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ग़ज़ल .........;;;गुमनाम पिथौरागढ़ी

चादर झीनी देख कबीरा

मैली ओढ़ी देख कबीरा

जीना मरना सब साथ चले

काया साझी देख कबीरा

ईश भगत का रिश्ता ऐसा

भूखा रोटी देख कबीरा

ऊँच नीच का अंतर कैसा

काया माटी देख कबीरा

यम इक राजा मिलना चाहे

आत्मा रानी देख कबीरा

मौलिक व अप्रकाशित

गुमनाम पिथौरागढ़ी

आपके सुझाओं व समालोचना की प्रतीक्षा में ......

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Comment

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Comment by gumnaam pithoragarhi on January 26, 2015 at 11:02am

धन्यवाद सर सौरभ जी कोशिश लगातार जारी है ..... गिरिराज जी अच्छा लगता है जो आप लगातार कृपादृष्टि बनाए रखते हैं धन्यवाद ,,,,,,,,,,,,,


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 26, 2015 at 10:34am

बहुत सुन्दर गज़ल ! आदरणीय गुमनाम भाई बधाई ।


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on January 26, 2015 at 1:41am

ग़ज़ल पर दाद कुबूल कीजिये गमनाम भाई. वैसे कुछ मिसरों में प्रवाह को और सरस होना था.

लेकिन बेहतर प्रयास हुआ है.

Comment by gumnaam pithoragarhi on January 25, 2015 at 10:15pm

धन्यवाद दोस्तो आपकी सराहना का धन्यवाद ,,,,,,,,,,,,,,,,,


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on January 25, 2015 at 2:40pm

वाह वाह, बहुत खूब, दाद कुबूल करें आदरणीय "गुमनाम" जी.

Comment by Hari Prakash Dubey on January 24, 2015 at 7:33pm

आदरणीय गुमनाम पिथौरागढ़ी जी सुन्दर रचना ...

ईश भगत का रिश्ता ऐसा

भूखा रोटी देख कबीरा......वाह ..बधाई !

Comment by Sushil Sarna on January 24, 2015 at 7:21pm

चादर झीनी देख कबीरा
मैली ओढ़ी देख कबीरा
जीना मरना सब साथ चले
काया साझी देख कबीरा

आदरणीय बस हम तो इस प्रस्तुति को शानदार शानदार शानदार ही कहेंगे … हार्दिक बधाई

Comment by Rahul Dangi Panchal on January 24, 2015 at 6:39pm
आदरणीय गुमनाम जी सादर बधाई ! सुन्दर गजल हुई है!
Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on January 24, 2015 at 1:10pm

वाह कबीरा ----- गुमनाम जी बहुत सुन्दर i

Comment by gumnaam pithoragarhi on January 24, 2015 at 10:03am

मिथिलेश जी विजय जी बहुत बहुत धन्यवाद आपने रचना को सराहा

कृपया ध्यान दे...

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