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"ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-103 (विषय: उपहार)

आदरणीय साथियो,

सादर नमन।
.
"ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-103 में आप सभी का हार्दिक स्वागत है। इस बार का विषय 'उपहार', तो आइए इस विषय के किसी भी पहलू को कलमबंद करके एक प्रभावोत्पादक लघुकथा रचकर इस गोष्ठी को सफल बनाएँ।  
"ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-103
"विषय: 'उपहार
अवधि : 30-10-2023 से 31-10-2023 
.
अति आवश्यक सूचना:-
1. सदस्यगण आयोजन अवधि के दौरान अपनी केवल एक लघुकथा पोस्ट कर सकते हैं।
2. रचनाकारों से निवेदन है कि अपनी रचना/ टिप्पणियाँ केवल देवनागरी फॉण्ट में टाइप कर, लेफ्ट एलाइन, काले रंग एवं नॉन बोल्ड/नॉन इटेलिक टेक्स्ट में ही पोस्ट करें।
3. टिप्पणियाँ केवल "रनिंग टेक्स्ट" में ही लिखें, १०-१५ शब्द की टिप्पणी को ३-४ पंक्तियों में विभक्त न करें। ऐसा करने से आयोजन के पन्नों की संख्या अनावश्यक रूप में बढ़ जाती है तथा "पेज जम्पिंग" की समस्या आ जाती है। 
4. एक-दो शब्द की चलताऊ टिप्पणी देने से गुरेज़ करें। ऐसी हल्की टिप्पणी मंच और रचनाकार का अपमान मानी जाती है।आयोजनों के वातावरण को टिप्पणियों के माध्यम से समरस बनाये रखना उचित है, किन्तु बातचीत में असंयमित तथ्य न आ पाए इसके प्रति टिप्पणीकारों से सकारात्मकता तथा संवेदनशीलता अपेक्षित है। देखा गया कि कई साथी अपनी रचना पोस्ट करने के बाद गायब हो जाते हैं, या केवल अपनी रचना के आस पास ही मंडराते रहते हैंI कुछेक साथी दूसरों की रचना पर टिप्पणी करना तो दूर वे अपनी रचना पर आई टिप्पणियों तक की पावती देने तक से गुरेज़ करते हैंI ऐसा रवैया कतई ठीक नहींI यह रचनाकार के साथ-साथ टिप्पणीकर्ता का भी अपमान हैI
5. नियमों के विरुद्ध, विषय से भटकी हुई तथा अस्तरीय प्रस्तुति तथा गलत थ्रेड में पोस्ट हुई रचना/टिप्पणी को बिना कोई कारण बताये हटाया जा सकता है। यह अधिकार प्रबंधन-समिति के सदस्यों के पास सुरक्षित रहेगा, जिस पर कोई बहस नहीं की जाएगी.
6. रचना पोस्ट करते समय कोई भूमिका, अपना नाम, पता, फोन नंबर, दिनांक अथवा किसी भी प्रकार के सिम्बल/स्माइली आदि लिखने/लगाने की आवश्यकता नहीं है।
7. प्रविष्टि के अंत में मंच के नियमानुसार "मौलिक व अप्रकाशित" अवश्य लिखें।
8. आयोजन से दौरान रचना में संशोधन हेतु कोई अनुरोध स्वीकार्य न होगा। रचनाओं का संकलन आने के बाद ही संशोधन हेतु अनुरोध करें। 
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यदि आप किसी कारणवश अभी तक ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार से नहीं जुड़ सकें है तो www.openbooksonline.com पर जाकर प्रथम बार sign up कर लें.
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.
मंच संचालक
योगराज प्रभाकर
(प्रधान संपादक)

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सादर नमस्कार। ऐसे संयोग ईश्वरीय विधि-विधान.से होते हैं, सबको चौंकाते हैं।  ऐसे उपहार से बेहतर कोई उपहार भी नहीं हो सकता। हार्दिक बधाई जनाब तेजवीर सिंह साहिब।  चिरपरिचित कथानक और कथ्य। लेकिन प्रवाहमय बढ़िया रचना। लघुकहानी की श्रेणी में न आ सके, इस हेतु इसमें कसावट करते हुए बेहतरीन पंचपंक्ति से विचारोत्तेजक समापन दिया जा सकता है।

हार्दिक आभार आदरणीय शेख़ शहज़ाद जी।

ख. भाई तेजवीर जी अभिवादन। अच्छी कथा हुई है। हार्दिक बधाई।

विजेता (उपहार शीर्षक के अंतर्गत)
तब वह अबोध था। किशोर हुआ। प्रौढ़ हुआ। इल्म हासिल कर ज्ञानी, फिर विज्ञानी हो गया। उसने  नाना प्रकार के अविष्कार, ईजाद किये। फिर अविष्कार विस्तृत होते होते विस्तार की ओर बढ़ चला। विस्तारवादी प्रवृत्ति अब वृत्ति बन गई। गोले बारूद  चलते, फूटते। आदमी  करहता, चीखता, पर आदमी गोले बरसाता। मुस्कुराता। खिलखिलाता। विजय का तूर्य फहराता फिरता। डींगे हाँकता, क्योंकि अब वह आदमी है।
"मौलिक व अप्रकाशित"

हार्दिक बधाई आदरणीय मनन कुमार सिंह जी। बेहतरीन प्रस्तुति।

आपका  आभार आ. तेजवीर सिंह जी। 

आदाब। बढ़िया परिकल्पना और शैली से बढ़िया लघु.वाक्य युक्त लघु आकार लघुकथा बुनावट। हार्दिक बधाई जनाब मनन कुमार सिंह जी। 'क्योंकि तब वह अबोध था और.क्योंकि अब वह आदमी है!' ... क्योंकि एक आदमी कराहने चीखने की स्थिति में आ जाता है और एक आदमी गोले बरसाने की स्थिति में आकर मुस्काने से लेकर डींगें हाँकने की स्थिति को पाता है....इसलिए ऐसी विचारोत्तेजक सृजन करती है लेखनी। आदमी ख़ुद को क्यों ऐसा विजेता मान बैठता है? गहरी बात है... जितना गंभीर कथानक और कथ्य है...उतना समय अभी रचना को नहीं दिया गया... ऐसा भी लगता है। टंकणत्रुटियाँ भी रह गई हैं। सादर।

तब वह अबोध था.....। आपका हार्दिक आभार आ. उस्मानी जी। नमस्ते। 

आ. भाई मनन जी, अभिवादन। अच्छी कथा हुई है। हार्दिक बधाई।

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