For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल - करते हैं चोरी पर चोरी क्या कहने

फैलुन फैलुन फैलुन फैलुन फैलुन फा
22 22 22 22 22 2
करते हो चोरी पर चोरी क्या कहने।
ऊपर से ये सीनाजोरी क्या कहनै।

बातें तो करते हो बढ़चढ़कर लेकिन,
बातें हैं कोरी की कोरी क्या कहने।

लाँघ न पाई अपने घर की जो देहरी,
दौड़ रही वो गाँव की गोरी क्या कहने।

कार्टून फिल्में क्या आईं टीवी में,
बच्चे भूले माँ की लोरी क्या कहने।

कल जो साधू सन्त दिखाई देते थे,
वे सब निकले आज अघोरी क्या कहने।

मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 559

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Ram Awadh VIshwakarma on November 2, 2017 at 10:03am
आदरणीय लक्ष्मण धामी मुसाफिर साहब बहुत बहुत शुक्रिया
Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on November 1, 2017 at 11:04pm
हार्दिक बधाई ।
Comment by Ram Awadh VIshwakarma on November 1, 2017 at 9:50pm
आदरणीय अफरोज़ सहर जी सादर आभार
Comment by Ram Awadh VIshwakarma on November 1, 2017 at 9:48pm
आदरणीय समर कबीर साहब जी ग़ज़ल सरहना के लिये बहुत बहुत शुक्रिया।
Comment by Afroz 'sahr' on November 1, 2017 at 6:29pm
आदरणीयराम अवध जी इस रचना पर आपको बधाई,,,
Comment by vijay nikore on November 1, 2017 at 4:53pm

गज़ल अच्छी लिखी है। बधाई।

Comment by Samar kabeer on November 1, 2017 at 2:35pm
जनाब राम अवध जी आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,बधाई स्वीकार करें ।
Comment by Ram Awadh VIshwakarma on October 31, 2017 at 5:12pm
आदरणीय अजय तिवारी जी आपकी मूल्यवान टिप्पणी पर मैं विचार करूँगा। आपका बहुत बहुत शुक्रिया। लेकिन जहाँ तक
मैने पढ़ा है शब्द अपने मूल रूप में लिखा जाता है और शायर जैसा पढ़ता है उसके उच्चारण के अनुसार तख्ती की जाती है। अगर वह कारटून कहेगा तो कार्टून को कारटून ही माना जायेगा। अगर ऐसा नहीं है तो मैं उसे ठीक अवश्य करूँगा। सादर
Comment by Ram Awadh VIshwakarma on October 31, 2017 at 5:02pm
आदर्णीय मन्डल जी ग़ज़ल सराहना के लिये सादर आभार
Comment by Ajay Tiwari on October 31, 2017 at 12:08pm

आदरणीय राम अवध जी,

बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है. हार्दिक शुभकामनाएं.

'कार्टून' को आपने अगर स्लैंग 'कारटून' के तौर पर इस्तेमाल किया है तो इसे लिखना भी 'कारटून' ही चाहिए.

सादर

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सर पर पिता का हाथ है जिसके बना हुआ - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई आज़ी तमाम जी, उत्साहवर्धन के लिए धन्यवाद ।"
19 minutes ago
Aazi Tamaam commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल ( हो के पशेमाँ याद करोगे)
"सादर प्रणाम आ अमीर जी काफी समय से अनुपस्थित रहे मंच पर सब ठीक तो है काफी अच्छी ग़ज़ल हुई है सहृदय…"
1 hour ago
Aazi Tamaam commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सर पर पिता का हाथ है जिसके बना हुआ - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"सादर प्रणाम आ धामी सर बेहतरीन ग़ज़ल के लिये बधाई"
1 hour ago
Aazi Tamaam commented on Mamta gupta's blog post जो भी ज़िक्रे ख़ुदा नहीं करते
"सादर प्रणाम आ ममता जी अच्छी ग़ज़ल है बाकी गुणीजनों की राय का अनुसरण करें और निखर जायेगी"
1 hour ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Mamta gupta's blog post जो भी ज़िक्रे ख़ुदा नहीं करते
"मुहतरमा ममता गुप्ता 'नाज़' जी आदाब, बहतरीन रवानी के साथ अच्छी ग़ज़ल कही है, आपने उर्दू…"
3 hours ago
Chetan Prakash commented on Mamta gupta's blog post जो भी ज़िक्रे ख़ुदा नहीं करते
" अच्छी साफ-सुथरी ग़ज़ल है, आदरेया, बधाई  !"
6 hours ago
Samar kabeer commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सत्तर बरस में बचपना इसका गया नहीं-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"'फिर भी ये नेता आज का दानी में आयेगा'(पर कर्ण जैसा नाम तो दानी में आयेगा)// इसे छोड़कर…"
6 hours ago
Mamta gupta posted a blog post

जो भी ज़िक्रे ख़ुदा नहीं करते

जो भी ज़िक्रे ख़ुदा नहीं करतेवो किसी के हुआ नहीं करतेनेमतें पा के लोग क्युं आख़िरशुक्रे ख़ालिक़ अदा नहीं…See More
8 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सत्तर बरस में बचपना इसका गया नहीं-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति, सराहना व मार्गदर्शन के लिए आभार । इंगित मिसरों को…"
10 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सर पर पिता का हाथ है जिसके बना हुआ - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई अमीरुद्दीन जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
10 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सर पर पिता का हाथ है जिसके बना हुआ - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई समर जी,सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति, और स्नेह के लिए आभार।"
11 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सर पर पिता का हाथ है जिसके बना हुआ - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"जनाब लक्ष्मण धामी भाई मुसाफ़िर जी आदाब, फ़ादर्स-डे पर अच्छी ग़ज़ल कही है आपने आख़िरी शे'र ख़ास…"
11 hours ago

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service