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१-   अच्छे दिन !

सुबह-शाम !

घर-चौबारे आशंकित

प्रतीक्षारत सहेजते हैं...

दीप-बाती और तेल

आक्रोशित तम व्यग्रतावश बिखेर देता

असंख्य नक्षत्र....

भद्रा से प्रभावित

आर्द्रा-रोहिणी

व्यथित कृष्ण-ध्रुव की राह तकती

चांद, बादलों के घात से दु:खी

हवायें दृश्य बदल देतीं

बसंत के इशारों पर पतझड़

होलिका दहन कर बिखेरते

रोशनी,  

चांदनी में लम्बी-लम्बी छाया...

ठूंठ वृक्ष,

नंगी टहनियां सब के सब...

खेलते रक्त की होली.

सुबह-शाम !

घर-चौबारे आशंकित

प्रतीक्षारत..

सहेजते दीप-बाती और.........!

२-   लक्ष्य...!

हाथों की रेखाएं भाग्यवश

टेढ़ी-मेढ़ी पगडण्डी पुरुषार्थ की

रोकतीं आलस्य

संगठित ऊंगलियां

इंकलाब की मुठ्ठी

तोड़ देतीं पैरों की जंजीरें

कर्म के पथ पर श्रम

कदमों से नाप लेते

लक्ष्य..!

 

रचनाकार....केवल प्रसाद सत्यम 

मौलिक व अप्रकाशित

Views: 1020

Comment

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Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on February 12, 2016 at 7:37pm

आ० सरना भाई जी व वामनकर भाई जी,  आप दोनों को ही रचना पर प्रसंशा एवं उत्साहवर्धन हेतु आपका हार्दिक आभार सहित बहुत-बहुत धन्यवाद. सादर

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on February 12, 2016 at 7:35pm

आ० शेख उस्मानी भाई जी रचना पर आपकी प्रसंशा एवं उत्साहवर्धन हेतु आपका तहेदिल शुक्रिया, आभार. सादर

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on February 12, 2016 at 7:34pm

आ० समर कबीर भाई जी आपकी प्रसंशा एवं उत्साहवर्धन हेतु आपका तहेदिल शुक्रिया, आभार. सादर


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on February 6, 2016 at 11:48pm

आदरणीय केवल प्रसाद जी गहन भावाभिव्यक्ति, इस शानदार प्रस्तुति के लिए आपको हार्दिक बधाई। 

Comment by Sushil Sarna on February 6, 2016 at 7:01pm

आदरणीय केवल प्रसाद सत्यम जी गहन भावों को समेटे आपकी इस दिलकश प्रस्तुति के लिए आपको हार्दिक बधाई। 

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on February 6, 2016 at 6:17pm
बेहतरीन शब्द चयन के साथ कम शब्दों में गहरी बातें कहते हुए बढ़िया रचना के सृजन के लिए तहे दिल बहुत बहुत बधाई आपको आदरणीय केवल प्रसाद सत्यम जी।
Comment by Samar kabeer on February 6, 2016 at 2:15pm
जनाब केवल प्रसाद सत्यम जी आदाब,बहुत आच्छी लगी आपकी कविता,बधाई स्वीकार करें !

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