छे से बुनी लघुकथा के लिए बधाई हो l"
4 minutes ago
मोहन बेगोवाल posted blog posts
19 hours ago
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"आदरनीय नाहक जी, ग़ज़ल के लिए बधाई हो "
yesterday
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
" आदरनीय समर जी, गलती के लिए मुआफी चाहता हूँ "
yesterday
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
" आदरनीय सालिक जी, अच्छी ग़ज़ल के बधाई हो "
yesterday
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"आदरनीय राज़ जी , बहुत ही सुंदर ग़ज़ल के लिए बधाई हो "
yesterday
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"जिंदगी जब तिरा मेरा न सफ़र बनता है lपाँव उठते कोई राहों से डगर बनता हैl क्यूँ मुसीबत मेरी अपनी ही कमाई लगती, कौन अब इस को भगाने का हुनर बनता है l बांध रखता है हमारी कैसे दुनिया ऐसे, आम से ख़ास बता कैसे ये बशर बनता है l जब उजालों से नहीं साफ़ नज़र…"
yesterday
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"   आदरणीय अशफाक जी, सुंदर ग़'ज़ल के लिए बधाई ."
Friday
Samar kabeer commented on मोहन बेगोवाल's blog post तरही ग़ज़ल
"जनाब मोहन बेगोवाल जी आदाब,ओबीओ के तरही मिसरे पर ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'जिस तरह का था उस वैसा समझ बैठे थे हम' इस मिसरे में 'उस' को "उसे" कर लें । 'ये जहाँ बदला मगर ये जिंदगी क्यूँ…"
Feb 25
मोहन बेगोवाल posted a blog post

तरही ग़ज़ल

 शख्स उसको भी तो दीवाना समझ बैठे थे हम l जो था अच्छा उस को बेचारा समझ बैठे थे हम l अब न जीतेगा ज़माना भी हमेशा की तरह, जिस तरह का था उसे वैसा समझ बैठे थे हम l गीत गाया था बहारों पर सुनाया था कहाँ, जब ख़िज़ाँ को भी अगर अपना समझ बैठे थे हम l फूल ये बिखरा तो खुशबू सा शजर बनता मिला, "इस ज़मीन ओ आसमां को क्या समझ बैठे थे हम l" ये जहाँ बदला मगर ये जिंदगानी क्यूँ नहीं, झूठ दुनिया जिस कहे सच्चा समझ बैठे थे हम lमौलिक व अप्रकाशित"See More
Feb 25
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"सर जी, बहुत शुक्रिया जी"
Feb 22
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"बहुत सुंदर ग़ज़ल की बधाई हो"
Feb 22
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"सुंदर ग़ज़ल की बधाई"
Feb 22
मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"शख्स जिस को देख दीवाना समझ बैठे थे हम l जब गली गुजरा तो पहचाना समझ बैठे थे हम l अब न जीतेगा ज़माना ये हमेशा की तरह, खुद बनाया है इसे जैसा समझ बैठे थे हम l गीत हम ने तो बहारों को सुनाया था मगर, ये सुना दुनिया तुझे अपना समझ बैठे थे हम l टूट कर बिखरा…"
Feb 22
डॉ छोटेलाल सिंह commented on मोहन बेगोवाल's blog post तरही ग़ज़ल
"आदरणीय मोहन जी इस सुंदर गजल के लिए बहुत बहुत बधाई"
Jan 1
मोहन बेगोवाल posted a blog post

तरही ग़ज़ल

जब अँधेरा ये मिटाने को सितारा निकला l चाँद पीछे न रहा बन के हमारा निकला उसने जब तक न सुनाई थी कहानी हमको कौन हमको ये बताता वो सहारा निकला हम तो निकले थे ज़माने को दिखाने उल्फ़त पर हकीक़त में वही प्यार तुम्हारा निकला सोच कर बात सुनाई है मगर फिर भी क्यूँ, राहरौ और ग़लत उनका इशारा निकला इस यकीं से ही उमीदों को जगाया हम ने “तुझ से ऐ दिल न मगर काम हमारा निकला” जिंदगी हमने उधारी न गुज़ारी होती फिर न कहते कि सफ़र यार नकारा निकलामौलिक व अप्रकाशित See More
Dec 29, 2019

Profile Information

Gender
Male
City State
Amritsar
Native Place
Begowal
Profession
Medical Teacher
About me
Gazalgo , Punjabi Writer

मोहन बेगोवाल's Blog

जिंदगी साथ में चल दे तो सफ़र बनता है l

जिंदगी साथ में चल दे तो सफ़र बनता है l

इस बहाने कोई अपना सा मगर बनता हैl

दे मुसीबत मुझे, मेरी ही बनाई कहते,

इस निभाने को ही कोई तो हुनर बनता है l

बांध देते हो यूँ मुझको मिरी दुनिया में क्यूँ ,

सोच उड़ती ये फ़लक ख़ास बशर बनता है l

जब उजालों में नहीं साफ़ नज़र आया तो,

दिल का चेहरा कहाँ ऐसे ही ख़बर बनता है l

फ़लसफा कब यहाँ मेरा ही सफ़र कर जाये,

"एक दिन में कहाँ अंदाज -ए -नज़र बनता है l "

मौलिक व…

Continue

Posted on March 29, 2020 at 7:00am

तरही ग़ज़ल

 शख्स उसको भी तो दीवाना समझ बैठे थे हम l

जो था अच्छा उस को बेचारा समझ बैठे थे हम l



अब न जीतेगा ज़माना भी हमेशा की तरह,

जिस तरह का था उसे वैसा समझ बैठे थे हम l



गीत गाया था बहारों पर सुनाया था कहाँ,

जब ख़िज़ाँ को भी अगर अपना समझ बैठे थे हम l



फूल ये बिखरा तो खुशबू सा शजर बनता मिला,

"इस ज़मीन ओ आसमां को क्या समझ बैठे थे हम l"



ये जहाँ बदला मगर ये जिंदगानी क्यूँ नहीं,

झूठ दुनिया जिस कहे सच्चा समझ बैठे थे हम…

Continue

Posted on February 25, 2020 at 12:00am — 1 Comment

तरही ग़ज़ल

जब अँधेरा ये मिटाने को सितारा निकला l

चाँद पीछे न रहा बन के हमारा निकला



उसने जब तक न सुनाई थी कहानी हमको

कौन हमको ये बताता वो सहारा निकला



हम तो निकले थे ज़माने को दिखाने उल्फ़त

पर हकीक़त में वही प्यार तुम्हारा निकला



सोच कर बात सुनाई है मगर फिर भी क्यूँ,

राहरौ और ग़लत उनका इशारा निकला



इस यकीं से ही उमीदों को जगाया हम ने

“तुझ से ऐ दिल न मगर काम हमारा निकला”



जिंदगी हमने उधारी न गुज़ारी…

Continue

Posted on December 29, 2019 at 8:30am — 1 Comment

सयाने लोग

" वो लोग भी कमाल के होते हैं, जो कमाल की बाते करते हैं ।",उनकी मीटिंग खत्म होने के बाद पास बैठे आदमी ने कहा

"पर इन लोगों ने कभी चुप शांत रहने वाले लोगों के बारे भी सोचा है, वो भी कुछ दायरे संभाल रखें हैं ।" , उसने ख़ुद से पूछा

चुप व शांत रहने वालों की भी उन्हें प्रवाह करनी चाहिए, जब वे लोग आपस में बातें कर रहे होते हैं ।

"पर उनके लिए ये जानना भी ज़रूरी है कि इनकी सोच के दायरे से बड़ा भी कोई किसी का दायरा हो सकता है ।"

वहाँ बैठे आदमी ने फिर पूछ ही लिया, " भाई साहिब, आप जो…

Continue

Posted on October 3, 2019 at 3:30pm — 2 Comments

Comment Wall (3 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 5:28pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय मोहन जी
बहुत बहुत शुक्रिया
At 9:08pm on March 1, 2014,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

जन्म दिन की हार्दिक बधाई, ईश्वर आपको प्रत्येक क्षेत्र में सफल करें ......

At 8:14pm on September 5, 2013, mrs manjari pandey said…

       

      आदरणीय मोहन बेगोवाल जी आपको शेर पसन्द आये . मै कृतार्थ हुई

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-60 (विषय: धरोहर)
"आदरणीया बबिता जी, बहुत अच्छे से बुनी लघुकथा के लिए बधाई हो l"
4 minutes ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-60 (विषय: धरोहर)
"सादर नमस्कार। आदरणीया अर्चना त्रिपाठी जी ने बहुत ही बड़ी और महत्वपूर्ण बात अपनी टिप्पणी में कह ही दी…"
3 hours ago
Archana Tripathi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-60 (विषय: धरोहर)
"अमानत ब्याह में आई बेटियों की बिदाई की रस्म में पिता का सहयोग कर रेवती मम्मी के पास पहुंची। बेटियों…"
3 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-60 (विषय: धरोहर)
"आदाब। साहित्यिक पत्रिका वेबसाइट जगत की धरोहर ओबीओ लघुकथा गोष्ठी के इस मासिक अंक 60 में आपकी…"
3 hours ago
Archana Tripathi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-60 (विषय: धरोहर)
"आ. रवि भसीन शाहिद जी ,आपकी कथा आज दिन ब दिन बढ़ते विवाद को सुलझाने की सीढ़ी हो सकती है।हार्दिक बधाई…"
3 hours ago
Archana Tripathi replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-60 (विषय: धरोहर)
"बढ़िया कथा आ. बबिता गुप्ता जी, वाकई में कर्जे की धरोहर अत्यंत पीड़ादायी होती हैं।हार्दिक बधाई आपको"
3 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-60 (विषय: धरोहर)
"धरोहर (लघुकथा) ताज महल की सैर कर रहे राहुल और प्रियंका ख़ूब मूड में थे। घूम-घूम कर थक गए तो एक जगह…"
5 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-60 (विषय: धरोहर)
"आदरणीया बबिता गुप्ता जी, बहुत ख़ूब! दिल को छू गई आप की लघुकथा।"
5 hours ago
babitagupta replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-60 (विषय: धरोहर)
"धरोहर 'विचारा लख्खाराम को मौत के मुंह में उसकी बीमारी से ज्यादा कर्ज के बोझ की चिंता ने ढकेल…"
6 hours ago

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-60 (विषय: धरोहर)
"ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी अंक-६० में आप सभी का हार्दिक स्वागत है."
7 hours ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' posted blog posts
8 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on अमीरुद्दीन खा़न "अमीर "'s blog post ग़ज़ल
"आदरणीय अमीरुद्दीन ख़ान 'अमीर' साहिब, मैं शुक्रगुज़ार हूँ कि आपने नाचीज़ की सलाह पर ग़ौर किया।…"
8 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service