For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

प्रायश्चित - (लघुकथा ) –

 प्रायश्चित - (लघुकथा ) –

"जतिन, रेखा गर्भवती है"!

"वाह, बधाई ,यह तो खुशी की बात है"!

"जतिन,क्वारी लडकी का गर्भवती होना किस समाज में खुशी की बात होती है"!

"तुम किस की बात कर रही हो"!

"तुम अच्छी तरह जानते हो मैं किस की बात कर रही हूं!मैं मेरी छोटी बहिन रेखा की बात कर रही हूं"!

"ओह ,मैंने समझा कि तुम अपनी किसी सहेली की बात कर रही हो"!

"तुम जानते हो उसके गर्भ का जिम्मेवार कौन है"!

"नहीं,मैं कैसे जानूंगा"!

"अरे वाह,खुद की काली करतूत इतनी जल्दी भूल गये"!

"नीना ,यह क्या बकवास कर  रही हो"!

"जतिन, रेखा जब मेरी डिलीवरी के समय यहां आई थी,तब मेरे अस्पताल जाने पर, तुमने उसकी नादानी और अकेलेपन का भरपूर फ़ायदा उठाया था,मुझे तो सब कुछ उसी समय पता चल गया था,पर बात इतनी बढ जायेगी, यह नहीं सोचा था"!

"नीना, जो भी हुआ था, दौनों की सहमति से हुआ था"!

"मगर सज़ा तो उसे अकेले भोगनी पडेगी"!

"यह तो उसे पहले सोचना था"!

"मुझे मालूम था ,तुम ऐसा ही उत्तर दोगे,मॉ तो पापा की मौत पर पिछले साल ही ही टूट गयी थी,बची खुची क़सर इस खबर ने पूरी करदी, मॉ अस्पताल में है,मुझे जाना होगा,मॉ के पास, हमेशा के लिये "!

" क्या मतलब ,तुम कहना क्या चाहती हो"!

"जतिन, तुम्हारी भूल का प्रायश्चित मुझे करना होगा, सज़ा भी मैं ही भोगूंगी"!

"तुम्हारा इरादा क्या है"!

"मैं तुम्हें हमेशा के लिये छोड रही हूं, तुम्हें रेखा से शादी करनी होगी,मैं मेरी बच्ची के साथ मॉ के पास रहूंगी"!

“ये क्या मूर्खता पूर्ण बात कर रही हो"!

"तुम मूर्खता पूर्ण कार्य कर सकते हो, मैं उसका प्रायश्चित भी नहीं कर सकती"!

मौलिक व अप्रकाशित

Views: 878

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by TEJ VEER SINGH on November 17, 2015 at 9:28am

हार्दिक आभार आदरणीय राजेश कुमारी जी!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on November 16, 2015 at 6:35pm

बहुत अच्छी लघु कथा ,हार्दिक बधाई आ० तेजवीर सिंह जी |

Comment by Sushil Sarna on November 16, 2015 at 6:34pm

''तुम मूर्खता पूर्ण कार्य कर सकते हो, मैं उसका प्रायश्चित भी नहीं कर सकती"! इस झकझोरती पंचलाइन को समेटे बहुत सुंदर संदेशप्रद सामाजिक और साहसिक लघु कथा की प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें आदरणीय तेजवीर सिंह जी। 

Comment by TEJ VEER SINGH on November 16, 2015 at 11:23am

हार्दिक आभार आदरणीय लक्ष्मण रामानुज लडीवाला जी!लघुकथा पर आपके मन में इन प्रश्नों का आना स्वाभाविक है!लघुकथा में नायिका ने इतनी बडी घटना पर,  बिना कोई बबाल खडा किये, जो कठोर और अचंभित करने वाला क़दम उठाया है, उसे जतिन और रेखा को मज़बूरन स्वीकारना ही होगा!क्योंकि उनके पास भी इससे बेहतर अन्य कोई विकल्प है ही नहीं!सादर!

Comment by TEJ VEER SINGH on November 16, 2015 at 11:10am

हार्दिक आभार आदरणीय डॉ विजय शंकर जी!मैं आपके विचारों का स्वागत करता हूं!ऐसे मामलों में वास्तव में कोई भी समाधन संपूर्ण एवम सर्व मान्य नहीं होता!सर्वश्रेष्ठ विकल्प को ही मज़बूरन मान्यता देनी होती है,उसमें किसे संतोष मिलता है और किसे असंतोष,यह केवल मात्र भाग्य पर निर्भर है!सादर!

Comment by TEJ VEER SINGH on November 16, 2015 at 11:03am

हार्दिक आभार आदरणीय राहिला जी!

Comment by TEJ VEER SINGH on November 16, 2015 at 11:01am

हार्दिक आभार आदरणीय अर्चना त्रिपाठी जी!आप की बात बिलकुल सत्य है मगर इस तरह के हालात में परिवार के सामने जो भी सबसे  अच्छा विकल्प होता है ,मज़बूरन वही चुनना पडता है!क्योंकि ऐसे घरेलू मामलों परिवार कोई भी क़ानूनी कार्यवाही नहीं चाहता! सादर!

Comment by TEJ VEER SINGH on November 16, 2015 at 10:54am

हार्दिक आभार आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी!आपका लघुकथा को पसंद करना मेरे प्रयास को एक प्रमाण पत्र है!सादर!

Comment by TEJ VEER SINGH on November 16, 2015 at 10:51am

हार्दिक आभार आदरणीय शेख उस्मानी जी!इस तरह की घटना जब किसी परिवार में ,जाने अनजाने  हो जाती है तो वह एक भयंकर भूल साबित होती है!जिसके परिणाम उस परिवार के हर सदस्य को कमोवेश भोगने पडते हैं!जो सदस्य इस प्रकार की घटना से अनभिज्ञ/प्रथक होते हैं,उन्हें भी ऐसी घटनाओं के प्रभावों को भुगतना पडता है!परिवार की सुख और शांति के लिये किसी ना किसी को क़ुर्बानी देनी ही पडती है!सादर!

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on November 16, 2015 at 9:11am

अपनी छोटी बहन के लिए प्रायश्चित के  रूप में बड़ी बहन का त्याग करने का सुंदर सन्देश देती  लघु कथा | देखना यह भी है की क्या 

छोटी  बहन बड़ी बहन का त्याग स्वीकार  कर बड़ी बहन के संसार को उजड़ने देगी | क्या  छोटी बहन को जतिन स्वीकार करेगा और खुश रखेगा | या सब प्रश्न सोचने को मजबूर करते है | सुंदर लघु कथा  के  लिए बधाई सशरी  तेजवीर  सिंह  जी 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अब, जबकि यह लगभग स्पष्ट हो ही चुका है कि OBO की आगे चलने की संभावना नगण्य है और प्रबंधन इसे ऑफलाइन…"
7 hours ago
amita tiwari posted a blog post

बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें

बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें बेगुनाही और इन्साफ की बात क्यों सोचती हैं ये औरतें चुपचाप अहिल्या बन…See More
Friday
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post गर्भनाल कब कट पाती है किसी की
" मान्य,सौरभ पांडे जीआशीष यादव जी , , ह्रदय से आभारी हूँ. स्नेह बनाए रखियगा | सौरभ जी ने एक…"
Thursday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on amita tiwari's blog post बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें
"आदरणीया अमिताजी, तार्किकता को शाब्दिक कर तटस्थ सवालों की तर्ज में बाँधा जाना प्रस्तुति को रुचिकर…"
Thursday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, आपकी प्रस्तुति निखर कर सामने आयी है. सभी शेर के कथ्य सशक्त हैं और बरबस…"
Thursday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय नीलेश भाई, आपका स्वागत है.     करेला हो अथवा नीम, लाख कड़वे सही, लेकिन रुधिर…"
Thursday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय बाग़ी जी एवं कार्यकारिणी के सभी सदस्यगण !बहुत दुखद है कि स्थिथि बंद करने तक आ गयी है. आगे…"
Wednesday

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय अजय गुप्ता जी, आपकी भावनाओं और मंच के प्रति आपके जुड़ाव को शब्द-शब्द में महसूस किया जा सकता…"
Tuesday
amita tiwari and आशीष यादव are now friends
May 11
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post प्यादे मान लिये जाते हैं मात्र एक संख्या भर
"मान्यवर  सौरभ पांडे जी , सार्थक और विस्तृत टिप्पणी के लिए आभार."
May 11
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post भ्रम सिर्फ बारी का है
"आशीष यादव जी , मेरा संदेश आप तक पहुंचा ,प्रयास सफल हो गया .धन्यवाद.पर्यावरण को जितनी चुनौतियां आज…"
May 11
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय धामी जी सारगर्भित ग़ज़ल कही है...बहुत बहुत बधाई "
May 11

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service