For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

 आदरणीय काव्य-रसिको !

सादर अभिवादन !!

  

’चित्र से काव्य तक छन्दोत्सव का यह एक सौ पचहत्तरवाँ योजन है।

 .   

 

छंद का नाम  -  सरसी छंद  

आयोजन हेतु निर्धारित तिथियाँ - 

24 जनवरी’ 26 दिन शनिवार से

25 जनवरी 26 दिन रविवार तक

केवल मौलिक एवं अप्रकाशित रचनाएँ ही स्वीकार की जाएँगीं.  

सरसी छंद के मूलभूत नियमों के लिए यहाँ क्लिक करें

जैसा कि विदित है, कई-एक छंद के विधानों की मूलभूत जानकारियाँ इसी पटल के  भारतीय छन्द विधान समूह में मिल सकती हैं.

***************************

आयोजन सम्बन्धी नोट 


फिलहाल Reply Box बंद रहेगा जो आयोजन हेतु निर्धारित तिथियाँ -

24 जनवरी’ 26 दिन शनिवार से 25 जनवरी 26 दिन रविवार तक रचनाएँ तथा टिप्पणियाँ प्रस्तुत की जा सकती हैं। 

अति आवश्यक सूचना :

  1. रचना केवल स्वयं के प्रोफाइल से ही पोस्ट करें, अन्य सदस्य की रचना किसी और सदस्य द्वारा पोस्ट नहीं की जाएगी.
  2. नियमों के विरुद्ध, विषय से भटकी हुई तथा अस्तरीय प्रस्तुति को बिना कोई कारण बताये तथा बिना कोई पूर्व सूचना दिए हटाया जा सकता है. यह अधिकार प्रबंधन-समिति के सदस्यों के पास सुरक्षित रहेगा, जिस पर कोई बहस नहीं की जाएगी.
  3. सदस्यगण संशोधन हेतु अनुरोध  करें.
  4. अपने पोस्ट या अपनी टिप्पणी को सदस्य स्वयं ही किसी हालत में डिलिट न करें. 
  5. आयोजनों के वातावरण को टिप्पणियों के माध्यम से समरस बनाये रखना उचित है. लेकिन बातचीत में असंयमित तथ्य न आ पायें इसके प्रति संवेदनशीलता आपेक्षित है.
  6. इस तथ्य पर ध्यान रहे कि स्माइली आदि का असंयमित अथवा अव्यावहारिक प्रयोग तथा बिना अर्थ के पोस्ट आयोजन के स्तर को हल्का करते हैं.
  7. रचनाओं पर टिप्पणियाँ यथासंभव देवनागरी फाण्ट में ही करें. 
  8. अनावश्यक रूप से रोमन फाण्ट का उपयोग  करें. रोमन फ़ॉण्ट में टिप्पणियाँ करना एक ऐसा रास्ता है जो अन्य कोई उपाय न रहने पर ही अपनाया जाय.
  9. रचनाओं को लेफ़्ट अलाइंड रखते हुए नॉन-बोल्ड टेक्स्ट में ही पोस्ट करें. अन्यथा आगे संकलन के क्रम में संग्रहकर्ता को बहुत ही दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.

छंदोत्सव के सम्बन्ध मे किसी तरह की जानकारी हेतु नीचे दिये लिंक पर पूछताछ की जा सकती है ...


"ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" के सम्बन्ध मे पूछताछ

"ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" के पिछ्ले अंकों को यहाँ पढ़ें ...

विशेष यदि आप अभी तक  www.openbooksonline.com  परिवार से नहीं जुड़ सके है तो यहाँ क्लिक कर प्रथम बार sign up कर लें.

 

मंच संचालक
सौरभ पाण्डेय
(सदस्य प्रबंधन समूह)
ओपन बुक्स ऑनलाइन डॉट कॉम 

Views: 507

Replies are closed for this discussion.

Replies to This Discussion

सरसी छंद

+++++++++

उषा काल आरम्भ हुआ तब, अर्ध्य दिये नर नार।

दूर हुआ अँधियारा रवि का, फैले तेज अपार॥

स्नान ध्यान संक्रांति पर्व में, मन में सौम्य विचार।

हिन्दू के त्योहार सभी हैं, जीवन के आधार॥

 

आँगन सजते रंगोली से, फूलों से घर बार।

मिल जुलकर पकवान बनाते, लगते वंदनवार॥

अंबर में उड़ते दिखते हैं, रंग बिरंग पतंग।

जोश हर्ष है जन मानस में. छत पर होती जंग॥

 

चिवड़ा दही गजक तिल लड्डू, माघ पर्व का सार।

खाते और खिलाते मिलकर, यही प्यार व्यवहार॥

संत महात्मा सब देते हैं, वेद धर्म का ज्ञान।

दान दक्षिणा सेवा में है, मानव का कल्याण॥

++++++++++++

मौलिक अप्रकाशित

 

जय हो 

पुन: आता हूँ 

 

आदरणीय अखिलेशकृष्ण भाईजी, आपकी प्रस्तुति को कल ही देख लिया था. किन्तु, अन्य कई कार्यों में अत्यावश्यक व्यस्तता ने मुझे आपको तत्क्षण बधाई देने से रोक दिया था. 

 

आपकी व्यवस्थित रचना ने प्रदत्त चित्र के अनुसार मकर-संक्रान्ति पर्व की बढिया चर्चा की है. आपकी प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई.

शुभ-शुभ

आदरणीय  सौरभ भाईजी

उत्साहवर्धक टिप्पणी  के लिए हार्दिक धन्यवाद आभार आपका। 

गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई।

आ. भाई अखिलेश जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त चित्रानुरूप सुंदर छंद हुए हैं। हार्दिक बधाई।

आदरणीय लक्ष्मण भाईजी

छंद को समय देने और उसकी मुक्त प्रशंसा के लिए हार्दिक धन्यवाद आभार आपका। 

गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई।

आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब सादर, प्रदत्त चित्रानुसार बहुत उत्तम सरसी छंद रचे हैं आपने. मकर संक्रांति तयुहार मनाने की रीति-नीति का सुन्दर विवरण आपने इन छोंदों के माध्यम से प्रस्तुत किया, उत्तम और सराहनीय है. सादर 

आदरणीय अशोक भाईजी

आपकी टिप्पणी से लगता है कि इस बार  छंद  विधान और गेयता दोनों  दृष्टि से  मेरा प्रयास सफल हुआ है। यह मेरे लिए सचमुच  खुशी की बात है। गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई।

छंद को समय देने और उसकी मुक्त प्रशंसा के लिए हार्दिक धन्यवाद आभार आपका। 

चिवड़ा दही गजक तिल लड्डू, माघ पर्व का सार।

खाते और खिलाते मिलकर, यही प्यार व्यवहार॥//  बहुत सुन्दर..पर्व के पकवानों के स्वाद से भरी पंक्तियाँ ...बहुत सुन्दर सरसी छंद सृजन..हार्दिक बधाई आदरणीय अखिलेश जी

आदरणीया  प्रतिभाजी,

छंद को समय देने और उसकी मुक्त प्रशंसा के लिए हार्दिक धन्यवाद आभार आपका। 

गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई।

 

सरसी छंद  : मकर संक्रांति 

अनूठे     संस्कार     हमारे, जुड़े   हुए   त्यौहार  ।

मौसम बदला नहीं जरा सा, बदल गया आहार ।।

सूर्य    उत्तरायण   होते   ही, संक्रांति   पर्व  यार ।

बनते व्यजंन हर घर तिल से, खाते हम परिवार ।।

अर्ध्य चढ़ाते  सूरज  को  हम, पूजन   ईश  करार ।

गंगा- स्नान   प्रात    वेला  में, शुद्ध खाद्य परिवार।।

खिचड़ी पापड़ घी तिल सकरी, मिष्ठान्न  कई बार ।

पतंग   उड़ाते    लाल    पीली,  खाते  लड्डू  चार ।। 

ज्यौं-  ज्यौं  सूरज   चढ़े  चढ़ाई, वसन्त  हो   उत्थान । 

कि खिलने  लगी  कली कुँवारी, काम सवार सुजान।।

सरसों  उग   आते  फूल   कई,  दिखते   खेत मचान ।

गैंदा     हरसिंगार     हँसते   हैं, पुष्प हर  घर  उद्यान।।

महिमा  वसन्त  अनुपम  होती, खिलें  कमल हैं  ग्रीष्म। 

नद - नाल   सरोवर  सुन्दर  हैं, भँवर - भँवर हैं  प्रीज्म।।

रजत    रश्मियाँ  आँखों  रमतीं, भँवरे     रमते  फूल ।

गन्ध   बसी  वन,  गूँज   बाँसुरी, सुन   यमुना  कूल ।।

मौलिक व अप्रकाशित 

सरसी छंद पर सुन्दर सृजन ..बधाई आदरणीय 

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अशोक भाईजी धन्यवाद ... मेरा प्रयास  सफल हुआ।"
Tuesday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"वाह वाह वाह !!! बहुत दिनों बाद ऐसी लाजवाब प्रतिक्रिया पढने में आई है। कांउटर अटैक ॥ हजारों धन्यवाद…"
Tuesday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"  आदरणीय शेख शाहज़ाद उस्मानी जी सादर, सरकारी शालाओं की गलत परम्परा की ओर ध्यान आकृष्ट कराती…"
Tuesday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"सार्थक है आपका सुझाव "
Tuesday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदाब।‌ रचना पटल पर उपस्थिति और समीक्षाओं हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभा पाण्डेय जी। मेरी…"
Tuesday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभाजी ।  इसमें कुछ कमी हो सकती है लेकिन इस प्रकार के आयोजन शहरों…"
Tuesday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब सादर, बिना सोचे बोलने के परिणाम पर सुन्दर और संतुलित लघुकथा…"
Tuesday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"अमराई में उत्सव छाया,कोयल को न्यौता भिजवाया। मौसम बदले कपड़े -लत्ते, लगे झूमने पत्ते-…"
Tuesday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"ठण्ड गई तो फागुन आया। जन मानस में खुशियाँ लाया॥ आम  लगे सब हैं बौराने। पंछी गाते सुर में…"
Tuesday
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"लघुकथा किसी विसंगति से उभरती है और अपने पीछे पाठको के पीछे एक प्रश्न छोड़ जाती है। सबकुछ खुलकर…"
Tuesday
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अखिलेश जी स्वयं के प्रचार प्रसार के लिए इस तरह के प्रायोजित कार्यक्रमों का चलन साहित्य और…"
Tuesday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"  जी ! //हापुस लँगड़ा नीलम केसर। आम सफेदा चौसा उस पर।।//... कुछ इस तरह किया जा सकता है.…"
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service