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गजल(क्या क्या बदलोगे...)

22 22 22 22 22 22 22 2

क्या क्या बदलोगे बाबूजी, जान रहे सब ,बोलो तो
छोड़ो औरों की बातें अब खुद अपने को तोलो तो।1

बोल रहे सब बोल बढ़ाकर,लगता हो तुमको जो ऐसा
अपनी करनी का खाता अब,मत शरमाओ,खोलो तो।2


पहुँचा देते लोग कहाँ तक ,बजा-बजाकर ताली भी
जन-सेवा करते-करते अब ठौर मिला है, सो लो तो।3


रंज हुईं मजबूर हवाएँ रह-रह आज बताती हैं
धुलता दामन,दाग चढ़े हैं,और जहर मत घोलो तो।4


चिट्ठी आई है चंदू की,चाचा और भतीजों को-
'एक दफा फिर जोर लगाकर मेरी जय-जय बोलो तो।5


कितना कुछ करने पर ही तो लक्ष्मी जी का साथ हुआ
विघ्न परोस गया बन भ्राता, उसका राज टटोलो तो।'6


माटी का कण-कण बोल रहा मगरूर पन-गद्दारों से
मोल चुकाना भूल गये माटी का,आँसू धो लो तो।7
"मौलिक व अप्ररकशित"

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Comment by Manan Kumar singh on January 14, 2018 at 1:00pm

मेरे प्रयास की सराहना के लिए आभारी हूँ इंसान जी।

Comment by Manan Kumar singh on January 14, 2018 at 12:59pm

आभारी हूँ आदरणीय बृजेश जी।

Comment by Manan Kumar singh on January 14, 2018 at 12:42pm

आभारी हूं आदरणीय कालीपद जी।

Comment by surender insan on January 12, 2018 at 2:51pm

वाह जी वाह ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है बधाई स्वीकार करे  जी।

Comment by Kalipad Prasad Mandal on January 12, 2018 at 9:42am

आदरणीय मनन जी ,बहुत सुन्दर ग़ज़ल हुई है , हार्दिक बधाई 

Comment by Manan Kumar singh on January 11, 2018 at 7:50am

आपका आभार आदरणीय लक्ष्मण भाई।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on January 11, 2018 at 7:42am

आ. भाई मनन जी , सुंदर गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।

Comment by Manan Kumar singh on January 10, 2018 at 10:17pm

आदरणीय समर जी आदाब,आभारी हूँ।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on January 10, 2018 at 10:03pm

बड़ी खूब ग़ज़ल हुई आदरणीय..सादर

Comment by Samar kabeer on January 9, 2018 at 2:50pm

जनाब मनन कुमार जी आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई,बधाई स्वीकार करें ।

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