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बहार की व्यथा

अभी कुछ साल ही तो बीते हैं |
बसंत की तरह निरंतर प्रसन्नचित,
उजड़े चमन को भी खिला देने वाला मै,
साथ लिए चलता था सुरभित मलय पवनों को |

हर-एक गुलशन को चाहत थी मेरी,
मेरे स्पर्शों की, मेरे छुवन की |
हर कली मेरा स्पर्श पाकर फूल होना चाहती थी |
मै भी खुश होता, सबको खुश करता, आगे बढ़ जाता |

धीरे-धीरे सब कुछ बदला |
जगह, समाज, धर्म, मंदिर, मस्जिद,
मतलब सब कुछ |
तब मुझे दुःख नहीं हुआ |
मै क्या जानता था की इस जगह की बू इस कदर दूषित है |
धीरे-धीरे मेरी सुरभित गंध कब जहरीली गैस बनी,
इन्द्रधनुषी रंगों के बटवारों की भांति मै जान न सका,
कब बैगनी, कब नीला, कब हरा, नारंगी, लाल |

मेरा मन भी हर वस्तु की भाँति बदल गया |
खुशबू फैलाने की लालसा, इसकी भी जाती रही |
आज मै गुलशन खोजता फिर रहा हूँ |
कहीं कोई कली, कोई फूल नजर नहीं आते |
कोई कली मिले तो भी कुम्हला जाती है मेरे स्पर्श से |

मै कितना बदल चूका हूँ |
ये नयी जगह, नए लोग, प्रतिदिन सबकुछ नया |
पहले तो हर दिन और पुराना होता था|
ऐसे तो ख़त्म हो जाएगा गुलशन,
भाई चारे का, सौहार्द्र का |
फिर फूल कहाँ होंगे, कहाँ खिलेंगीं कलियाँ?
क्या ख़त्म हो जायेगी मेरे जैसी हर बहार?

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Comment

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Comment by आशीष यादव on November 24, 2010 at 7:40pm
aadarniy vivek sir, antim pankti me jo vyakaran sambandhi truti hai use mai jaanna chaahta hu. kripaya maargdarshan kare.
Comment by आशीष यादव on November 24, 2010 at 7:39pm
aap sabhi logo ko dhanyawaad mera utsahwardhan karne k liye.
Comment by विवेक मिश्र on November 24, 2010 at 12:34am
आशीष जी. आपकी रचनाओं में, हमेशा ही सुन्दर भाव होते हैं. बधाई.
अंतिम पंक्ति "क्या ख़त्म हो जायेगी मेरे जैसे हर बहार" में व्याकरण की दृष्टि से सुधार की आवश्यकता मालूम होती है.

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on November 21, 2010 at 5:48pm
आशीष बेहद विचारोतेजक रचना है यह, आप के बुलंद ख्याल का कोई मेल नहीं , साथ ही शारदा दीदी की रचना भी मनमोहक है |
कृपया निम्न लिंक जरूर देखे और अपना विचार रखे
http://www.openbooksonline.com/forum/topics/5170231:Topic:34997
Comment by Anupama on November 21, 2010 at 1:22pm
saarthk vicharpoorna rachna ke liye badhai!
Comment by Raju on November 21, 2010 at 1:06pm
kya baat hai bhai...........kya kahu mai........

कृपया ध्यान दे...

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