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Awanish Dhar Dvivedi
  • Male
  • GHAZIABAD U.P
  • India
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Latest Activity

Samar kabeer commented on Awanish Dhar Dvivedi's blog post ग़ज़ल
"जनाब अवनीश जी आदाब, आपने इस ग़ज़ल के क्या अरकान लिए हैं ? बताने का कष्ट करें ताकि इस पर टिप्पणी करने में आसानी हो I "
Sep 15
Awanish Dhar Dvivedi posted a blog post

गज़ल

आज हूं लाचार धीरज मैं दिखाऊँगामेहनत से राज करके मैं दिखाऊंगा।।वक़्त का है काम चलना खुद के ढर्रे परज़िन्दगी को भी मुक़द्दस मैं बनाऊँगा।।जो भी दुःखियारे हैं उनके दर्द को हूँ जानतादर्द में हमदर्द बनकर मैं हँसाऊँगा।।वक्त कब रुकता जहाँ में हो भला या हो बुराअनवरत चलता ही रहता मैं बताऊँगा।हौसलों से ही तो होती हैं उड़ानें आसमां मेंबन परिन्दा जोश के पर मैं लगाऊँगा।।आज के इस दौर में छाया घना कुहरा तो क्या?धैर्य रख अवनीश अच्छे दिन मैं लाऊँगा।।   मौलिक एवं अप्रकाशित        अवनीश      ३१/५/२०२२See More
Aug 30
Awanish Dhar Dvivedi posted a blog post

ग़ज़ल

दिल में जो छुपाया है बोलना चाहेंगेउसे दिल से मिटाया है बोलना चाहेंगे।करेंगे जतन मिटादें उसकी यादों कोउसे हमने भुलाया है बोलना चाहेंगे।वो हरगिज़ न रहेगा यादों में मिरीयाद बनके सताया है बोलना चाहेंगे।बड़ा गुरुर था उसे मुझे अपने प्यार परहालात ने मिटाया है बोलना चाहेंगे।फलक के चाँद से बातें किया रातें जगी मैंनेमाहताब भी शर्माया है बोलना चाहेंगे।अच्छा सिला दिया है मेरे यार ने मुझे जो भी खोया पाया है बोलना चाहेंगे।दुनियादारी भी होती है क्या खूब अवनीशअपनों ने सितम ढाया है बोलना चाहेंगे।जहाँ में कुछ यहाँ…See More
Aug 27
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on Awanish Dhar Dvivedi's blog post गज़ल
"आदरणीय अवनीश धर द्विवेदी जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है बधाई स्वीकार करें, आपकी इस ग़ज़ल के अरकान, रदीफ़ और क़वाफ़ी क्या हैं?  अरकान, रदीफ़, क़वाफ़ी और ग़ज़ल के बुनियादी उसूल जानने के लिए इसी मंच पर उपलब्ध 'ग़ज़ल की कक्षा' ग्रुप…"
Aug 23
Awanish Dhar Dvivedi posted a blog post

गज़ल

आज हूं लाचार धीरज मैं दिखाऊँगामेहनत से राज करके मैं दिखाऊंगा।।वक़्त का है काम चलना खुद के ढर्रे परज़िन्दगी को भी मुक़द्दस मैं बनाऊँगा।।जो भी दुःखियारे हैं उनके दर्द को हूँ जानतादर्द में हमदर्द बनकर मैं हँसाऊँगा।।वक्त कब रुकता जहाँ में हो भला या हो बुराअनवरत चलता ही रहता मैं बताऊँगा।हौसलों से ही तो होती हैं उड़ानें आसमां मेंबन परिन्दा जोश के पर मैं लगाऊँगा।।आज के इस दौर में छाया घना कुहरा तो क्या?धैर्य रख अवनीश अच्छे दिन मैं लाऊँगा।।   मौलिक एवं अप्रकाशित        अवनीश      ३१/५/२०२२See More
Aug 23
Sushil Sarna commented on Awanish Dhar Dvivedi's blog post फूल
"वाह आदरणीय बहुत सुंदर प्रस्तुति"
Aug 22
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Awanish Dhar Dvivedi's blog post गज़ल
"आ. भाई अवनीश जी, सादर अभिवादन। सुन्दर रचना हुई है। हार्दिक बधाई."
Aug 19
Awanish Dhar Dvivedi posted a blog post

फूल

फूलों को दिल से उगाता कोईफूल खिलते ही फोटो खिंचाता कोई।१।है बनावट की दुनियाँ जहाँ देख लोकाम बनते ही हक़ को जताता कोई।२।फूल खिलते हैं गुलशन में हरदम मगरउनके जैसी खुशी काश लाता कोई।३।रङ्ग फूलों के होते बहुत से मगरफूलों सी ताजगी क्या दिलाता कोई।४।फूल खुद टूट के भी हैं देते खुशीउनसे कुर्बां होना सीख पाता कोई।५।फूल होते हैं नाजुक बहुत ही मगरफूल सा सब्र खुद में ले आता कोई।६।खुद की कीमत पे औरों को देना खुशीकाश फूलों से ये सीख पाता कोई।७। आदमी आदमी से करे बस वफा बेवफाई को दिल से भगाता कोई।८।फूल हरदम…See More
Aug 17
Awanish Dhar Dvivedi commented on Usha Awasthi's blog post क्या दबदबा हमारा है!
"बहुत सुन्दर रचना।"
Aug 16
Awanish Dhar Dvivedi posted blog posts
Aug 14
Chetan Prakash commented on Awanish Dhar Dvivedi's blog post गज़ल
"कृपया, मतले के सानी  मिसरे  को कुछ  यूँ  पढ़ें :  " बहतर ख़ुदा क़सम वही तो चारागर  मिले ", धन्यवाद  !"
Aug 10
Awanish Dhar Dvivedi posted photos
Aug 10
Awanish Dhar Dvivedi posted blog posts
Aug 10
Awanish Dhar Dvivedi commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post ओ बी ओ मंच को 12वीं सालगिरह पर समर्पित ग़ज़ल
"वाह वाह सर बहुत ही सटीक और सुन्दर कहा है आपने। बधाइयां "
Aug 10
Awanish Dhar Dvivedi commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कहता हूँ तुझसे जन्मों का नाता है ओबीओ
"बिल्कुल सत्य वचन है सर बहुत सुन्दर।"
Aug 10
Awanish Dhar Dvivedi commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post रक्त से भीगा है आगन आज तक भी -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"क्या खूब कहा है आपने बधाईयां।।"
Aug 10

Profile Information

Gender
Male
City State
Ghaziabad
Native Place
Gorakhpur
Profession
Teaching
About me
I am a Sanskrit language teacher.in Delhi govt.

               कविता
जब हो हृदय अतिशय व्यथित
मन में उठें लहरें अमिट।
तब काव्य सरिता का निकलना
शब्द के जल से द्रवित हो
अश्रु से बन धार बहना
है यही कविता का कहना।।काव्य सरिता का...

या परम सुख की घड़ी में
याद करके जिस कड़ी को।
अपने मन मन्दिर से सुंदर
शब्द गुच्छों का निकलना
काव्य सरिता का है बहना।काव्य सरिता का....

या विरह की वेदना का
जब स्वयं वर्णन हो करना।
बिन कहे सब कुछ हो कहना
शब्द की नौका पे चढ़कर
दर्द की दरिया में बहना
है यही कविता का करना।काव्य सरिता का.....

या हृदय की वेदना में
शब्दभावों की तथा सं-
कल्पना से प्राण भरना।
और समुचित छन्दमात्रा रस
गणों से प्रिय का हो श्रृंगार करना।
काव्य सरिता का.....

है यही कविता नदी का
कलकलाते बह निकलना।
और कविता की कली का
फूल सा खिलकर महकना।
काव्य सरिता का है बहना।

मौलिक एवं अप्रकाशित।

अवनीश धर द्विवेदी।।

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ग़ज़ल

दिल में जो छुपाया है बोलना चाहेंगे

उसे दिल से मिटाया है बोलना चाहेंगे।

करेंगे जतन मिटादें उसकी यादों को

उसे हमने भुलाया है बोलना चाहेंगे।

वो हरगिज़ न रहेगा यादों में मिरी

याद बनके सताया है बोलना चाहेंगे।

बड़ा गुरुर था उसे मुझे अपने प्यार पर

हालात ने मिटाया है बोलना चाहेंगे।

फलक के चाँद से बातें किया रातें जगी मैंने

माहताब भी शर्माया है बोलना चाहेंगे।

अच्छा सिला दिया है मेरे यार ने…

Continue

Posted on August 26, 2022 at 11:09pm — 1 Comment

गज़ल

आज हूं लाचार धीरज मैं दिखाऊँगा

मेहनत से राज करके मैं दिखाऊंगा।।

वक़्त का है काम चलना खुद के ढर्रे पर

ज़िन्दगी को भी मुक़द्दस मैं बनाऊँगा।।

जो भी दुःखियारे हैं उनके दर्द को हूँ जानता

दर्द में हमदर्द बनकर मैं हँसाऊँगा।।

वक्त कब रुकता जहाँ में हो भला या हो बुरा

अनवरत चलता ही रहता मैं बताऊँगा।

हौसलों से ही तो होती हैं उड़ानें आसमां में

बन परिन्दा जोश के पर मैं लगाऊँगा।।

आज के इस दौर में…

Continue

Posted on August 22, 2022 at 9:30pm — 1 Comment

फूल

फूलों को दिल से उगाता कोई

फूल खिलते ही फोटो खिंचाता कोई।१।

है बनावट की दुनियाँ जहाँ देख लो

काम बनते ही हक़ को जताता कोई।२।

फूल खिलते हैं गुलशन में हरदम मगर

उनके जैसी खुशी काश लाता कोई।३।

रङ्ग फूलों के होते बहुत से मगर

फूलों सी ताजगी क्या दिलाता कोई।४।

फूल खुद टूट के भी हैं देते खुशी

उनसे कुर्बां होना सीख पाता कोई।५।

फूल होते हैं नाजुक बहुत ही मगर

फूल सा सब्र खुद में ले आता…

Continue

Posted on August 16, 2022 at 10:11pm — 1 Comment

माँ शरदावन्दन

नमन है ज्ञानदा अरु शारदा को सर्वदा सततम।

करें मतिमन्दता को दूर जो अज्ञान को हरदम।१।

विनाशें भक्तगण के मनतिमिर को तेज से भर दें।

मिटा संशय सदा जीवन बना उज्ज्वल सफल कर दें।२।

भगवती शारदा वरदा प्रवाहित ज्ञानगङ्गा कीजिये।

मति को विमल करके सकल अज्ञानता हर लीजिये।३।

स्वच्छ मन हो अरु मुदित जन-जन का जीवन हो।

सभी सज्जन बनें सुधिजन करें शुभकर्म वर्धन हो।४।

मनोरथ पूर्ण करती हैं सदा वरदायिनी माता।

उन्हीं की हो…

Continue

Posted on August 14, 2022 at 6:03pm

 
 
 

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