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ग़ज़ल ( जादूगरी हो गयी )

फाइलुन -फाइलुन -फाइलुन -फाइलुन

आँखों आँखों में जादूगरी हो गयी | 
उसका मैं हो गया वह मेरी हो गयी |

उनकाअहसास महफ़िल में उसदम हुआ 
यक बयक जब वहाँ रोशनी हो गयी |

फ़ायदा तो उठाएगा इस का जहाँ 
आपसी प्यार में गर कमी हो गयी |

कोई अपनी कमी को नहीं देखता 
क़ौल सबका है दुनिया बुरी हो गयी|

आगये वक़्तेआख़िर इयादत को वह 
पूरी ख्वाहिश मेरी आख़िरी हो गयी |

वक़्त आया है जिस दिन से मेरा बुरा 
हर शनासा नज़र अजनबी हो गयी |

मिलगयी उनकी तस्दीक़ उलफत मगर 
दोस्तों से मेरी दुश्मनी हो गयी |

(मौलिक व अप्रकाशित )

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Comment by Tasdiq Ahmed Khan on November 13, 2016 at 9:41pm
मोहतरम जनाब गुर परीत साहिब, हौसला अफजाई का शुकरिया
Comment by Gurpreet Singh jammu on November 2, 2016 at 10:25am

वाह वाह जनाब तस्दीक़ अहमद ख़ान जी , बहुत ही बढ़िया ग़ज़ल, बहुत पसंद आई. सारे अश्आर एक से बढ़कर एक.

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on October 31, 2016 at 8:52pm

जनाब रामबली साहिब , ग़ज़ल में शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया ---

Comment by रामबली गुप्ता on October 31, 2016 at 8:31pm
वाह वाह आद0 तस्दीक भाई जी सुंदर ग़ज़ल कही आपने। दिल से बधाई लीजिये।
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on October 31, 2016 at 10:57am

मोहतरम जनाब शेख शहज़ाद उस्मानी साहिब , ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी ---

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on October 31, 2016 at 10:52am
हक़ीक़त बयान करती बेहतरीन दिलचस्प ग़ज़ल के लिए तहे दिल से बहुत बहुत मुबारकबाद मोहतरम जनाब तस्दीक़ अहमद ख़ान साहब। शॉर्ट एंड स्वीट सटीक!!!
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on October 31, 2016 at 9:09am

मोहतरम जनाब समर कबीर साहिब आदाब ,  ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी ---

Comment by Samar kabeer on October 30, 2016 at 9:42pm
जनाब तस्दीक़ अहमद साहिब आदाब,उम्दा ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं ।

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