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ग़ज़ल - अदावत भी हमी से, हमदमी भी ( गिरिराज भन्डारी )

1222     1222      122  ---  

कभी महसूस कर मेरी कमी भी

तेरी आँखों में हो थोड़ी नमी भी

 

नदी की धार सी पीड़ा बही, पर

किनारों के दिलों में क्या जमी भी ?

 

खुशी तो है उजालों की, मगर क्यों

कहीं बाक़ी दिखी है बरहमी* भी     ( खिन्नता )

 

उड़ाने आसमानी भी रखो पर

तुम्हे महसूस होती हो ज़मी भी

 

ये रिश्ता किस तरह का है बताओ ?

अदावत* भी हमी से, हमदमी भी       ( दुश्मनी )

 

उफ़क पे देख लाली है खुशी पर

हवायें लग रहीं हैं कुछ थमी भी  

 

मुझे अफ़सोस है सारे इरादे 

अभी कमज़ोर हैं, कुछ मौसमी भी

******************************** 

मौलिक एवँ अप्रकाशित

 

 

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 22, 2014 at 1:57pm

ये रिश्ता किस तरह का है बताओ ?

अदावत* भी हमी से, हमदमी भी       ( दुश्मनी )

 

उफ़क पे देख लाली है खुशी पर

हवायें लग रहीं हैं कुछ थमी भी  

 

मुझे अफ़सोस है सारे इरादे 

अभी कमज़ोर हैं, कुछ मौसमी भी------बहुत सुन्दर ग़ज़ल ये तीन अशआर तो बहुत ही खूबसूरत हैं तहे दिल से दाद कबूलिये आ० गिरिराज भंडारी जी 

Comment by G S MISHRA on July 22, 2014 at 10:44am

ये रिश्ता किस तरह का है बताओ ?

अदावत* भी हमी से, हमदमी भी  

आदरणीय गिरिराज जी, यह लाइन वाकई बहुत ही मार्मिक है बहुत बहुत बधाई आपको और खास कर इस लाइन के लिये उड़ाने आसमानी भी रखो पर
तुम्हे महसूस होती हो ज़मी भी  आपको तहे दिल से बधाई


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 21, 2014 at 2:07pm

आदरणीय जितेन्द्र भार , आपकी सलाह सर आखों पर , निकल ही लिया !! सराहना के लिये आपका हार्दिक आभार ॥


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 21, 2014 at 2:05pm

आदरणीय नादिर खान भाई , आपकी सरहना मेरा सँबल है , इस स्नेहिल सराहना के लिये आपका हार्दिक आभार ॥

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on July 21, 2014 at 1:01pm

ये रिश्ता किस तरह का है बताओ ?

अदावत* भी हमी से, हमदमी भी .............बस,,,बच निकलो

बहुत बढ़िया गजल आदरणीय गिरिराज जी, आपको हार्दिक बधाइयाँ

Comment by नादिर ख़ान on July 20, 2014 at 11:30pm

कभी महसूस कर मेरी कमी भी

तेरी आँखों में हो थोड़ी नमी भी

 

नदी की धार सी पीड़ा बही, पर

किनारों के दिलों में क्या जमी भी 

आदरणीय गिरिराज जी,  सीधे और सरल  शब्दों मे बहुत  प्यारी गज़ल कही आपने ..बहुत मुबारकबाद ...


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 20, 2014 at 9:39pm

आदरणीय बड़े भाई गोपाल जी , आपकी स्नेहिल प्रशंशा के लिये आपका हार्दिक आभार ॥


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 20, 2014 at 9:38pm

आदरणीया वेदिका जी , हौसला अफज़ाई के लिये आपका तहे दिल से शुक्रिया ॥


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 20, 2014 at 9:37pm

आदरणीय संतलाल भाई , आपकी स्नेहिल सराहना के लिये आपका हृदय से आभारी हूँ ॥

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on July 20, 2014 at 9:28pm

अति सुन्दर

मतले से ही -

कभी महसूस कर मेरी कमी भी

तेरी आँखों में हो थोड़ी नमी भी

 

कृपया ध्यान दे...

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