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प्रेम ...

अनुपम आभास की
अदृश्य शक्ति का
चिर जीवित
अहसास है
प्रेम

मौन बंधनों से
उन्मुक्त उन्माद की
अनबुझ प्यास है
प्रेम

संवादहीन शब्दों की
अव्यक्त अभिव्यक्ति
का असीमित
उल्लास है
प्रेम

निःशब्द शब्दों को
भावों की लहरों पर
मुखरित करने का
आधार है
प्रेम

अपूर्णता को
पूर्णता में परिवर्तित कर
अंतस को
मधु शृंगार से सृजित कर
प्रेमासक्ति की अभिव्यक्ति का
अनुपम उपहार है
प्रेम

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 653

Comment

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Comment by Sushil Sarna on July 8, 2017 at 9:36pm

आदरणीय  narendrasinh chauhan साहिब सृजन को अपनी मधुर प्रशंसा से अलंकृत करने का दिल से आभार। 

Comment by narendrasinh chauhan on July 8, 2017 at 4:26pm

बहोत  भाव पूर्ण रचना 

Comment by Sushil Sarna on July 8, 2017 at 1:53pm

आदरणीया डॉ प्राची सिंह जी सृजन के भावों को आत्मीय स्नेह से अलंकृत करने का हार्दिक आभार। 

Comment by Sushil Sarna on July 8, 2017 at 1:52pm

आदरणीय विजय निकोर साहिब सृजन को अपनी मधुर प्रशंसा से अलंकृत करने का दिल से आभार। 

Comment by Sushil Sarna on July 8, 2017 at 1:51pm

आदरणीय समर कबीर साहिब आदाब , सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का दिल से आभार। 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on July 7, 2017 at 3:09pm

प्रेम के सूक्ष्म भावों को थाम कर बहुत खूबसूरती से अभिव्यक्त किया है आपने इस प्रस्तुति में आ० सुशील जी 

बहुत बहुत बधाई 

Comment by vijay nikore on July 7, 2017 at 12:37pm

प्रेम सूक्षम है, और किसी भी सूक्षम को अनुभव कर सकते हैं, परन्तु उसे परिभाषित करना कठिन है। आपने इस कठिन कार्य को बहुत अच्छा निभाया है, आदरणीय सुशील जी।

Comment by Samar kabeer on July 5, 2017 at 6:15pm
जनाब सुशील सरना जी आदाब,प्रेम को अलग अलग तरीक़े से बहुत ख़ूबी के साथ पेश किया है आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।
Comment by Sushil Sarna on July 5, 2017 at 1:59pm

आदरणीय मो.आरिफ साहिब सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का हार्दिक आभार।

Comment by Mohammed Arif on July 5, 2017 at 11:48am
आदरणीय सुशील सरना जी आदाब,प्रेम की बहुत ही सुंदर अभिव्यक्ति ।प्रेम को जितना परिभाषित किया जाय कम है । प्रेम अपरिभाषित छंद है । प्रेम आत्मा का दोहा है । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।

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