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तेरे इंतज़ार में ...

तेरे इंतज़ार में ...

गज़ब करता रहा
तेर हर वादे पे
यकीं करता रहा
हर लम्हा
तेरी मोहब्बत में
कई कई सदियाँ
जीता रहा
और हर बार
सौ सौ बार
मरता रहा
पर अफ़सोस
तू
मुझे न जी सकी
मैं
तुझे न जी सका
पी लिया
सब कुछ मगर
इक अश्क न पी सका
मेरी ख़ामोशी को तूने
मेरी नींद का
बहाना समझा
तू
ग़फ़लत में रही
और
मैं
अजल का हो गया
तिश्नागर आँखों के
अश्क सूख गए
इंतज़ार की
आदत से मज़बूर पलक
खुली रह गयी
वक्ते रुखसत तूने
इक बार भी न देखा
नज़र भर के मुझे
गो
मैं मर कर भी
तेरे इंतज़ार में
जीता ही रहा

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 703

Comment

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Comment by Sushil Sarna on September 29, 2017 at 7:29pm

आदरणीय तस्दीक़ अहमद खान साहिब, आदाब। .. सृजन आत्मीय स्नेह से पोषित करने का दिल से आभार।

Comment by Sushil Sarna on September 29, 2017 at 7:28pm

आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन आपकी स्नेहिल प्रशंसा का दिल से आभारी है। 

Comment by Sushil Sarna on September 29, 2017 at 7:28pm

आदरणीय गिरिराज भंडारी जी भाई साहिब सृजन के भावों को अपना अमूल्य समय देकर उपकृत करने का हार्दिक आभार। 

Comment by Sushil Sarna on September 29, 2017 at 7:27pm

आदरणीय विजय निकोर साहिब , प्रणाम। .... सृजन के भावों को अपनी स्नेह गंगा से अमृत्व प्रदान करने का दिल से आभार। 

Comment by Sushil Sarna on September 29, 2017 at 7:26pm

आदरणीय रामबली गुप्ता जी सृजन को अपनी आत्मीय वाह से शोभित करने का हार्दिक आभार।

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on September 28, 2017 at 6:00pm
जनाब सुशील सरना साहिब ,इंतज़ार के फ़लसफ़े को बयान करती सुन्दर कविता हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमायें
Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on September 28, 2017 at 4:28pm
आ. भाई सुशील जी अच्छी कविता हुई है । हार्दिक बधाई ।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on September 27, 2017 at 11:18am

बहुत खूब , आदरनीय सुशील भाई , बढ़िया कविता रची है , हार्दिक बधाइयाँ

Comment by vijay nikore on September 27, 2017 at 5:44am

//इक बार भी न देखा 
नज़र भर के मुझे 
गो 
मैं मर कर भी 
तेरे इंतज़ार में 
जीता ही रहा//

बहुत ही खूबसूरत , वाह ! ऐसे ही लिखते रहें। हार्दिक बधाई, भाई सुशील जी।

Comment by रामबली गुप्ता on September 26, 2017 at 10:00pm
सुशील सरना जी****

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