For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल : मारो बम गोली या पत्थर कलम नहीं मिटती

बह्र : २२ २२ २२ २२ २२ २२ २

 

माना मिट जाते हैं अक्षर कलम नहीं मिटती

मारो बम गोली या पत्थर कलम नहीं मिटती

 

जितने रोड़े आते उतना ज़्यादा चलती है

लुटकर, पिटकर, दबकर, घुटकर कलम नहीं मिटती

 

इसे मिटाने की कोशिश करते करते इक दिन

मिट जाते हैं सारे ख़ंजर कलम नहीं मिटती

 

पंडित, मुल्ला और पादरी सब मिट जाते हैं

मिट जाते मज़हब के दफ़्तर कलम नहीं मिटती

 

जब से कलम हुई पैदा सबने ये देखा है

ख़ुदा मिटा करते हैं अक़्सर कलम नहीं मिटती

-------

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Views: 996

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Hari Prakash Dubey on February 25, 2015 at 11:41pm

आदरणीय धर्मेन्द्र कुमार सिंह जी ,सुन्दर रचना है हार्दिक बधाई आपको !

Comment by ajay sharma on February 25, 2015 at 10:45pm

bahut hi khoobsoorat message aur rachnadharmita ka nirvah kiya hai ..apne ...vaise to comments ko manana aur na manna apka hi sarvadhikar hai aur ikska priyog kar apne apni rachne aur fiqr ko aur mazboot hi kiya hai .....

 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on February 25, 2015 at 9:02pm

आदरणीय धर्मेन्द्र जी, ग़ज़ल पर हार्दिक बधाई.... बाकी तो गुनिजन कह ही चुके है.... सादर 

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on February 25, 2015 at 8:01pm

गुरुजनों से अनुरोध है की इस संदर्भ में मार्गदर्शन करे...

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on February 25, 2015 at 8:00pm

मित्र धर्मेन्द्र जी...जैसा की मैंने पूर्व में ही कहा कि...आपका भाव मै समझता हूँ..आप जिन बातों का आप तर्क दे रहे है..वह भी एक तरह से ठीक है..पर गौर करें..दफ्तर वह जगह होती है जहा से काम-काज किया जाता है...इस रूप में सम्पूर्ण सृष्टि ईश्वर का घर भी हुयी और दफ्तर भी..इस संदर्भ में सोचिये..दूसरा ख़ुदा एक ही है,पर लिखने हमेशा बहुवचन ही लिखा जाता है..क्युकी वह सर्वस्त्र हैऔर सम्माननीय है !!आप रचना में आमूल-चूल परिवर्तन कर अपना दायित्व निभा सकते है..आगे आपकी मर्जी.

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on February 25, 2015 at 7:45pm

आ० धर्मेन्द्र जी

हम यहाँ विचार साझा करते हैं i द्वन्द नहीं करते i आप अपनी गजल के रचनाकार है i आपु इसे अपने ढंग से प्रतिष्ठित कर सकते है  i पर जब तक रचना में 'साधारणीकरण ' नहीं होगा आपकी स्थापना सर्वग्राह्य नहीं होगी i हमारे  जो विचार है उनसे आप सहमत और असहमत होने के लिए पूर्णतः स्वतंत्र है i पर यह हमेशा याद रखे यहाँ हम सब एक दूसरे  के अनुज है या अग्रज है  i  समरसता बनी रहनी चाहिए i ससम्मान i

Comment by Sushil Sarna on February 25, 2015 at 6:57pm

आदरणीय धर्मेन्द्र सिंह जी इस खूबसूरत ग़ज़ल की प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई।  बहुत ही खूबसूरत अशआर बने हैं।  भ्रम की स्थिति को आपने पूर्व स्पष्ट कर दिया है। पुनः हार्दिक बधाई। 

Comment by Nirmal Nadeem on February 25, 2015 at 6:09pm

Bahut Bahut shukriya janab.

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on February 25, 2015 at 5:59pm
निर्मल जी मेरी निम्नांकित टिप्पणी पढ़ लें, बात स्पष्ट हो जाएगी।
Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on February 25, 2015 at 5:58pm
शुक्रिया महर्षि जी

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"दुःखद"
Sep 29
Profile IconKamran Akmal and sushil yadav joined Open Books Online
Sep 24
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
Sep 22
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Sep 19
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Sep 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।"
Sep 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"आ.भाई विजय जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Sep 17
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"atyant dukahd "
Sep 11
जगदानन्द झा 'मनु' replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय, प्रणाम संगहि संग हार्दिक धन्यवाद। अपनेक मार्गदर्शन पाबि बहुत बेसी मोटिवेशन आ सीखक मिलैए…"
Sep 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय जगदानन्द झा मनु जी, अहाँ बड्ड नीक गजल पठेलियै. सबसे पहिल, त हम प्रयुक्त भेल बहरक विषय में…"
Aug 18
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत हरिगीतिका छंद पर आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सफल हुआ है. आपके…"
Aug 15
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी सादर, प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार.…"
Aug 15

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service