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22  22  22  22  

गाता जाए एक दिवाना

दुनिया यारो पागलखाना

परदेश बनाया घर लेकिन

घर मे कम है एक सयाना

इससे आगे सोच ना पाऊं

बीबी बच्चे और ठिकाना

केक खिलाया साल बढ़ाए

भूल गया पर उम्र घटाना

एक शिगूफा छोड़ेगा फिर

अबके राजा भौत सयाना

मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by gumnaam pithoragarhi on June 21, 2018 at 12:14am

शुक्रिया एक नई जानकारी के लिए,,,,,,

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on June 20, 2018 at 11:00am

न (फ़ारसी शब्द ) नून और हे से बना है जिसमें मात्रा गिनते वक़्त हे गिर जाता है और मात्रा 1 रह जाती है | ना (हिंदी शब्द) जिसकी मात्रा 2 होती है ,

न और ना मतलब एक जैसा है |

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on June 19, 2018 at 10:28pm

गुमनाम साहिब, न की मात्रा 1 और ना की 2 होती है |

Comment by gumnaam pithoragarhi on June 19, 2018 at 9:23pm

तस्दीक अहमद साहब शुक्रिया आपने ग़ज़ल पर अपनी राय दी ,,,,, न हो या ना मात्रा 1 ही रहती है।।।।। शायद मैं ठीक हूँ ।।।।।

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on June 19, 2018 at 6:59pm

जनाब गुमनाम साहिब , ग़ज़ल की अच्छी कोशिश, मुबारकबाद क़ुबुल फरमाएं | जनाब समर साहिब के मशवरे पर ग़ौर कीजियेगा | शेर 3 के ऊला मिसरे में एब _तना फुर है (इस _से) इसकी जगह इसके कर सकते हैं | न को ना करने पर मात्रा बढ़ जाएगी |

Comment by gumnaam pithoragarhi on June 19, 2018 at 6:42pm

शुक्रिया रक्षिता जी आपको ग़ज़ल अच्छी लगी।।।।।।।

Comment by रक्षिता सिंह on June 19, 2018 at 7:52am

आदरणीय गुमनाम जी नमस्कार, सुन्दर पंक्तियाँ हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।

Comment by gumnaam pithoragarhi on June 18, 2018 at 11:07am

शुक्रिया दोस्तो ....आपके सुझाव का धन्यवाद.... न और ना एक है इसीलिए .....ना ही कहा।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on June 17, 2018 at 10:17pm

बहुत खूब...

Comment by Samar kabeer on June 17, 2018 at 11:39am

जनाब गुमनाम जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।

'परदेश बनाया घर लेकिन'

ये मिसरा मात्रा के हिसाब से ठीक है,लेकिन लय में नहीं है,इसे यूँ कर सकते हैं:-

'घर परदेस बनाया लेकिन'

तीसरे शैर के ऊला मिसरे में 'ना' को "न" कर लें ।

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