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डिजिटल स्ट्रेन्थ़ (लघुकथा) /शेख़ शहज़ाद उस्मानी

पार्क में योग करने के पश्चात जोशी जी मेहता बाबू के बगल में बैठते हुए बोले- "भैया, इस क़ुदरती माहौल में योग करके तो धन्य हो गया! बीमारियों से मुक्ति पा कर ख़ुद को जवां सा महसूस करता हूँ!"

"हाँ जोशी जी, सुबह-शाम यहाँ आ कर मैं भी एक अद्भुत शक्ति हासिल कर तनाव मुक्त हो जाता हूँ!"

फिर पास ही बैठे ,स्मार्ट फ़ोनों पर आँखें गढ़ाये दो युवकों की तरफ़ देख कर वे बोले- "तरस तो इन पर आता है कि इन पर अद्भुत बुढ़ापा आ रहा है!"

"बुढ़ापा!"

"हाँ बुढ़ापा ! कम उम्र में शक्ति और बुद्धि का ह्रास! डिजिटल स्ट्रेन्थ ने इनकी शारीरिक और मानसिक शक्ति क्षीण कर दी है!" मेहता बाबू ने अपने सिर के पास तर्जनी घुमाते हुए कहा- "देखिये इनकी बुद्धि! प्रकृति के नज़दीक़ होते हुए भी फोटो उतारकर डिजिटल तस्वीरें देख कर ख़ुश हो रहे हैं! न योग और न कोई व्यायाम, बस मोबाइल से काम!"

"भैया, अपने स्वामी विवेकानंद जी ने देश के युवाओं में मौजूद जिस शक्ति की बात कही थी न, वह डिजिटल हो गई है....और परदेसी भी!" -जोशी जी ने ज़ोर से हँसते हुए कहा।

युवक वहां से उठकर दूसरी तरफ़ चले गए।


(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment by Sheikh Shahzad Usmani on June 29, 2017 at 6:33am
मेरी इस लघुकथा के अनुमोदन व हौसला अफजाई के लिए सादर हार्दिक धन्यवाद आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी व आदरणीय गिरिराज भंडारी जी।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on January 25, 2017 at 12:24am

आदरणीय उस्मानी जी, अपने शीर्षक को सार्थक करती बढ़िया लघुकथा लिखी है आपने. हार्दिक बधाई. सादर 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 24, 2017 at 9:25pm

आ. शेख शहज़ाद भाई , अच्छी लगी आपकी लघुकथा  , हार्दिक बधाइयाँ आपको ।

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on January 24, 2017 at 6:27pm
बहुत बहुत शुक्रिया मोहतरमा सीमा मिश्र साहिबा रचना के अवलोकन व हौसला अफ़ज़ाई हेतु।
Comment by Sheikh Shahzad Usmani on January 22, 2017 at 9:23pm
आपकी हौसला अफ़ज़ाई बेहतर लिखने की प्रेरणा देती है। तहे दिल से बहुत बहुत शुक्रिया मोहतरम जनाब समर कबीर साहब।
Comment by Samar kabeer on January 22, 2017 at 1:54pm
जनाब शैख़ शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,बढ़िया लघुकथा लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर दिल से बधाई स्वीकार करें ।
Comment by Sheikh Shahzad Usmani on January 21, 2017 at 3:36pm
मैं अपनी टिप्पणी को एडिट करता हूँ तो पिछली टिप्पणियाँ भी डिलीट हो जाती हैं। कृपया मंच संचालक महोदय मार्गदर्शन करें, क्या त्रुटि या तकनीकी गड़बड़ी हुई है। यहाँ आदरणीय डॉ. आशुतोष मिश्रा जी की टिप्पणी स्वतः डिलीट हो गई, जबकि मैं अपनी टिप्पणी डिलीट कर संशोधित कर रहा था!
Comment by Sheikh Shahzad Usmani on January 21, 2017 at 3:33pm
मेरी इस ब्लोग पोस्ट पर समय देकर अनुमोदन करने व हौसला अफ़ज़ाई हेतु सादर हार्दिक धन्यवाद आदरणीय डॉ. आशुतोष मिश्रा जी। पहले मैं यह सोच रहा था कि इस लघुकथा को ओबीओ गोष्ठी-22 के विषय- 'ढहते क़िले का दर्द' के तहत प्रस्तुत करूँ!

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