For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

एक प्रयास दो रंग. मुक्तहरा सवैया (जगण x 8)

नवीन लगे दिन रात नवीन सुहावत है हर बात नवीन/

नवीन खिले सब फूल-बहार,बयार चली भर शीत नवीन/

नवीन मिला जब साथ भई हथ हाथ लिए कुछ बात नवीन/

नवीन प्रसंग नवीन उमंग मिला मन को मन मीत नवीन//

करो न बचाव मिले उसको भरपूर सजा अरु दंड कठोर/

बने जहं भी नर कोय पिशाच, चुभे उसको गल फांस कि डोर/

जहां नित शोषित नार रहे सरकार में शामिल हों सब चोर/

वहाँ न सुरक्षित नार रहे घरबार न द्वार न मित्र न मोर/

Views: 604

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Ashok Kumar Raktale on December 27, 2012 at 5:41pm

आदरणीय प्रदीप जी सादर, आपकी दोहा छंद पर रुचि ने मन मोह लिया है.बस ज़रा सा दोहा विधान के अनुसार १३ - ११ मात्रा को भी निभाइए और आइये छंद सीखने कि कक्षा में मेरे साथ आप भी होंगे तो कक्षा कि रौनक और भी बढ़ जायेगी. स्वागत.

देख नवीनता आपकी प्रदीप भये नवीन २१    १२१२      २१२, १२१  १२ १२१

नारी असुरक्षित वहाँ  रहे  जहाँ कमीन   २२   ११२११       १२, १२    १२ १२१

 

Comment by Ashok Kumar Raktale on December 27, 2012 at 5:00pm

आदरणीय भ्रमर जी सादर सवैया और सक्रीय सदस्य पर आपकी बधाई पाकर प्रसन्नता हुई. आपका बहुत बहुत आभार.जय श्री राधे.

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on December 27, 2012 at 3:16pm

देख नवीनता आपकी प्रदीप भये नवीन 

नारी असुरक्षित वहाँ  रहे  जहाँ कमीन

अब देखिये सर जी, 

सादर 

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on December 26, 2012 at 9:59pm

प्रिय अशोक भाई माह का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर आप के श्रम और लगन को बधाई जय श्री राधे 

भ्रमर 5 
Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on December 25, 2012 at 10:38pm

प्रिय अशोक भाई सुन्दर जज्बात और सुन्दर सन्देश देती सरकार और समाज को जगाती हुयी ये रचना .सवैया सुन्दर रही ...बधाई 

भ्रमर 5 
Comment by Ashok Kumar Raktale on December 25, 2012 at 6:36pm

आदरेया प्राची जी सादर, आपकी शिकायत को सुधार कर पुनः सवैया प्रस्तुत किया है यदि आप इसे पढ़ें तो अवश्य कोई त्रुटी हो तो अवगत कराएं.आभार.

Comment by Ashok Kumar Raktale on December 25, 2012 at 6:34pm

सवैया प्रयास पर आपसे सराहना पाकर संबल मिला. आपका हार्दिक आभार आदरेया राजेश कुमारी जी सादर.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on December 25, 2012 at 12:55pm

आदरणीय अशोक रक्ताले जी हर सवैया में आपका प्रयास बहुत प्रेरणास्पद है ,बहुत सुन्दर सामयिक सवैये लिखे  हैं दूसरा तो बहुत ही सार्थक है बहुत पसंद आया ,हार्दिक बधाई आपको 

Comment by Ashok Kumar Raktale on December 24, 2012 at 8:37pm

आदरणीय लड़ीवाला जी एवं आदरेया महिमाश्री जी आपसे छंद के प्रस्तुत भाव पर सराहना पा कर प्रसन्नता हुई. आप दोनों का ही बहुत बहुत आभार.

Comment by Ashok Kumar Raktale on December 24, 2012 at 8:34pm

आदरेया प्राची जी सादर, बिलकुल सही है भाव निर्वहन  दोनों ही विषयों पर संतुलित ही रख पाया हूँ. दोनों ही सवैया में जो त्रुटियाँ आपने निर्धारित की है उसमे अवश्य ही सुधार करूँगा. सादर.

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Jaihind Raipuri posted a blog post

वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं

ग़ज़ल 2122  1212  22वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैकितने दुःख दर्द से भरा दिल हैये मेरा क्यूँ हुआ है…See More
9 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन आपकी मनोहारी प्रतिक्रिया से समृद्ध हुआ । हार्दिक आभार आदरणीय । फागोत्सव…"
yesterday
Nilesh Shevgaonkar and Dayaram Methani are now friends
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212   22 वो समझते हैं मस्ख़रा दिल है कितने दुःख दर्द से भरा दिल…"
Tuesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Tuesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

माना कि रंग भाते न फिर भी अगर पड़े -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२***पीछे गयी  है  छूट  जो  होली  गुलाल की साजिश है इसमें देख सियासी कपाल की।१। *…See More
Tuesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"जय-जय सादर"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"बेटा,  व्तक्तिवाची नहीं"
Saturday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"  आदरणीय दयाराम जी, रचनाकार का काम रचनाएँ प्रस्तुत करना है। पाठक-श्रोता-समीक्षक रचनओं में अपनी…"
Saturday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"आदरणीय सौरभ पांडेय जी, हर रचना से एक संदेश देने का प्रयास होता है। मुझे आपकी इस लघु कथा से कोई…"
Saturday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"उत्साहवर्द्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी जी।  आप उन शब्दों या पंक्तियों को…"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर लघुकथा हुई है। हार्दिक बधाई। एक दो जगह टंकण त्रुतियाँ रह…"
Saturday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service