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ग़ज़ल ....हर सू तुम्हारा नाम है आ जाइये

2212       2212      2212

ढलती सुहानी शाम है आ जाइये 
हर सू तुम्हारा नाम है आ जाइये

ये वादियाँ ये खुश्बुएं हैरान हैं 
हर फूल पे इल्जाम है आ जाइये

कैसी चुभन है ये दिले नासाज़ की
दिल टूटना तो आम है आ जाइये

उजड़ा हुआ है मुद्दतों से आशियाँ
सूनी तभी से बाम है आ जाइये

नासूर बन जो रूह पे आयद हुआ 
उस ज़ख्म का पैगाम है आ जाइये

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

©बृजेश कुमार 'ब्रज'

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Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on October 12, 2016 at 10:19pm

हार्दिक अभिनंदन एवं आभार आदरणिया  Alka Changa  जी

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on October 12, 2016 at 10:18pm

हार्दिक आभार आदरणीय  Ravi Shukla जी आदरणीय  शिज्जु "शकूर" जी के कहे अनुसार सुधार किया है

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on October 12, 2016 at 10:16pm

आपके अमूल्य  समय एवं सुंदर शब्दों के लिए ह्रदय से अभारी हूँ आदरणिया KALPANA BHATT  जी

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on October 12, 2016 at 10:09pm

आपके अमूल्य  समय के लिए ह्रदय से अभारी हूँ आदरणीय  सतविन्द्र कुमार जी

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on October 12, 2016 at 10:07pm

सार्थक समीक्षा के लिए आपका हार्दिक आभार आदरणीय  शिज्जु "शकूर" जी सुधार किया है....

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on October 12, 2016 at 10:05pm

उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार  Manoj kumar Ahsaas जी

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on October 12, 2016 at 10:04pm

रचना पटल पे आपका हार्दिक अभिनंदन एवं आभार आदरणीय  PRAMOD SRIVASTAVA जी

Comment by अलका 'कृष्णांशी' on October 7, 2016 at 8:02pm

बहुत  बढि़या  ग़ज़ल हुई है आदरणीय बृजेश कुमार ब्रज जी हार्दिक बधाई 

Comment by Ravi Shukla on October 6, 2016 at 5:19pm

आदरणीय ब्रजेश जी बढि़या गजल कही है बधाई । आदरणीय शिज्‍जु की बात से सहमत है हम भी । 

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on October 5, 2016 at 7:39pm

बहुत सुंदर ग़ज़ल हुई है आदरणीय बृजेश कुमार ब्रज जी | हार्दिक बधाई |

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