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लोकतंत्र

 

अर्जी लिए खड़ा है बुधिया,

भूखा प्यासा खाली पेट.

राजा जी कुर्सी पर बैठे,

घुमा रहे हैं पेपरवेट.

 

कहने को तो लोक तंत्र है,

मगर लोक को जगह कहाँ है.

मंतर सारे पास तंत्र के,

लोक भटकता यहाँ-वहाँ  है.

 

रोज दक्षिणा के बढ़ते हैं,

सुरसा के मुख जैसे रेट.

 

राजकुँवर जी की मर्जी है,

टोपी पहनें या फिर पगड़ी.

सारी परजा बाँट रखी है,

कुछ है पिछड़ी, कुछ है अगड़ी.

 

बारी-बारी से करते हैं,

मिल जुल कर सबका आखेट.

 

साइड में हो जाना प्यारे,

जब भी वो निकलें बाजू से.

आलू प्याज अगर मँहगे हों,

काम चला लेना काजू से.

 

कच्छा बनियान बहुत है तुमको,

उनको आवश्यक जाकेट.

 

गठबंधन की गाँठ न टूटे,

नवसिखियों को सिखा रहे हैं.

जिनके पास न धरती उनको,

स्वप्न गगन के दिखा रहे हैं.

 

लोक छुहारा हुआ सूख कर,

हुआ तंत्र का दुगुना वेट.

"मौलिक एवं अप्रकाशित"

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Comment by बसंत कुमार शर्मा on August 25, 2018 at 10:25am

आदरणीय नीलम उपाध्याय जी आपका दिल से शुक्रिया 

Comment by Neelam Upadhyaya on August 24, 2018 at 4:03pm

आदरणीय बसंत कुमार जी, नमस्कार ।  लोकतंत्र पर अच्छे गीत की रचना  हुयी है।  बधाई स्वीकार करें। 

Comment by बसंत कुमार शर्मा on August 23, 2018 at 7:33am

आदरणीय डॉ छोटेलाल सिंह जी आपका बेहद शुक्रिया हौसलाफजाई के लिए 

Comment by बसंत कुमार शर्मा on August 23, 2018 at 7:32am

आदरणीय  Ajay Tiwari जी आपकी बारीक नजर को सलाम, अभी ठीक करता हूँ इसे 

Comment by बसंत कुमार शर्मा on August 23, 2018 at 7:32am

आदरणीय Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" जी आपका दिल से शुक्रिया, सुझाव् अच्छा  है आपका यूंह ही मार्गदर्शन की अपेक्षा 

Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on August 22, 2018 at 7:14pm

आदरणीय वसन्त कुमार शर्मा जी यथार्थवादी दृष्टिकोण समाहित की हुई सुंदर रचना के लिए बधाई

Comment by Ajay Tiwari on August 22, 2018 at 1:23pm

आदरणीय बसंत जी, आज के राजनैतिक परिदृश्य पर बहुत सटीक व्यंग-गीत के लिए हार्दिक बधाई.

 'कच्छा बनियान बहुत है तुमको'  इस पंक्ति में दो मात्राएँ ज़्यादा हैं.

इस गीत को 'नवगीत' की जगह 'जनगीत' कहना बेहतर होगा.    

सादर 

Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on August 22, 2018 at 12:07pm

वास्तविकता का अभिव्यक्ति नव गीत बधाई माँग रहा, मेरी तरफ से ढेर सारी बधाई। "कच्छा बनियान" के स्थान पर "चड्ढी-बंडी" करके देखिए सरसता बढ़ जाएगी।

Comment by बसंत कुमार शर्मा on August 22, 2018 at 10:44am

आदरणीय  लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी दिल से शुक्रिया आपका 

Comment by बसंत कुमार शर्मा on August 22, 2018 at 10:44am

 आदरणीय Sushil Sarna  जी दिल से शुक्रिया आपका 

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