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लम्बे रदीफ़ की ग़ज़ल (कज़ा मेरी अगर जो हो)

गुणीजनों के सुझाव के हेतु।
काफ़िया=आ
रदीफ़= *मेरी अगर जो हो, तो हो इस देश की खातिर*
1222×4

खता मेरी अगर जो हो, तो हो इस देश की खातिर,
सजा मेरी अगर जो हो, तो हो इस देश की खातिर।

वतन के वास्ते जीना, वतन के वास्ते मरना,
वफ़ा मेरी अगर जो हो, तो हो इस देश की खातिर।

नशा ये देश-भक्ति का, रखे चौड़ी सदा छाती,
अना मेरी अगर जो हो, तो हो इस देश की खातिर।

रहे चोटी खुली मेरी, वतन में भूख है जब तक,
शिखा मेरी अगर जो हो, तो हो इस देश की खातिर।

गरीबों के सदा हक़ में, उठा आवाज़ जीता हूँ,
सदा मेरी अगर जो हो, तो हो इस देश की खातिर।

रखूँ जिंदा शहीदों को, निभा किरदार मैं उनका,
अदा मेरी अगर जो हो, तो हो इस देश की खातिर।

मेरी मर्जी तो ये केवल, बढ़े ये देश आगे ही,
रज़ा मेरी अगर जो हो, तो हो इस देश की खातिर।

रहे रोशन सदा सब से, वतन का नाम हे भगवन,
दुआ मेरी अगर जो हो, तो हो इस देश की खातिर।

चढ़ातें सीस माटी को, 'नमन' वे सब अमर होते,
कज़ा मेरी अगर जो हो, तो हो इस देश की खातिर।


मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by बासुदेव अग्रवाल 'नमन' on October 26, 2017 at 12:32pm
आ0 रामबली जी आपका बहुत बहुत आभार।
Comment by रामबली गुप्ता on October 25, 2017 at 9:05pm
आदरणीय भाई वासुदेव शरण अग्रवाल जी उम्दा ग़ज़ल हुई है।दिल से बधाई स्वीकारें
Comment by बासुदेव अग्रवाल 'नमन' on October 25, 2017 at 4:21pm
आ0 अजय तिवारी जी आपकी हौसला आफजाई का तहे दिल से शुक्रिया।
Comment by Ajay Tiwari on October 24, 2017 at 11:01am

आदरणीय बासुदेव जी,
लम्बी रदीफ़ का बहुत अच्छा प्रयोग किया है.हार्दिक शुभकामनाएं.
सादर

Comment by बासुदेव अग्रवाल 'नमन' on October 24, 2017 at 9:02am
आ0 महेंद्र कुमारजी आपका हृदय से आभार।
Comment by Mahendra Kumar on October 23, 2017 at 10:45pm

लम्बी रदीफ़ को ले कर अच्छी ग़ज़ल कही है आपने आ. बासुदेव अग्रवाल जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर.

Comment by बासुदेव अग्रवाल 'नमन' on October 23, 2017 at 10:41am
आ0 सुरेन्द्र नाथ सिंह जी आपका हृदय तल से आभार।
Comment by बासुदेव अग्रवाल 'नमन' on October 23, 2017 at 10:40am
आ0 आशुतोष मिश्रा जी आपका हृदय तल से आभार।
Comment by नाथ सोनांचली on October 23, 2017 at 8:40am
आद0 बासुदेव अग्रवाल'नमन'जी सादर अभिवादन, उम्दा ग़ज़ल हुई है, इतने बड़े रदीफ़ का आपने निर्वहन किया। बेहतरीन।दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ
Comment by Dr Ashutosh Mishra on October 22, 2017 at 9:16pm
आदरणीय वासुदेव जी इतनी बड़ी रदीफ़ में बहुत कम ग़ज़ल अब तक पढी हैं मैंने। इस रचना के लिए हार्दिक बधाई सादर

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