For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

जब से पिया गए परदेस ...


जब से पिया गए परदेस ...

प्रेम हीन अब
इस जीवन में
कुछ भी नहीं है शेष
जब से पिया गए परदेस//

नयन घट
सब सूख गए
बिखरे घन से केश
जब से पिया गए परदेस//

दर्पण सूना
हुआ शृंगार से
सूना हिया का देस
जब से पिया गए परदेस//

लगे दंश से
बीते मधुपल
दीप जलें अशेष
जब से पिया गए परदेस//

बिरहन का तो
हर पल सूना
रहे अश्रु न शेष
जब से पिया गए परदेस//

क्षणिक संचय
प्रेम क्षणों का
बना श्वासों का देस
जब से पिया गए प्रदेश//

स्मृति अमृत
वो निस्सीम नेह का
बना जीवन सुधा विशेष
जब से पिया गए परदेस//


सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 865

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Sushil Sarna on May 6, 2016 at 2:19pm

आदरणीय रामबली गुप्ता जी प्रस्तुति में निहित भावों को आपकी आत्मीय प्रशंसा ने जो मान दिया है उसके लिए आपके तहे दिल से शुक्रिया। 

Comment by रामबली गुप्ता on May 6, 2016 at 4:54am
क्या बात है आदरणीय सुशील सरना जी जबरदस्त प्रस्तुति। आनंद आ गया सच में।
Comment by Sushil Sarna on May 5, 2016 at 7:31pm

आदरणीय डॉ. गोपाल नारायन  श्रीवास्तव जी प्रस्तुति में निहित भावों को मान देने का दिल से आभार। 

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on May 5, 2016 at 4:12pm
सुन्दर रचना आदरणीय सरना जी .
Comment by Sushil Sarna on May 4, 2016 at 7:18pm

आदरणीया   KALPANA BHATT    जी प्रस्तुति पर आपकी स्नेहिल प्रशंसा का हार्दिक आभार। 

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on May 4, 2016 at 2:44pm

वाह | बेहद सुंदर रचना | बधाई स्वीकारें आदरणीय सुनील सरना सर | 

Comment by Sushil Sarna on May 3, 2016 at 5:55pm

आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी प्रत्युत्तर के लिए हार्दिक आभार। सर इसका ज्ञान तो है मुझे पर इस पर एडिटिंग करते ही पोस्ट पुनः लाइन में लग जाती है। शायद कमेंट्स भी डिलीट हो जाते हैं इसीलिये मैंने ये बात कही थी। फिर भी सुझाव के लिए हार्दिक आभार। 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on May 3, 2016 at 5:16pm

आदरणीय सुशील सरना सर, मेरे कहे को मान देने के लिए हार्दिक आभार.  पटल पर एडिटिंग संभव है बस आप इसी पृष्ठ पर ऊपर दिख रहे आप्शन को क्लिक कीजिये एडिटिंग के लिए आप्शन आ जायेगा -

Comment by Sushil Sarna on May 3, 2016 at 5:01pm

आदरणीय तेजवीर  सिंह जी रचना को आत्मीय मान देने का हार्दिक आभार। 

Comment by Sushil Sarna on May 3, 2016 at 5:00pm

आदरणीय मिथिलेश वमनकर जी प्रस्तुति में निहित भावों को इतना मान देने के लिए आपके दिल की असीम गहराईयों से हार्दिक आभार। आपके द्वारा रचना का संशोधित रूप भी मन को बहुत भाया। पटल पर तो एडिटिंग संभव नहीं लेकिन मैं इसे अपने  मूल सृजन में अवशय अपनाऊंगा। आपकी इस नेह का दिल से आभार सर। 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा एकादश. . . . . पतंग

मकर संक्रांति के अवसर परदोहा एकादश   . . . . पतंगआवारा मदमस्त सी, नभ में उड़े पतंग । बीच पतंगों के…See More
yesterday
Admin posted discussions
Tuesday
Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 175

 आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
Tuesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey posted a blog post

नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ

   जिस-जिस की सामर्थ्य रही है धौंस उसी की एक सदा से  एक कहावत रही चलन में भैंस उसीकी जिसकी लाठी…See More
Tuesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आपने कहे को सस्वर किया इस हेतु धन्यवाद, आदरणीय  //*फिर को क्यों करने से "क्यों "…"
Tuesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"रचना को आपने अनुमोदित कर मेरा उत्साहवर्धन किया, आदरणीय विजत निकोर जी हार्दिक आभार .. "
Tuesday
Sushil Sarna commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"आदरणीय जी सादर प्रणाम -  अद्भुत सृजन - हृदय तटों को छूती गहन भावों की अभिव्यक्ति ने अहसासों की…"
Tuesday
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"प्रिय अशोक कुमार जी,रचना को मान देने के लिए हार्दिक आभार। -- विजय"
Monday
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"नमस्ते, सौरभ जी। आपने सही कहा.. मेरा यहाँ आना कठिन हो गया था।       …"
Monday
vijay nikore commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"प्रिय सौरभ भाई, नमस्ते।आपका यह नवगीत अनोल्हा है। कई बार पढ़ा, निहित भावना को मन में गहरे उतारा।…"
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और विस्तृत टिप्पणी से मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार।…"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
Saturday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service