For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

“ आज का मैच तो बड़ा रोमांचक है यार, बड़े जबर्दस्त फार्म में  है टीम...”

“अरे हाँ यार!   तेरे घर  तो मैच देखने का आनंद ही अलग है, पर यार ये अन्दर से कराहने की आवाज तेरी मम्मी की आ रही है क्या..?”

“ आने दे यार!  वो तो उनकी रोज की आदत है, बूढी जो हो गई है थोड़ी देर में सो जाएँगी. तू तो मैच देख  मैच”

 

              जितेन्द्र ’गीत’

      ( मौलिक व् अप्रकाशित )

Views: 914

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on July 6, 2014 at 10:14pm

रचना पर आपकी उपस्थिति का बड़ा बेसब्री से इन्तजार रहता है आदरणीय सौरभ जी. आपकी स्नेहिल प्रतिक्रिया हेतु आपका तहे दिल से आभारी हूँ .लघुकथा की सार्थकता, यहीं की संलग्नता और आप सभी अग्रजो के मार्गदर्शन का असर है .

सादर!


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 6, 2014 at 9:36pm

ग़ज़ब ! ग़ज़ब !

सबने अपनी-अपनी कह दी है..  हम चूँकि देर से आये हैं, सो अधिक नहीं कहेंगे.  बस इतना ही कि सतत संलग्नता और धैर्य के साथ होता हुआ रचनाकर्म क्या कुछ हो जाने का कारण होता है आपकी यह प्रस्तुति मुखर स्वर में कह रही है, भाई जितेन्द्रजी.

अतिशय बधाइयाँ .. हार्दिक शुभकामनाएँ

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on June 29, 2014 at 9:42am

आँखे तो सभी की खुली रहती है परन्तु सिर्फ स्वार्थ हेतु, क्या आशा की जाए ?  रचना पर आपकी उपस्थिति हेतु आपका ह्रदय से आभारी हूँ आदरणीय सुरेन्द्र जी. स्नेह बनाये रखियेगा

सादर!

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on June 28, 2014 at 4:37pm

प्रिय जितेंद्र भाई जबरदस्त लघु कथा। . आप की सोच की दाद देनी होगी एक करारा प्रहार आज के पंगु होते सामाजिक व्यवस्था पर। . काश संतान आँखें खोल सकें
जय श्री राधे
भ्रमर ५

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on June 28, 2014 at 9:05am

आपकी उत्साहवर्धक सराहना से बहुत मनोबल मिलता है, आपका ह्रदय से आभारी हूँ आदरणीय गिरिराज जी.स्नेह बनाये रखियेगा

सादर !


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 26, 2014 at 11:33pm

आदरणीय जितेंद्र भाई , बहुत ही कम शब्दों मे आपने एक महीन भाव को उजागर किया है  , बहुत बहुत बधाइयँ , लघुकथा के लिये ॥

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on June 26, 2014 at 11:10pm

आपकी सराहना पाकर मेरी रचना धन्य हो गई आदरणीय योगराज जी, आपकी बधाई सहर्ष शिरोधार्य है. अपना स्नेहिल मार्गदर्शन बनाये रखियेगा

सादर!


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on June 26, 2014 at 10:58am

सतही दृष्टि से आम से लगने वाले क्षणों को बहुत महीनता से बुना  है भाई जीतेन्द्र जी,  मेरी हार्दिक बधाई स्वीकारें।

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on June 26, 2014 at 10:49am

रचना पर आपकी उत्साहवर्धक सराहना से रचना को सार्थकता का प्रमाण मिलता है आदरणीया डा.प्राची जी, आपका ह्रदय से आभार

सादर!

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on June 26, 2014 at 10:46am

आदरणीय रवि जी, आपकी विस्तृत प्रतिक्रिया ने बहुत मनोबल दिया है. मैं जो कुछ भी लिखना सीखा हूँ यह सब ओ बी ओ का ही सानिध्य है.सच कहूँ तो कभी जीवन में नही सोचा था की मैं कभी कुछ लिख पाउँगा, यहाँ का अपनापन व् स्नेह से भरा मार्गदर्शन ही मुझे आज मेरी पहचान बता रहा है. आपने मुझे मित्र भी कह दिया तो फिर क्षमा की कोई बात ही नही. और इस दुनिया में बातों या विचारों से बुरा मानने वाला इंसान शायद सही निर्णय ही नही ले पाता. रचना पर आपके मार्गदर्शन से मुझे बहुत ख़ुशी मिली आपका ह्रदय से आभारी हूँ :))

सादर!

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन ।फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
6 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
9 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
12 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
12 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
16 hours ago
Sushil Sarna posted blog posts
yesterday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रामबली गुप्ता's blog post कर्मवीर
"कर्मवीरों के ऊपर आपकी छांदसिक अभिव्यक्ति का स्वागत है, आदरणीय रामबली गुप्त जी.  मनहरण…"
yesterday
Jaihind Raipuri posted a blog post

ग़ज़ल

2122    1212    22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत मेंक्या से क्या हो गए महब्बत में मैं ख़यालों में आ गया उस…See More
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Admin's group आंचलिक साहित्य
"कुंडलिया छत्तीसगढ़ी छत्तीसगढ़ी ह भाखा, सरल ऐकर बिधान सहजता से बोल सके, लइका अऊ सियान लइका अऊ…"
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . रिश्ते
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय "
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

तब मनुज देवता हो गया जान लो,- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२१२/२१२/२१२/२१२**अर्थ जो प्रेम का पढ़ सके आदमीएक उन्नत समय गढ़ सके आदमी।१।*आदमीयत जहाँ खूब महफूज होएक…See More
Monday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service