For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

हमारी दिल परस्ती का

1222 1222 1222 1222

हमारी दिल परस्ती का वो ये ईनाम देता है ।
हमारे दिल के टुकडे कर हमेँ इल्जाम देता है ।

सयाना खुद को हमको नासमझ पागल समझता है ,
दगाओँ को सदा अपनी वफा का नाम देता है ।

हमारा दिल दुखाने की हदेँ सब तोड दी उसने ,
हमारे सामने गैरोँ का दामन थाम लेता है ।

कभी बसने नहीँ देता हमारी ख्वाहिशोँ का घर ,
इरादोँ को फकत अपने सदा अंजाम देता है ।

तरसती हूँ मै उसके प्यार के दो बोल की खातिर ,
जो चुभते हैँ मुझे ताने वो सुबहो शाम देता है ।

कि इतने पर भी मुझको देख उसका मुस्करा देना ,
मेरे बेचैन इस दिल को बहुत आराम देता है ।

मौलिक व अप्रकाशित
नीरज मिश्रा

Views: 679

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Santlal Karun on September 21, 2014 at 9:21pm

आदरणीय प्रेम जी,

इस सधी हुई ग़ज़ल के लिए हार्दिक साधुवाद एवं सद्भावनाएँ ! --

"हमारी दिल परस्ती का वो ये ईनाम देता है ।
हमारे दिल के टुकडे कर हमेँ इल्जाम देता है ।"

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on September 20, 2014 at 2:50pm

बहुत उम्दा गजल कही आपने i  बधाई हो i

Comment by Neeraj Nishchal on September 20, 2014 at 12:05am
आदरणीय विश्वकर्मा जी मै अभी इस काबिल नहीँ कि मै आपका knowledge बढा सकूँ , अभी तो बस इतना ही सँभव है कि मै आपके द्वारा अपने संशय मिटा सकूँ मै एक उदाहरण और पेश करना चाहूँगा तकाबुले रदीफ दोष को लेकर किसी शायर की गजल है

खुद अपने को ढूँढा था ।
मैने तुझे यूँ चाहा था ।
तू बिल्कुल वैसा निकला ,
जैसा मैने सोचा था ।
अपने जख्म दिखाता क्या ,
वो भी तो मुझ जैसा था ।
मेरा साथ वो क्या देता ,
वो खुद भीड मेँ तनहा था ।
मुझको मिला इक उम्र के बाद
जो मेरी उम्र का हिस्सा था ।
Comment by Ram Awadh VIshwakarma on September 19, 2014 at 10:21pm

आदरणीय
इस गजल में पहले दूसरे एवं तीसरे शेर में ‘के साथ’ रदीफ बनाकर गजल को कहा गया है। मेरी जानकारी के अनुसार पहला शेर मतला है दूसरा शेर हुसने मतला कहलाता है और तीसरी शेर भी हुसने मतला कहलायेगा इस लिये इसमें तकाबुले रदीफ का दोष नहीं है। अगर आपको इसके अतिरिक्त मालूम हो तो जरूर बतायें जिससे हमारा भी ज्ञान बढ़े।

Comment by Neeraj Nishchal on September 19, 2014 at 3:37pm

आदरणीय नरेंद्र जी बहुत बहुत आभार |

Comment by Neeraj Nishchal on September 19, 2014 at 3:37pm

आदरणीय विश्वकर्मा जी आप का बहुत आभार | तकाबुले रदीफ़ तो दोष मुझे भी पता है पर दूसरा वाला दोष मेरे संज्ञान मे नही है मै किसी की एक ग़ज़ल लिखता हूँ ज़रा बताइयेगा इसमें तकाबुले रदीफ़ कैसे नही है 

कुछ दिन कटे हैं गम मे तो कुछ दिन ख़ुशी के साथ |

होता रहा मज़ाक मेरी ज़िन्दगी के साथ |

एक हादसा है ये भी मेरी ज़िन्दगी के साथ |

मै किसी के साथ मेरा दिल किसी के साथ |

कुदरत ने क्या मज़ाक किया आदमी के साथ |

जीना ख़ुशी के साथ न मरना ख़ुशी के साथ |

किस मुहं से कोई अजमते आदम का नाम ले ,

जब आदमी फरेब करे आदमी के साथ |

Comment by Neeraj Nishchal on September 19, 2014 at 3:06pm

आदरणीय गिरिराज भंडारी जी बहुत बहुत आभार व्यक्त करता हूँ

Comment by Ram Awadh VIshwakarma on September 19, 2014 at 10:10am

आदरणीय मिश्रा जी बहुत सुन्दर गजल आपने कही इसके लिये आप को बधाई परन्तु मेरे ज्ञान के अनुसार गजल में दो दोष हैं
दूसरे शेर में तकाबुले रदीफ का और तीसरे शेर में रदीफ देता बदल कर लेता कर दिया है जो कि मेरे ज्ञान के अनुसार गलत है हो सकता है मैं गलत भी होऊँ। अच्छे शेरनिकालने के लिये बधाई।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on September 19, 2014 at 9:10am

बहुत बढ़िया ग़ज़ल कही है भाई नीरज जी , आपको दिली बधाइयाँ |

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . . प्यार

दोहा सप्तक. . . . प्यारप्यार, प्यार से माँगता, केवल निश्छल प्यार ।आपस का विश्वास ही, इसका है आधार…See More
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई चेतन जी, उत्साहवर्धन व स्नेह के लिए आभार।"
yesterday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय "
yesterday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ.लक्ष्मणसिह धानी, 'मुसाफिर' साहब  खूबसूरत विषयान्तर ग़ज़ल हुई  ! हार्दिक …"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर मुक्तक हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर गजल हुई है। हार्दिक बधाई।"
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"ग़ज़ल   बह्र ए मीर लगता था दिन रात सुनेगा सब के दिल की बात सुनेगा अपने जैसा लगता था…"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'

बदला ही राजनीति के अब है स्वभाव में आये कमी कहाँ  से  कहो  फिर दुराव में।१। * अवसर समानता का कहे…See More
Saturday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
" दोहा मुक्तक :  हिम्मत यदि करके कहूँ, उनसे दिल की बात  कि आज चौदह फरवरी, करो प्यार…"
Saturday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"दोहा एकादश. . . . . दिल दिल से दिल की कीजिये, दिल वाली वो बात । बीत न जाए व्यर्थ के, संवादों में…"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"गजल*****करता है कौन दिल से भला दिल की बात अबबनती कहाँ है दिल की दवा दिल की बात अब।१।*इक दौर वो…"
Saturday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service