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ग़ज़ल - शर्मिन्दा कर रहा है कोई " सलीम रज़ा

.221 2121 1221 212

..................................

अपने हसीन रुख़ से हटा कर निक़ाब को,  

शर्मिन्दा  कर  रहा  है  कोई माहताब को 

.

कोई  गुनाहगार   या   परहेज़गार    हो,

रखता है रब सभी केअमल के हिसाब को 

.

उनकी निगाहे नाज़ ने मदहोश कर दिया,

मैं  ने  छुआ  नहीं है क़सम से शराब को 

.

दिल चाहता है उनको दुआ से नावाज़ दूँ,

जब देखता हूँ बाग में खिलते गुलाब को 

.

ये ज़िन्दगी तिलिस्म के जैसी है दोस्तो,

क्या देखते नहीं हो बिखरते हुबाब को 

.

जुगनू मुक़ाबले पे न आ जाएं अब कहीं,

इस बात ने परेशां किया आफ़ताब को 

.

इन्सान  बन  गया है "रज़ा" आदमी से वह,

दिलसे पढ़ा है जिसने ख़ुदा की किताब को 

.........................................

"मौलिक व अप्रकाशित" 

Views: 946

Comment

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Comment by SALIM RAZA REWA on September 17, 2017 at 11:32pm
आ. राम बली जी,
ग़ज़ल पसंद आई तहे दिल से शुक्रिया,
Comment by रामबली गुप्ता on September 17, 2017 at 10:58pm
ज़नाब सलीम रजा जी सभी शैर अच्छे लगे। बहुत ही उम्दा ग़ज़ल हुई है। दिल से बधाई स्वीकारें। सादर
Comment by SALIM RAZA REWA on September 16, 2017 at 6:58pm
बृजेश भाई साहब,
आपकी मुहब्बत के लिए शुक्रिया,
Comment by SALIM RAZA REWA on September 16, 2017 at 6:57pm
आदरणीय गिरिराज जी,
आप हमारे बड़े भाई है,
इसलिए आप छमा लिख कर अपने छोटे भाई को शर्मिंदा न करें, हमने तो बस आपका ध्यान केंद्रित किया था,
हमें आपके प्यार और आशीर्वाद की हमेशा जरूरत है,
Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on September 16, 2017 at 3:12pm
आदरणीय सलीम जी बड़ी ही खूबसूरत ग़ज़ल कही है..हार्दिक बधाई

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on September 16, 2017 at 11:21am

आ. सलीम भाई मै ने बदलाव को पढ़ लिया था पर , आ. समर भाई जी सलाह पढ़ के आदतन ये जुम्ला लिख ही जाता है .. क्षमा कीजियेगा ।

Comment by SALIM RAZA REWA on September 16, 2017 at 11:06am
आ. गिरिराज जी,
ग़ज़ल पसंद करने के लिए शुक्रिया.. साहब मैंने जरूरी बदलाव पहले ही कर लिया है, शायद आप उन मिसरों को ध्यान से न पढ़ा होगा,

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on September 16, 2017 at 10:44am

आदरणीय सल्लीम भाई , बेहतरीन ग़ज़ल कही है ... तहे दिल से मुबारक बाद कुबूल कीजिये । आ. समर भाई जी की बातों पर गौर कीजियेगा ।

Comment by SALIM RAZA REWA on September 16, 2017 at 8:58am
आप सब की मुहब्बातो के लिए शुक़गुज़ार हूँ.
Comment by SALIM RAZA REWA on September 15, 2017 at 2:48pm
आ. आशुतोष जी आपकी मुहब्बत के लिए शुक्रिया,

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