For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ASHFAQ ALI (Gulshan khairabadi)
  • Male
  • sitapur u.p.
  • India
Share

ASHFAQ ALI (Gulshan khairabadi)'s Friends

  • Kedia Chhirag
  • वेदिका
  • anwar suhail
  • Albela Khatri
  • डॉ. सूर्या बाली "सूरज"
  • MOHD. RIZWAN (रिज़वान खैराबादी)
  • SHARIF AHMED QADRI "HASRAT"
  • CA (Dr.)SHAILENDRA SINGH 'MRIDU'
  • Saurabh Pandey
  • आशीष यादव
 

ASHFAQ ALI (Gulshan khairabadi)'s Page

Latest Activity

ASHFAQ ALI (Gulshan khairabadi) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119
"वाह वाह क्या बात है बेहतरीन ग़ज़ल कहीं है आप ने बहुत बहुत बधाई।"
May 23
ASHFAQ ALI (Gulshan khairabadi) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119
"शुक्रिया"
May 22
ASHFAQ ALI (Gulshan khairabadi) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119
"आपका बहुत बहुत शुक्रिया"
May 22
ASHFAQ ALI (Gulshan khairabadi) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119
"शुक्रिया जनाब"
May 22
ASHFAQ ALI (Gulshan khairabadi) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119
"वाह वाह क्या बात है बेहतरीन ग़ज़ल बहुत खूब सूरत ग़ज़ल बहुत बहुत बधाई"
May 22
ASHFAQ ALI (Gulshan khairabadi) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119
"वाह वाह क्या बात है बेहतरीन ग़ज़ल बहुत बहुत बधाई"
May 22
ASHFAQ ALI (Gulshan khairabadi) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119
"वाह वाह वाह क्या बात है बेहतरीन ग़ज़ल बहुत बहुत बधाई"
May 22
ASHFAQ ALI (Gulshan khairabadi) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119
"वाह वाह बहुत खूब सूरत ग़ज़ल कही है आपने ने बहुत बहुत बधाई"
May 22
ASHFAQ ALI (Gulshan khairabadi) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119
"वाह वाह वाह क्या बात है बहुत खूब सूरत ग़ज़ल कही है बहुत बहुत बधाई आपको दिली मुबारकबाद "
May 22
ASHFAQ ALI (Gulshan khairabadi) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-119
"वाह वाह वाह क्या बात है बेहतरीन ग़ज़ल हुई है भाई बहुत बहुत बधाई जनाब"
May 22
ASHFAQ ALI (Gulshan khairabadi) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-118
"आप ने बहुत खूब सूरत ग़ज़ल कही है आप को बहुत बहुत बधाई"
Apr 25
ASHFAQ ALI (Gulshan khairabadi) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"ग़ज़ल कहने के लिए बहुत बहुत बधाई"
Mar 28
ASHFAQ ALI (Gulshan khairabadi) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"आपका बहुत बहुत शुक्रिया"
Mar 28
ASHFAQ ALI (Gulshan khairabadi) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"वाह वाह वाह क्या बात है बेहतरीन ग़ज़ल बहुत खूब जनाब शेर दर शेर बेहतरीन बधाई हो।"
Mar 28
ASHFAQ ALI (Gulshan khairabadi) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"रचना जी आपको बहुत बहुत बधाई ग़ज़ल बहुत खूब सूरत है मतला लिखने में कुछ लफ्ज़ छूटे हैं गौर कर लें मेहरबानी होगी "
Mar 28
ASHFAQ ALI (Gulshan khairabadi) replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"मोहन जी आप का बहुत बहुत शुक्रिया"
Mar 28

Profile Information

Gender
Male
City State
SITAPUR
Native Place
KHAIRABAD
Profession
BUSINESS

ASHFAQ ALI (Gulshan khairabadi)'s Blog

कू-ब-कू शौक़ लिए फिरता है मुझको गुलशन

पत्थरों का रुख़-ए-हस्ती पे गुमाँ होता है l

जब कोई शोला-ए-एहसास धुआँ होता है ll



जिसको इस राह में अहसास जियाँ होता है l

जज्ब-ए-इशक़ वो मकबूल कहाँ होता है ll



आंसुओ में कभी चेहरे की उदासी में कभी l

दर्द जब हद से गुज़रता है अयाँ होता है ll



खून-ए-मजलूम जो होता है ज़मी पर कोई l

मुझ से हस्सास की आँखों से रवाँ होता है…
Continue

Posted on November 12, 2012 at 6:49pm — 1 Comment

दुश्मनी से डर कैसा दोस्ती से डरते हैं

दुश्मनी से डर कैसा दोस्ती से डरते हैं..

खाये हैं फ़रेब इतने हर ख़ुशी से डरते हैं..



जब से आशियाँ अपना जल गया गुलिस्ताँ में..

हो कहीं उजाला हम रौशनी से डरते हैं..



हम तो धूप के राही साथ-साथ सूरज है..

जिस्म जिनके नाज़ुक हैं चाँदनी से डरते हैं..



कुछ न कुछ तो होगा ही इसलिए जहां वाले..

आदमी की सूरत में आदमी से डरते…

Continue

Posted on June 11, 2012 at 9:30pm — 9 Comments

दूसरों का सहारा, सहारा नही

जिंदगी का सफ़र किसको प्यारा नहीं

मौत आये किसी को गवारा नहीं



कर भलाई जो काम आएगी हर तरह

जिंदगी फिर मिलेगी दोबारा नहीं



किस तरह फिर भला मेहरबान हो कोई

तुमने दिल से उसे जब पुकारा नहीं



सूनी-सूनी हैं कश्मीर की वादियाँ

झील में अब कोई भी शिकारा नहीं



जो पहाड़ों से उतरी है गंगोजमन

लौट जाए कोई ऐसी धारा नही



खुद ही अपना सहारा बनो तो बनो

दूसरों का सहारा, सहारा नही



कैसी उलझन है…

Continue

Posted on May 21, 2012 at 11:30pm — 8 Comments

दौरे जाम

जब कभी दौरे जाम होता है
सब यहाँ इंतजाम होता है

सच ही कहता हूँ मेरे साकी के
दोनों हाथों में जाम होता है

और मै उस जगह नही पीता
जिस जगह एहतराम होता है

उसके बच्चों का बस ख़ुदा जाने
किस तरह इंतजाम होता है

डूब कर जब ग़ज़ल कहे शायर
उसका पुख्ता कलाम होता है

शायरी दिल को छू गई जिसकी
उसका महफ़िल में नाम होता है

किस से शिकवा करूँ मैं फिर "गुलशन"
हर तरह मेरा काम होता है

Posted on May 18, 2012 at 10:00pm — 9 Comments

Comment Wall (5 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 10:22pm on June 5, 2012,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

मोहतरम अशफ़ाक़ साहब, आपकी ग़ज़ल ’गुलशन बात हमारी रखना’ को विगत माह ओबिओ के मंच पर की सर्वश्रेष्ठ रचना चयनित हुई है. मेरी ओर से दिली मुबारक़बाद कुबूल करें.आपकी मौज़ूदग़ी लिखने वालों के लिये उत्प्रेरण का काम करेगी, यह विश्वास है.

सादर

At 6:54pm on June 5, 2012,
सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari
said…

अशफाक अली जी आपकी रचना को महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना चुनने पर आपको हार्दिक बधाई

At 4:22pm on June 5, 2012, Abhinav Arun said…

आपकी कृति को महीने की श्रेष्ठ रचना चुने जाने पर हार्दिक बधाई जनाब अशफाक अली साहब !!

At 2:59pm on June 5, 2012, डॉ. सूर्या बाली "सूरज" said…

गुलशन भाई बहुत बहुत बधाई हो महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना मंच को देने के लिए !!

At 1:33pm on June 5, 2012,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय गुलशन खैराबादी जी ,

सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आप की ग़ज़ल "गुलशन बात हमारी रखना" को महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना (Best Creation of the Month) पुरस्कार के रूप मे सम्मानित किया गया है, तथा आप की छाया चित्र को ओ बी ओ मुख्य पृष्ठ पर स्थान दिया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको पुरस्कार राशि रु ५५१ और प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस नामित कृपया आप अपना नाम (चेक / ड्राफ्ट निर्गत हेतु) तथा पत्राचार का पता व् फ़ोन नंबर

admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे |
शुभकामनाओं सहित


आपका
गणेश जी "बागी"

संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Rupam kumar -'मीत' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post उसको भाया भीड़ का होकर खो जाना -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. लक्ष्मण जी,ग़ज़ल के प्रयास के लिए बधाई, बह्र-ए-मीर पर ख़ूब शे'र कहे आपने वाह!!"
3 hours ago
Rupam kumar -'मीत' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post जब-जब ख़्वाब सुनहरे देखे - ग़ज़ल
"आदरणीय बसंत कुमार शर्मा जी आदाब, बहतरीन ग़ज़ल हुई है दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ, सादर।"
3 hours ago
Rupam kumar -'मीत' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (न यूँ दर-दर भटकते हम...)
"आ, अमीरुद्दीन साहिब जी, आदाब अच्छी ग़ज़ल हुई वाह!! चौथा शे'र ख़ूब पसंद आया,  "न जाने…"
3 hours ago
Rupam kumar -'मीत' commented on सालिक गणवीर's blog post नहीं दो चार लगता है बहुत सारे बनाएगा.( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आ, सालिक सर्, प्रणाम बहुत ख़ूब ग़ज़ल हुई है, और दूसरा शे'र क्या ही कहने वाह!! फ़लक पर वो नये…"
3 hours ago
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- जिन की ख़ातिर हम हुए मिस्मार; पागल हो गये
"धन्यवाद आ. मीत जी, मिस्मार का अर्थ है तहस नहस, छिन्न भिन्न सादर"
3 hours ago
Rupam kumar -'मीत' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (ज़िन्दगी भर हादसे दर हादसे होते रहे...)
"आ, अमीरुदीन साहिब जी, आदाब बहुत ख़ूब ग़ज़ल कही आपने वाह वाह!! मुक़म्मल ग़ज़ल पंसद आई साहिब वाह!! बहुत…"
3 hours ago
Rupam kumar -'मीत' commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- जिन की ख़ातिर हम हुए मिस्मार; पागल हो गये
"आ, निलेश साहिब जी, प्रणाम शे'र दर शे'र दाद पेश कर रहा हूँ। बधाई स्वीकार कीजिए, अच्छी ग़ज़ल…"
3 hours ago
Rupam kumar -'मीत' posted a blog post

ज़हर पी के मैं तेरे हाथ से मर जाऊँगा (रूपम कुमार 'मीत')

बह्र- 2122 1122 1122 22(112)ज़हर पी के मैं तेरे हाथ से मर जाऊँगा और हँसते हुए दुनिया से गुज़र जाऊँगा…See More
14 hours ago
Shakuntala Tarar replied to Saurabh Pandey's discussion ओबीओ परिवार के युवा साहित्यकार अरुन अनन्त की दैहिक विदाई
"ओह दुखद इश्वर ने इतनी कम आयु क्यूँ दी थी | परिवारजनों को कष्ट देने के लिए | सदर श्रद्धांजलि |"
15 hours ago
Rupam kumar -'मीत' commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post ज़हर पी के मैं तेरे हाथ से मर जाऊँगा (रूपम कुमार 'मीत')
"आ, साहिब ठीक मैं यही कर देता हूँ, आपका बहुत शुक्रिया।"
17 hours ago
Samar kabeer commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post ज़हर पी के मैं तेरे हाथ से मर जाऊँगा (रूपम कुमार 'मीत')
"'जो सिला मुझको मिला है तुझे सच बोलने से' अभी बात वहीं की वहीं है, इसे यूँ कर सकते…"
17 hours ago
Rupam kumar -'मीत' commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post ज़हर पी के मैं तेरे हाथ से मर जाऊँगा (रूपम कुमार 'मीत')
"आ, मोहतरम समर कबीर साहिब, प्रणाम, आपका बहुत शुक्रिया, मेरा इन्तिज़ार ख़त्म हुआ, दिल से शुक्रिया…"
17 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service