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ग़ज़ल- दर्द की क्या कहूँ ये धडकन है

२१२२ १२१२ २२
दर्द की क्या कहूँ ये धडकन है।
दिल में घर है जिगर में आँगन है।

तुम न समझो तो क्या करे कोई।
मेरे मन में तुम्हारी उलझन है।

तुम जमाने की सुन के मत रूठो।
ये जमाना तो सिर्फ दुश्मन है।

क्या अजब रोग है मुहब्बत भी।
दिल की राहत ही दिल की तडपन है।

इसमें उसकी खता नहीं ' राहुल' ।
मेरी किस्मत की मुझसे अनबन है।

मौलिक व अप्रकाशित ।

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Comment by Rahul Dangi Panchal on June 12, 2016 at 4:52pm
शुक्रिया बृजेश कुमार 'ब्रज' भाई जी
Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on June 12, 2016 at 4:49pm

खूबसूरत अहसास 

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