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ग़ज़ल - कोई तो मिल जाये जो ठहरा दिखाई दे ( गिरिराज भंडारी )

2122    2122     2122      2   

कोई तो मंज़र कभी अच्छा दिखाई दे

एक तो आदम कभी सच्चा दिखाई दे

 

आपा धापी से लगे हैं पस्त हर कोई

कोई तो मिल जाये जो ठहरा दिखाई दे

 

उथलों में कब ठहरा है बरसात का पानी

ढूँढता है ताल , जो गहरा दिखाई दे   

 

भावनायें गूंगी हो कोनों में हैं सिमटीं  

शब्द क़ैदी सा लगा, पहरा दिखाई दे 

 

कोयला जो राख के नीचे दबा था कल

ये हवा कैसी ? कि वो दहका दिखाई दे  

 

अब बहारों ने क़सम भी खाईं हैं , शायद

कल से कोई बाग़ अब महका दिखाई दे

 

आइनों ने इसलिये बदनामियाँ  झेलीं 

सामने जाओ, सही चहरा दिखाई दे  

*********************************** 

मौलिक एवँ अप्रकाशित

 

 

 

 

 

Views: 808

Comment

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 21, 2014 at 11:08pm

आदरनीय सौरभ भाई , आपकी स्नेहिल सराहना के लिये आपका आभारी हूँ ॥


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 21, 2014 at 11:06pm

कोयला जो राख के नीचे दबा था कल

ये हवा कैसी ? कि वो दहका दिखाई दे  .. बहुत खूब आदरणीय !

ग़ज़ल पर दिल से दाद कुबूल फ़रमायें.

सादर


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 19, 2014 at 8:54pm

आदरणीय जवाहर लाल भाई , ग़ज़ल की तारीफ कर उत्साह वर्धन करने के लिये आपका तहे दिल से शुक्रिया

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on July 19, 2014 at 8:45pm

उथलों में कब ठहरा है बरसात का पानी

ढूँढता है ताल , जो गहरा दिखाई दे 

बिलकुल सही कहा आपने! सादर!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 17, 2014 at 9:41pm

आदरणीया मंजरी जी , हौसला अफज़ाई के लिये आपका तहे दिल से शुक्रिया ॥


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 17, 2014 at 9:40pm

आदरनीय  यमित  भाई , गज़ल की सराहना के लिये आपका तहे दिल से शुक्रिया ॥

Comment by mrs manjari pandey on July 17, 2014 at 7:57pm
आदरणीय गिरिराज जी बेहतरीन ग़ज़ल को पढ़ने का लाभ हमें मिला। शुक्रिया इस प्रस्तुति के लिए
आपा धापी से लगे हैं पस्त हर कोई
कोई तो मिल जाये जो ठहरा दिखाई दे
भावनायें गूंगी हो कोनों में हैं सिमटीं
शब्द क़ैदी सा लगा, पहरा दिखाई दे
Comment by Zaif on July 17, 2014 at 6:17pm
कोई तो मंज़र कभी अच्छा दिखाई दे
एक तो आदम कभी सच्चा दिखाई दे
आपा धापी से लगे हैं पस्त हर कोई
कोई तो मिल जाये जो ठहरा दिखाई दे

वाह सर बहुत ख़ूब!!

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 17, 2014 at 3:45pm

आदरणीया वेदिका जी , ग़ज़ल की सराहना के लिए आपका तहे दिल से शुक्रिया ॥


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 17, 2014 at 3:44pm

आदरणीय  बड़े भाई , गोपाल जी , हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया ॥

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