For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

दिल ये बेईमान सताता है.....................

दिल ये बेईमान सताता है
हर पल भटकना चाहता है
डोरी है प्यार की नाजुक सी
कच्ची है कह धमकाता है
हलकी सी भी हवा मिले तो 
हवा के संग बह जाता है


लग जाये ना गैरों की नजर
इस डर से छुपाकर रखा है
मैं लाख सम्हालूँ जतन करूँ
मुझको ही भ्रम दे जाता है


देखूं तो दुनिया फरेबी है
देता चाहतों का हवाला है
रस्मों का बड़ा सा ताला है
जिसे द्वार पे मैंने डाला है


लगती है आँच जमाने की
मैंने आँसुओं से पाला है
सूख रहे दिल के सोते
चाहतों का बोलबाला है


तेरे ही दिल के सागर में
मेरे प्यार का लंगर डाला है
दिल ये बेइमान सताता है
हर पल भटकना चाहता है    

@सरिता पन्थी

 "मौलिक व अप्रकाशित"

Views: 578

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Mohinder Kumar on November 7, 2014 at 4:07pm
मन चँचल मन बाँवरा, मन ठहरा चितचोर

मन की मति चलिये नहीँ पलक पलक मन और

पर कभी कभी मन को फेरा लगाने के लिये छोड देना चाहिये... लोट के तो घर ही आयेगा.

सुन्दर भाव भरी रचना
Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on November 6, 2014 at 8:18am

बहुत सुंदर भाव उभर कर आये, आपकी रचना में. बधाई आदरणीया सरिता जी

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on November 5, 2014 at 4:21pm

कविता  आपकी कोशिश बयां करती  है i यह कोशिश जारी रहे i  कवि धीरे-धीरे निखरता है i

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on November 4, 2014 at 12:30pm

सुंदर गीत रचना के लिए बधाई 

Comment by Shyam Narain Verma on November 4, 2014 at 11:16am

सुन्दर प्रस्तुति हार्दिक बधाई 

Comment by sarita panthi on November 4, 2014 at 8:28am

शुक्रिया सोमेश जी और सुशील जी मुझे आप सभी की संगत में काफी कुछ सिखने को मिलेगा ऐसी मेरी आशा है .

Comment by sarita panthi on November 4, 2014 at 8:26am

जी शुक्रिया प्रधान सम्पादक जी दिल तो बेईमान है पर दिमाग ने तो उसे लंगर लगाया हुआ है ये कहना चाहती थी शायद अच्छा नही बन पाया पर कोशिश करुँगी की और अच्छा बन सके 


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on November 3, 2014 at 3:02pm

गीत कहने का अच्छा प्रयास है. लेकिन जैसा कि आ० सुशील सरना जी ने भी कहा है कि यह प्रयास और बेहतर हो सकता था।  बहरहाल, प्रयासरत रहे और अभिनन्दन स्वीकार करें।

Comment by Sushil Sarna on November 3, 2014 at 1:04pm

आदरणीय सुंदर गीत और भी सुंदर हो सकता था। प्रयास के लिए बधाई और सोमेश जी से सहमत।

Comment by somesh kumar on November 3, 2014 at 7:38am

आप ने जिस भी अर्थ में लिखा हो पर ये कविता आप के विचारों का विरोध अंत में स्वयं करती है,दिल अगर बेईमान और आवारा है तो तेरे ही दिलके सागर में लंगर कैसे डाल सकता है ,मुझे यहाँ भ्रम लग रहा है ,पूरी रचना विषय के अनुकूल चलती है पर यहीं पर आकर अपने विरुद्ध हो रही है ,पर अगर आप को सही लग रही है तो कोई दिक्कत नहीं 
कोशिश के लिए बधाई |

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अशोक भाईजी धन्यवाद ... मेरा प्रयास  सफल हुआ।"
16 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"वाह वाह वाह !!! बहुत दिनों बाद ऐसी लाजवाब प्रतिक्रिया पढने में आई है। कांउटर अटैक ॥ हजारों धन्यवाद…"
16 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"  आदरणीय शेख शाहज़ाद उस्मानी जी सादर, सरकारी शालाओं की गलत परम्परा की ओर ध्यान आकृष्ट कराती…"
17 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"सार्थक है आपका सुझाव "
17 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदाब।‌ रचना पटल पर उपस्थिति और समीक्षाओं हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभा पाण्डेय जी। मेरी…"
17 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभाजी ।  इसमें कुछ कमी हो सकती है लेकिन इस प्रकार के आयोजन शहरों…"
17 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब सादर, बिना सोचे बोलने के परिणाम पर सुन्दर और संतुलित लघुकथा…"
17 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"अमराई में उत्सव छाया,कोयल को न्यौता भिजवाया। मौसम बदले कपड़े -लत्ते, लगे झूमने पत्ते-…"
17 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"ठण्ड गई तो फागुन आया। जन मानस में खुशियाँ लाया॥ आम  लगे सब हैं बौराने। पंछी गाते सुर में…"
17 hours ago
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"लघुकथा किसी विसंगति से उभरती है और अपने पीछे पाठको के पीछे एक प्रश्न छोड़ जाती है। सबकुछ खुलकर…"
17 hours ago
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अखिलेश जी स्वयं के प्रचार प्रसार के लिए इस तरह के प्रायोजित कार्यक्रमों का चलन साहित्य और…"
18 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"  जी ! //हापुस लँगड़ा नीलम केसर। आम सफेदा चौसा उस पर।।//... कुछ इस तरह किया जा सकता है.…"
18 hours ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service