For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

गजल- दिलबर का दीदार जिन्दगी

२२ २२ २२ २२

कहीं पे' ठण्डी' बयार जिन्दगी ।
कहीं लगे अंगार जिन्दगी ।।

पतझड और बहार जिन्दगी ।
सुख दुख का व्यापार जिन्दगी ।।

जाने कितने रंग से' खेलें।
होली का त्यौहार जिन्दगी ।।

नानी माँ की गोद में' है तो।
इमली,आम,अचार जिन्दगी ।।

इश्क के' मारों से जो पूछा।
दिलबर का दीदार जिन्दगी ।।

उनके होंटों के साहिल पर।
फूलों सी रसदार जिन्दगी ।।

कौन समझ पाया है इसको।
उलझन का संसार जिन्दगी ।।

कल राहुल फुटपाथ पे' देखी।
बेबस औ'र लाचार जिन्दगी ।।

मौलिक व अप्रकाशित

Views: 970

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 8, 2015 at 7:32pm

बढिया अभ्यास चल रहा है. मिले सुझाव पर ध्यान देते हुए आगे बढ़ें.

शुभेच्छाएँ

Comment by Rahul Dangi Panchal on July 5, 2015 at 10:09am
आदरणीय वीनस भाई जी मैं आगे से इस पर ध्यान रक्खूंगा। सादर
Comment by वीनस केसरी on July 5, 2015 at 1:54am

अच्छी ग़ज़ल हुई है
बधाई स्वीकारें


ध्यान दें कि,
विशेष ढंग से पढने पर ही मतला बा-बहर लगता है
पहला शेर होने के कारण पाठक को बहर के बारे में पता नहीं होता, इसलिए वो बिना मात्र किराए पढ़ेगा और आगे शेर में उसी लय से पढ़ेगा तो दिक्कत महसूस होगी
फिर वो पहले मिसरे की बहर समझने के लिए उसे अलग अलग तरह से गिरा कर पढने की कोशिश करेगा
इतने भर में तो पाठकीय जोश समाप्त हो जाता है

इसलिए कोशिश करनी चाहये कि मतला में मात्रा न गिराई जाए या कम से कम गिराई जाए
इस तरह बिलकुल न गिराई जाए कि लय को समझने में पाठक उलझ कर रह जाए

Comment by Rahul Dangi Panchal on July 3, 2015 at 7:30am
आदरणीय मिथिलेश वामनकर सर जी मैं शंका को स्पष्ट नहीं समझ पाया किस तरह की शंका क्या लय टूट रही है?
Comment by Rahul Dangi Panchal on July 3, 2015 at 7:29am
आदरणीय maharshi tripathi जी शुक्रिया

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on July 3, 2015 at 12:23am

आदरणीय राहुल भाई जी 

बढ़िया ग़ज़ल हुई है बधाई 

मतला को लेकर सशंकित हूँ 

सीधे सीधे चार चौकल बनते तो ग़ज़ल और निखर जाती.

Comment by maharshi tripathi on July 2, 2015 at 11:29pm

कल राहुल फुटपाथ पे' देखी।
बेबस औ'र लाचार जिन्दगी ।।,,,,,,,वाह ,,,बहुत खूब आ. Rahul Dangi  जी |

Comment by Rahul Dangi Panchal on July 2, 2015 at 9:57pm
आदरणीय MAHIMA SHREE जी बहुत बहुत शुक्रिया
Comment by Rahul Dangi Panchal on July 2, 2015 at 9:56pm
आदरणीय krishna mishra 'jaan'gorakhpuri जी शुक्रिया
Comment by MAHIMA SHREE on July 2, 2015 at 9:24pm

नानी माँ की गोद में' है तो।
इमली,आम,अचार जिन्दगी ।।....बेहद उम्दा

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178

आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
yesterday
amita tiwari posted a blog post

गर्भनाल कब कट पाती है किसी की

कहीं भी कोई भी माँ अमर तो नहीं होती एक दिन जाना होता ही है सब की माताओ को फिर भी जानते बूझते भी…See More
Tuesday
vijay nikore commented on Sushil Sarna's blog post दोहा दशम. . . . . उम्र
"भाई सुशील जी, सारे दोहे जीवन के यथार्थ में डूबे हुए हैं.. हार्दिक बधाई।"
Tuesday
vijay nikore posted a blog post

प्यार का पतझड़

एक दूसरे में आश्रय खोजतेभावनात्मक अवरोधों के दबाव मेंकभी ऐसा भी तो होता है ...समय समय से रूठ जाता…See More
Tuesday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"प्रारम्भ (दोहे) अंत भला तो सब भला, कहते  सब ये बात। क्या आवश्यक है नहीं, इक अच्छी…"
Sunday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"आदरणीय  जयहिंद रायपुरी जी अच्छा हायकू लिखा है आपने. किन्तु हायकू छोटी रचना है तो एक से अधिक…"
Sunday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"हाइकु प्रारंभ है तो अंत भी हुआ होगा मध्य में क्या था मौलिक एवं अप्रकाशित "
Saturday
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"स्वागतम"
Apr 11
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185

आदरणीय साहित्य प्रेमियो,जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
Apr 8
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद ' जी सादर अभिवादन प्रथम तो मैं क्षमाप्रार्थी हूँ देरी से आने की…"
Apr 7
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा दशम. . . . . उम्र

दोहा दशम् . . . . उम्रठहरी- ठहरी उम्र अब, करती एक सवाल ।कहाँ गई जब जिंदगी, रहती थी खुशहाल ।।यादों…See More
Apr 6
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय Jaihind Raipuri साहिब, नमस्कार। बढ़िया ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करें। /ये मेरा…"
Apr 3

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service