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'करुणा-सन्निधि' (लघुकथा)

आधुनिक भारत के आधुनिक शहर की आधुनिक सड़कों पर एक बार फिर भावुक और अहसानमंद भीड़ एकत्रित थी। आम आदमी तो भीड़ में थे ही, नेता-अभिनेता और मीडिया भी था। कुछ करुणाद्र थे, कुछ कृतज्ञ और कुछ समर्थक या पूजक और कुछ अवसरवादी ढोंगी समर्थक भी थे! दृश्य बेहद करुणामय था। कुछ तो रोये ही जा रहे थे अपने प्रिय व्यक्तित्व या आका के स्वास्थ्य और जीवन संबंधित शुभकामनाओं और प्रार्थनाओं के साथ। जबकि कुछ ऐच्छिक समाचार सुनने की प्रतीक्षा में थे।


"समर्थकों, उपासकों, अहसानमंदों और अवसरवादियों की मिली-जुली ऐसी भीड़ नेताओं, अभिनेताओं या अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त बाबाओं के लिये ही इकट्ठी होती हमने देखी है , है न?" भीड़ की वीडियोग्राफी करते एक नवयुवक ने अपने साथी से कहा।


"दरअसल यह वैसे ही लोगों की असली 'निधि' है! कुछ के लिये 'करुणा' की अभिव्यक्ति जायज़ या सामयिक है, तो कुछ के लिये विवशता, दबाव या अवसरवादिता! हम सबका 'भीड़तंत्र' के मनोविज्ञान से सरोकार है, बस!"


"करुणा की सन्निधि; क्षणिक या पारंपरिक, बस, है न!" साथी के जवाब में विडियोग्राफ़र ने अपना कैमरा सड़क पर गिरती-पड़ती महिलाओं पर फोकस करते हुए कहा।


".. 'सन्निधि' कह लो या 'सन्निपात' जैसी राजनीतिक बीमारी; हमारे मुल्क में जो आम बात है!" साथी ने राजनेताओं पर तंज कसते हुए कहा।


"यह करुणा महिला और बाल शोषण के ख़िलाफ़ यूं सड़क पर सामूहिक व्यक्त नहीं की जाती; केवल अहसानात जताने और परिस्थितियों को भुनाने के लिए की जाती है, जनाब!" पीछे से एक प्रौढ़ व्यक्ति ने टिप्पणी की।


"अपने देश में ऐसी ढोंगी परम्परायें हमने ही बनाई हैं और दृढ़-संकल्प से हम ही उन्हें तोड़ सकते हैं या समाप्त करवा सकते हैं!" उन दोनों साथियों में से एक ने कहा - "यह मत भूलो कि आम चुनाव भी तो नज़दीक हैं!"


(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment by Sheikh Shahzad Usmani on August 18, 2018 at 10:47am

मेरी इस ब्लॉग प्रविष्टि पर समय देकर हौसला अफ़ज़ाई हेतु सादर हार्दिक धन्यवाद आदरणीया बबीता गुप्ता  साहिबा।

Comment by babitagupta on August 15, 2018 at 4:44pm

अंतिम वाक्य बिलकुल सटीक  लगा ,राजनीति में बहुत कुछ भुनाना पड़ता हैं,बेहतरीन रचना के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार कीजियेगा आदरणीय सरजी।

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on August 9, 2018 at 5:47pm

टिप्पणियों द्वारा अनुमोदन और विचार साझा करने हेतु और पुनः स्नेहिल हौसला अफ़ज़ाई के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत शुक्रिया मुहतरम जनाब मोहम्मद आरिफ़ साहिब , मुहतरमा नीलम उपाध्याय साहिबा ,  मुहतरम जनाब समर कबीर साहिब और मुुुहतरमा नीता कसार साहिबा।

Comment by Neelam Upadhyaya on August 9, 2018 at 4:21pm

आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी,  बहुत ही अच्छी रचना की प्रस्तुति के लिए  बधाई स्वीकार करें। 

Comment by Samar kabeer on August 9, 2018 at 3:58pm

जनाब शैख़ शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,उम्दा लघुकथा हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Nita Kasar on August 8, 2018 at 7:49pm

आम चुनाव भी नज़दीक है,और अपनी अपनी राजनैतिक गोटियां भी फ़िट करनी है।बधाई कथा के लिये आद० शेख़ शहज़ाद उस्मानी जी ।

Comment by Mohammed Arif on August 8, 2018 at 12:58pm

आदरणीय तस्दीक अहमद जी आदाब,

                                आज चाहे नेता हो या अभिनेता जनता सभी के प्रति छद्म करूणा का प्रददर्शन कर रही है । बहुत ही सामयिक कथा । संवाद बहुत सशक्त । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।

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