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Afroz 'sahr'
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Afroz 'sahr' commented on प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप''s blog post दिल धड़कता था जिस अजनबी के लिए
"जनाब प्रदीप पाण्डेय जी अब मक्ता ठीक है,,सादर"
yesterday
Afroz 'sahr' commented on SALIM RAZA REWA's blog post चांद का टुकड़ा है या कोई परी या हूर है - सलीम रज़ा रीवा
"जनाब सलीम रज़ा साहिब इस ग़ज़ल के लिए आपको बहुत बधाई,,, छठे शेर का ऊला मिसरा बह्र में नहीं है देखिएगा सादर,,"
yesterday
Afroz 'sahr' commented on प्रदीप कुमार पाण्डेय 'दीप''s blog post दिल धड़कता था जिस अजनबी के लिए
"आदरणीय प्रदीप कुमार जी इस रचना पर बहुत बधाई आपको। मक्ते में रब्त नहीं दिख रहा ,,,सादर"
yesterday
Afroz 'sahr' commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (नाज़ कब वो भी उठा पाते हैं दीवाने का )
"जनाब तस्दीक़ साहिब इस ग़ज़ल पर बहुत मुबारकबाद आपको। दुसरे शेर में एब ए तक़ाबुल ए रदीफ़ है देखिएगा,,,,"
yesterday
Afroz 'sahr' commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल - हम रह सकें ऐसा जहाँ तलाश रहा हूँ ( गिरिराज भंडारी )
"में इस विषय पर आदरणीय गिरीराज जी की बातों से सहमत हूँ। पटल पर चर्चा तब तक जारी रहना चाहिये जब तक संतुष्टी ना हो जाए । सीखना सिखाना लाभप्रद होता है सादर,,"
Wednesday
Afroz 'sahr' commented on SALIM RAZA REWA's blog post सबसे छोटा क़ाफ़िया और सबसे बड़ी रदीफ़ पर एक और ग़ज़ल, इस ब्लाग सभी के सदस्यों कि दुआएँ चाहता हूँ - सलीम रज़ा रीवा
"आदरणीय सलीम रज़ा साहिब इस रचना पर बघाई आपको कहीं कहीं मिसरों में शिल्प कमज़ोर है । ग़ज़ल के चौथे शेर का सानी मिसरा ज़ू मानी हो रहा है तथा " रब "के साथ बहूवचन "तुम्हारी", "आपकी", आदि शब्दों का प्रयोग कथ्य के लिहाज़ से…"
Wednesday
Afroz 'sahr' commented on SALIM RAZA REWA's blog post मुझसे रूठा है कोई उसको मनाना होगा - सलीम रज़ा रीवा
"बहुत ख़ूबसुरत ग़ज़ल के लिए आपको बहुत बधाई जनाब सलीम रज़ा साहिब,,, मक्ते का सानी मिसरा यूँ भी किया जा सकता है। "दुश्मनों को भी रज़ा दोस्त बनाना होगा",,,,,,,सादर,"
Tuesday
Afroz 'sahr' commented on rajesh kumari's blog post इश्क इससे क्यूँ दुबारा हो गया (ग़ज़ल 'राज')
"आदरणीया राजेश कुमारी जी बहुत ख़ूबसूरत ग़ज़ल के लिए को आप हार्दिक शुभकामनाएँ,,,,"
Monday
Afroz 'sahr' commented on Alok Rawat's blog post ग़ज़ल: दिल ए नादान से हरगिज़ न संभाली जाए
"आदरणीय आलोक रावत इस रचना पर शेर दर शेर दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ । आदरणीय समर साहिब के मशविरों पर गौ़र करें। आपने नियमानुसार अर्कान नहीं लिखें हैं,,,,,,"
Monday
Afroz 'sahr' commented on Samar kabeer's blog post 'आपके पास है जवाब कोई'
"वाह वाह क्या कहने बहुत ख़ूब आली जनाब समर साहिब बहुत ही ख़ूबसूरत ग़ज़ल शेर दर शेर दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ।"
Nov 12
Afroz 'sahr' replied to मिथिलेश वामनकर's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-85 में प्रस्तुत समस्त रचनाएँ
"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव अंक 85, में क़लम आज़माई करने वाले तमाम क़लमकारों को मेंरी और से हार्दिक हार्दिक बधाई,,,,"
Nov 12
Afroz 'sahr' commented on SALIM RAZA REWA's blog post किसी भी ज़ुल्म कि वो इब्तदा से डरते हैं - सलीम रज़ा रीवा ( ग़ज़ल )
"जनाब सलीम रज़ा साहिब बहुत मुबारकबाद पेश करता हूँ। ख़ूबसूरत ग़ज़ल के लिए। मतले में "ईता" दोष है देखिएगा,,सादर,,,,,"
Nov 12
Afroz 'sahr' posted a blog post

ग़ज़ल,,,,भीगी पलकों पे कई ख़्वाब,,

2122/1122/1122/22/112अश्क़ आँखों में यूँ बेताब हुआ करते हैंभीगी पलकों पे कई ख़्वाब हुआ करते हैं।जिनकी क़ीमत ही नहीं लोगों की नज़रों में कोईरब की नज़रों में वो सुरख़ाब हुआ करते हैं।जो भी रखते हैं बुज़ुर्गों की रिवायत का भरमलोग दुनिया में वो नायाब हुआ करतें हैं।ख़ुश्क फूलों की तरह मुझको समझने वालोंगुल में ख़ुश्बू के कई बाब हुआ करते हैं।तुहमतें गैरों पे साज़िश की लगाने वालेतेरे दुश्मन तेरे एहबाब हुआ करते हैं।तुझसे मिलने को हूँ बेताब ये है सच लेकिनआमद ओ रफ़्त के असबाब हूआ करते हैं।जो भी ठुकराते हैं…See More
Nov 11
Afroz 'sahr' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post आप से क्या मुहब्बत हुई
"जनाब नवीन मणि त्रिपाठी साहिब अच्छी ग़ज़ल कही आपने इस रचना पर बहुत बधाई आपको,,,,"
Nov 10
Afroz 'sahr' commented on Afroz 'sahr''s blog post ग़ज़ल,,,,भीगी पलकों पे कई ख़्वाब,,
"जनाब तस्दीक़ साहिब ग़ज़ल में शिरकत और सुख़न नवाज़ी का शुक्रिया,,,,,"
Nov 9
Tasdiq Ahmed Khan commented on Afroz 'sahr''s blog post ग़ज़ल,,,,भीगी पलकों पे कई ख़्वाब,,
"जनाब अफ़रोज़ साहिब ,अच्छी ग़ज़ल हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं।"
Nov 9

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ग़ज़ल,,,,भीगी पलकों पे कई ख़्वाब,,

2122/1122/1122/22/112



अश्क़ आँखों में यूँ बेताब हुआ करते हैं

भीगी पलकों पे कई ख़्वाब हुआ करते हैं।



जिनकी क़ीमत ही नहीं लोगों की नज़रों में कोई

रब की नज़रों में वो सुरख़ाब हुआ करते हैं।



जो भी रखते हैं बुज़ुर्गों की रिवायत का भरम

लोग दुनिया में वो नायाब हुआ करतें हैं।



ख़ुश्क फूलों की तरह मुझको समझने वालों

गुल में ख़ुश्बू के कई बाब हुआ करते हैं।



तुहमतें गैरों पे साज़िश की लगाने वाले

तेरे दुश्मन तेरे एहबाब हुआ करते… Continue

Posted on November 7, 2017 at 1:00pm — 20 Comments

ग़ज़ल,,,,में अपनी हसरतें,,,,,

1222/1222/1222/1222



जो सच हो ही नहीं सकता वो सपना छोड़ आया हूँ

में अपनी हसरतें सहरा में तंहा छोड़ आया हूँ।



ख़िरद ने जबसे जोड़ा है हक़ीकत से मेंरा रिश्ता

तख़य्युल को ख़लाओं में भटकता छोड़ आया हूँ।



ज़रूरत मुझको ले कर आ गई परदेस में लेकिन

में अपने घर में इक पुतला अना का छोड़ आया हूँ।



सबब जिसके हुए जाते थे अपने ही मेंरे दुश्मन

वो चाँदी छोड़ दी मैंने वो सोना छोड़ आया हूँ।



वो इक लम्हा जो गफ़लत में तेरी चाहत के बिन… Continue

Posted on October 17, 2017 at 7:30pm — 10 Comments

ग़ज़ल: फूंकने को इसे बिजलियाँ आगईं

212/212/212/212



याद तुमने किया हिचकियाँ आगईं

दिल की तस्कीन को सिसकियाँ आगईं।



ज़ेर ए तामीर था ये नशेमन मेंरा

फू़ंकने को इसे बिजलियाँ आगईं।



तू नहीं आसका हाल तेरा मगर

लेके अख़बार की सुर्ख़ियाँ आगईं।



जब तड़प कर गुलों ने पुकारा उन्हें

लब हसीं चूमने तितलियाँ आ गईं।



गर्म साँसों की औढ़ा दो मुझको रिदा

लौट कर फिर वो ही सर्दियाँ आ गईं।



चाह दिल में तेरे वस्ल की जब जगी

लम्स तेरा लिये चिट्ठियाँ आ गईं।…

Continue

Posted on October 11, 2017 at 5:30pm — 6 Comments

ग़ज़ल ,,,,चराग़ ए सुख़न हूँ,,,,,,,

अर्कान,,,122/122/122/122



मुहब्बत में होना फ़ना चाहता हूँ

अजब में दिवाना हूँ क्या चाहता हूँ।



चराग़ ए सुख़न हूँ जला चाहता हूँ

ग़ज़ल में नया फ़लसफ़ा चाहता हूँ।



रहा कब हूँ झूटी अना का में काइल

ख़ुदाया तिरी बस रज़ा चाहता हूँ।



सुख़नवर बहुत हैं अनोखे जहाँ में

में अंदाज़ अपना जुदा चाहता हूँ।



जुनूँ ने ख़िरद से ये क्या कह दिया है

तिरी हिकमतों का पता चाहता हूँ।



जहाँ भी रहे बस महकता रहे तू

फ़कत ये ख़ुदा से दुआ… Continue

Posted on September 17, 2017 at 1:00pm — 20 Comments

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At 2:29pm on September 12, 2017,
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मिथिलेश वामनकर
said…

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