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फूलों को प्यार से सुनाती है प्रेम धुन

उन्हीं पर लुटाती अपना सर्वस्य जीवन

बदले में फूलों को देती है नया जीवन

निभाते हैं रिश्ता ये दोनों सारा जीवन ॥

जो फूल हमारे जीवन लाते हैं खुशियाँ

मिटा देते गम भर देते हैं सारी खुशियाँ

भौरें और तितलियाँ बजाती हैं तालियाँ

बदले में जीवन भर करते हैं रंगरेलियाँ ॥

हम इंसानों को नहीं है जरा भी शरम

हम इन फूलों के प्रति कितने बेरहम

फूल तो क्या !कलियों पर नहीं रहम

कहीं भगवान के नाम पर करते जुल्म ॥   

हम उन्हें खिलने से पहले लेते हैं तोड़

अपने परलोक के लालच में हाथ जोड़

तोड़ डाली से कहीं मंदिर में देते छोड़

पराग तो क्या,ज़िंदगी हम देते हैं मोड ॥

मौलिक एवं अप्रकाशित 

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Comment

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Comment by Ram Ashery on February 24, 2017 at 4:14pm

श्री मान भण्डारी जी आपको हृदय से आभार आपका सुझाव मैं ध्यान में रखूँगा 

Comment by Ram Ashery on February 24, 2017 at 4:14pm

श्री मान भण्डारी जी आपको हृदय से आभार आपका सुझाव मैं ध्यान में रखूँगा 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 24, 2017 at 9:31pm

आदरणीय राम आश्रय भाई , अच्छी लगी आपकी रचना , हार्दिक बधाइयाँ ! मात्राओं और कलों का निर्वहन न हो पाने से पंक्तियाँ गद्य सी लगतीं है , मुझे लगता है इस ओर ध्यान दिया जाना चाहिये , ता कि पद्य , पद्य जैसे लगे ।

Comment by नाथ सोनांचली on January 23, 2017 at 8:57am
आदरणीय राम आश्रय जी सादर अभिवादन, अच्छी कविता सृजन के लिए बधाई
Comment by Mohammed Arif on January 22, 2017 at 10:55pm
जनाब राम आश्रयजी, अच्छी कविता । बधाई स्वीकार करें ।
Comment by Ram Ashery on January 22, 2017 at 7:27pm

श्री मान जी आपके इस प्रोत्साहन युक्त शब्दों  के लिए आपको मेरा हृदय से आभार 

Comment by Samar kabeer on January 22, 2017 at 1:48pm
जनाब राम आश्रय जी आदाब,अच्छी कविता है, बधाई स्वीकार करें ।

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