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गजल(जब हवा बदली हुई है)

2122 2122
जब हवा बदली हुई है
साँस उनकी क्यूँ थमी है?1

अश्क के थे रश्कजादे
अब नजर में क्यूँ नमी है?2

क्या हुआ अबतक पता सब
ढूँढ़ ली जाती कमी है।3

ओहदे सेवा की' सूरत
शोहदों का सच यही है।4

आसमां भर तार माफिक
आरजू होती रही है।5

जो किया जाता रहा तब
लग रहा था सच वही है।6

जो सँजोये धन चुराकर
खुल रही उनकी बही है।7
@मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by Mohammed Arif on March 29, 2017 at 6:59pm
आदरणीय मनन कुमार जी आदाब, शानदार ग़ज़ल ।शेर दर शेर दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल करें ।
Comment by नाथ सोनांचली on March 29, 2017 at 4:51pm
जनाब मनन कुमार सिंह जी सादर अभिवादन, अच्छी ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।
Comment by Samar kabeer on March 29, 2017 at 2:35pm
जनाब मनन कुमार सिंह जी आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।

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