For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

पापा की लाडली .... मीना पाठक

मै अपने पापा 

की  लाडली 
उनकी ऊँगली 
पकड़   कर 
मचलती इठलाती 
थोड़ी ही दूर चली थी 
कि 
काल चक्र ने 
एक झटके से 
उनके हाथ से 
मेरी ऊँगली छुड़ा दी
 
अब मैं अकेली 
इस निर्जन 
बियावान जंगल 
में 

इधर - उधर 

भटकती   हूँ

एक सुरक्षा भरी 
छाँव  के  लिए 
जहाँ  बैठ  कर
मैं अपने आप को 
सुरक्षित महसूस 
करूँ 

जैसे अपने पापा 
की ऊँगली पकड़ कर 
अपने आप को 
सुरक्षित महसूस 
करती थी 

मैं 

अपने पापा की 

लाडली ।
  • मीना 

(चित्र-गूगल)

मौलिक व अप्रकाशित 

Views: 1031

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by vijay nikore on February 21, 2013 at 10:47am

आदरणीया मीना जी:

 

मैं आज ही बेटी के पास कुछ दिन बिता कर आया हूँ,

और मैं जानता हूँ कि यह रिश्ता कितना कोमल,

कितना प्यारा है ! इस विषय पर इस सुन्दर कविता

के लिए आपको बधाई।

 

विजय निकोर

Comment by Dr.Ajay Khare on February 20, 2013 at 3:09pm

MEENBA JI BADHAI SUNDER RACHNA

Comment by Rekha Joshi on February 20, 2013 at 12:57pm

सुन्दर भाव मीना जी,बहुत बहुत बधाई

Comment by भरत तिवारी (Bharat Tiwari) on February 20, 2013 at 9:51am

bahut sundar ....

Comment by ajay yadav on February 19, 2013 at 11:52pm

सुंदर भाव भरी रचना ...बधाई मीना जी |

Comment by Aarti Sharma on February 19, 2013 at 8:26pm

बहुत सुन्दर भाव मीना जी...बधाई स्वीकारें

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on February 19, 2013 at 7:50pm

वाह बहुत भावनात्मक रचना हुई है आदरणीया

बहुत बहुत बधाई इस हेतु


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on February 19, 2013 at 6:52pm

आपकी रचना ने अचानक वक्त से बहुत पीछॆ ढकेल दिया और मैं अपने पापा कि उँगली थामे चली जा रही हूँ ,फिर उनके कदम से कदम मिलाकर चल रही हूँ ,फिर उनसे आगे दौड़ रही हूँ ,बहुत आगे आकर पीछॆ मुड़कर देखती हूँ तो पापा जा चुके थे,और बस कुछ नही कह सकती इससे आगे ,बधाई आपको मीना जी 

Comment by बृजेश नीरज on February 19, 2013 at 6:36pm

पिता पुत्री का रिश्ता ही कुछ अनोखा होता है। 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on February 19, 2013 at 4:28pm

कितने महत्वपूर्ण भाव सांझा हुए है इस कविता में आदरणीया मीना जी, सच में पिता की अंगुली नें पूरे आवरण का एहसास करा दिया. पिता और पुत्री का रिश्ता कितना प्यारा होता है, उसे शब्दों में कितनी सुन्दरता से आपने बाँधा है, इस भाव सम्प्रेषण के लिए आपको बहुत बहुत बधाई . सादर.

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"                        सभी सदस्यों को…"
8 hours ago
Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"                 दिल लगाना नहीं कि तुम से कहें,  …"
8 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"इश्क़ तो है मगर ये इतनी भी शा'इराना नहीं कि तुझ से कहें साफ़ गोई सुनोगे क्या तुम ये अहमकाना…"
17 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"एक सप्ताह के लिए सभी चार आयोजन के द्वार खुल गए। अच्छी बात ये है कि यह एक प्रयोग है ..... लेकिन…"
yesterday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"चौपाई छंद ++++++++   ठंड गई तो फागुन आया। जन मानस में खुशियाँ लाया॥ आम  लगे सब हैं…"
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"सच फ़साना नहीं कि तुझ से कहें ये बहाना नहीं कि तुझ से कहें दिल अभी जाना नहीं कि तुझ से कहें ग़म…"
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"सादर अभिवादन "
yesterday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सभी की नमस्कार, यूँ तो आज आयोजन प्रारंभ ही हुए हैं और किसी प्रकार की टिप्पणी करना उचित नहीं है,…"
yesterday
Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"स्वागतम"
Tuesday
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"स्वागतम"
Tuesday
Admin replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"स्वागतम"
Tuesday
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-184
"स्वागतम"
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service