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साथ मेरे ज़िंदगी की …

साथ मेरे ज़िंदगी की …(एक रचना )

साथ  मेरे ज़िंदगी  की रूठी किताब रख देना
जलते चरागों में  बुझे  वो  लम्हात रख देना

रात भर सोती रही शबनम जिस आगोश में
रूठी बहारों में वो सूखा  इक गुलाब रख देना

कहते कहते रह गए  जो थरथराते से ये लब
साथ मेरी  धड़कनों  के वो जज़्बात रख देना

आज तक न दे सके जवाब जिन सवालों का
साथ मेरे  वो सिसकते कुछ जवाब रख देना

मिट गयी थी दूरियां  भीगी हुई जिस रात में
एक मुट्ठी  साथ  मेरे  वो  बरसात रख देना

तमाम शब  तन्हाई  में  जो  मेरे  करीब रहा
साथ मेरे वो  उदास  इक  माहताब रख देना

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment

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Comment by Sushil Sarna on January 3, 2015 at 2:09pm

आदरणीय जितेन्द्र पस्टारिया जी रचना पर आपकी उत्साहवर्धक प्रशंसा का हार्दिक आभार।आपको भी नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं। 

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on January 2, 2015 at 7:57pm

बहुत सुंदर रचना, आदरणीय शुशील जी. हार्दिक बधाई व् नववर्ष की शुभकामनायें स्वीकारें.

Comment by Sushil Sarna on January 2, 2015 at 3:18pm

आदरणीय  khursheed khairadi जी रचना पर आपकी उत्साहवर्धक प्रशंसा का हार्दिक आभार।

Comment by Sushil Sarna on January 2, 2015 at 3:18pm

आदरणीय  somesh kumar जी रचना पर आपकी उत्साहवर्धक प्रशंसा का हार्दिक आभार।

Comment by Sushil Sarna on January 2, 2015 at 3:17pm

आदरणीय  शिज्जु "शकूर" जी रचना पर आपकी उत्साहवर्धक प्रशंसा का हार्दिक आभार।

Comment by Sushil Sarna on January 2, 2015 at 3:17pm

आदरणीय   मिथिलेश वामनकर   जी रचना पर आपकी उत्साहवर्धक प्रशंसा का हार्दिक आभार।

Comment by Sushil Sarna on January 2, 2015 at 3:16pm

आदरणीय   Hari Prakash Dubey   जी रचना पर आपकी उत्साहवर्धक प्रशंसा का हार्दिक आभार।

Comment by Sushil Sarna on January 2, 2015 at 3:16pm

आदरणीय  SHARAD SINGH "VINOD"  जी रचना पर आपकी उत्साहवर्धक प्रशंसा का हार्दिक आभार।

Comment by Sushil Sarna on January 2, 2015 at 3:13pm

आदरणीय डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव    जी रचना पर आपकी उत्साहवर्धक प्रशंसा का हार्दिक आभार। 

Comment by khursheed khairadi on January 2, 2015 at 1:48pm

आज तक न दे सके जवाब जिन सवालों का 
साथ मेरे  वो सिसकते कुछ जवाब रख देना

मिट गयी थी दूरियां  भीगी हुई जिस रात में 
एक मुट्ठी  साथ  मेरे  वो  बरसात रख देना

आदरणीय सुशील सर सभी अशहार नायाब हुये हैं |सादर अभिनन्दन |

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