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  • बृजेश कुमार 'ब्रज'

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Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-97
"जनाब चेतन प्रकाश जी नपशायरे में शिरकत केलिएआपकाआभार गुणी जनों की बातों पर गौ़र फ़रमाए,"
Jul 28
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-97
"पहाड़ों पर गौ़र कीजिए साहिब, सादर,"
Jul 28
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-97
"आली जनाब समर साहिब आदाब, //"गौ़र करने वाली बात है इस शे'र में जो आपने पेश किया है, स्त्रीलिंग शब्द से पहले एक पुल्लिंग शद हैनौसम इसके सहारे  स्त्रीलिंग शब्द चलेगा// अब देखिये वालीआसी साहिब का ये मक्ता, "मेरे नग़्मे मेरी खा़तिर…"
Jul 28
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-97
"आली जनाब समर साहिब,आदाब ग़ज़ल में शिरकत और सुख़न नवाज़ी पर आपका मश्कूर हूँ, लफ़्ज़ "फा़रूक़" टंकण त्रुटिवश "फ़ारूख़" हो गया है, आपने एक कुहना शे'र पेश किया है मफ़हूम के ताअल्लुक से, ख़ाकसार ये पूछना चाहता है कि क्किया सी…"
Jul 28
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-97
"जनाब निलेश नूर साहिब आदाब, एक सिक्के के दो पहलू होते हैं, आपने दूसरे पहलू पर तवज्जो नहीं की, एक जुम्ले पर गौ़र फ़रमाएँ , "आप करें तो नेकी हम करें तो गुनाह" इसका भाव देखिये, अर्थात ये अमल सरज़द हो चुका है तभी तो इसकी शिनाख़्त नेकी और गुनाह…"
Jul 28
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-97
"बहस  की  काफ़ी गुंजाईश है हाज़िर होता हूँ सादर"
Jul 28
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-97
"जनाब शिज्जू शकूर साहिब सुख़न नवाज़ी का शु्क्रिया"
Jul 28
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-97
"जनाब नादिर खान साहिब उम्दा ग़ज़ल के लिए मुबारकबाद आपको"
Jul 28
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-97
"जनाब निलेश नूर साहिब ग़ज़ल में शिरकत पर आपका मश्कूर हूँ,  शे'र " क़त्ल भी गर वो करें तो ज़िक्र तक होता नहीं"        " आह भी गर हम भरेंगे सुर्ख़ियाँ हो जाएँगे"  पर आपकी टिप्पणी जल्दबाज़ी में दी…"
Jul 28
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-97
"मुहतरमा अंजलि गुप्ता साहिबा सुख़न नवाज़ी का शुक्रिया"
Jul 28
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-97
"जनाब शिज्जू शकूर साहिब उम्दा ग़ज़ल के लिए मुबारकबाद आपको"
Jul 28
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-97
"जनाब मोहन बेगोवाल साहिब सुख़न नवाज़ी का शुक्रिया"
Jul 28
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-97
"जनाब अजय गुप्ता साहिब आप की मुहब्बतें का शुक्रिया"
Jul 28
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-97
"जनाब राज़ नवादवी साहिब ग़ज़ में शिरक़त और सुख़न नवाज़ी पर मश्कूर हूँ"
Jul 28
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-97
"जनाब किशोर कांत साहिब सुख़न नवाज़ी का शुक्रिया"
Jul 28
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-97
"मुहतरमा मंजीत कौर साहिबा उम्दा ग़ज़ल मुबारकबाद आपको, आख़री शे'र का ऊला मिसरा यूँ भी कह सकते हैं, "लोग मिलके फिर बिछुड़ते है रवाँ यूँ ज़िन्दगी""
Jul 28

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ujjain
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ujjain
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contractor
About me
contractor

Afroz 'sahr''s Blog

ग़ज़ल निकल गए आँसू,,,,

   2122  1212  22

दफ़अतन जो निकल गए आँसू।

सारे मंज़र बदल गए आँसू।।

लाख की कोशिशें छुपाने की।

राज़ दिल का उगल गए आँसू।।

इक ख़ुशी ने मुझे पुकारा है।

ये ख़बर सुन के जल गए आँसू।।

ख़ुश्क दामन तुझे बताऊँ क्या।

वो सबब जो सँभल गए आँसू।।

इत्तिफ़ाकन ही ख़ुश्क थीं पलकें।

इंतिकामन मचल गए आँसू।।

इक तबस्सुम जो आगया लब पर।

मारे ग़म के पिघल गए आँसू।।

कौन सा पल…

Continue

Posted on December 24, 2017 at 11:00am — 11 Comments

ग़ज़ल,,,,इशारों का साथ दो,,,,,,,

221/2121/1221/212



है इख़्तियार तुमको बहारों का साथ दो।

लेकिन कभी तो दर्द के मारों का साथ दो।।



गर हैं निजात के लिए दरकार नेकियाँ।

डोली उठाने वाले कहारों का साथ दो।।



बाहम वो मिल सके न जो सारी हयात में।

मजबूर बेक़रार कनारों का साथ दो।।



तुम इन उदासियों की रिदाओं को चीर कर।

दिलकश हसीन शौख़ नजारों का साथ दो।।



ये वक़्त का तकाजा़ है दानाइ भी यही।

रक्खो ज़ुबान बंद इशारों का साथ दो।।



मिट्टी के ढेर हैं ये फ़कत और… Continue

Posted on December 4, 2017 at 1:36pm — 20 Comments

ग़ज़ल,,,,भीगी पलकों पे कई ख़्वाब,,

2122/1122/1122/22/112



अश्क़ आँखों में यूँ बेताब हुआ करते हैं

भीगी पलकों पे कई ख़्वाब हुआ करते हैं।



जिनकी क़ीमत ही नहीं लोगों की नज़रों में कोई

रब की नज़रों में वो सुरख़ाब हुआ करते हैं।



जो भी रखते हैं बुज़ुर्गों की रिवायत का भरम

लोग दुनिया में वो नायाब हुआ करतें हैं।



ख़ुश्क फूलों की तरह मुझको समझने वालों

गुल में ख़ुश्बू के कई बाब हुआ करते हैं।



तुहमतें गैरों पे साज़िश की लगाने वाले

तेरे दुश्मन तेरे एहबाब हुआ करते… Continue

Posted on November 7, 2017 at 1:00pm — 20 Comments

ग़ज़ल,,,,में अपनी हसरतें,,,,,

1222/1222/1222/1222



जो सच हो ही नहीं सकता वो सपना छोड़ आया हूँ

में अपनी हसरतें सहरा में तंहा छोड़ आया हूँ।



ख़िरद ने जबसे जोड़ा है हक़ीकत से मेंरा रिश्ता

तख़य्युल को ख़लाओं में भटकता छोड़ आया हूँ।



ज़रूरत मुझको ले कर आ गई परदेस में लेकिन

में अपने घर में इक पुतला अना का छोड़ आया हूँ।



सबब जिसके हुए जाते थे अपने ही मेंरे दुश्मन

वो चाँदी छोड़ दी मैंने वो सोना छोड़ आया हूँ।



वो इक लम्हा जो गफ़लत में तेरी चाहत के बिन… Continue

Posted on October 17, 2017 at 7:30pm — 10 Comments

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At 5:25pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय अफरोज जी आदाब
बहुत शुक्रिया आपने मेरी रचना पढ़ी मुझे अभी बहुत सीखना है आशा है आप मेरी इसी तरह मदद करेंगे
At 2:29pm on September 12, 2017,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए....

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है.

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