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गीत (टूटा सा ख्वाव हूँ)

टूटा सा ख्वाव हूँ (गीत)

पूछो न कोई मुझसे क्यों पीता शराब हूँ-2
अब किसको क्या पता मैं इक टूटा सा ख्वाव हूँ-2
--पूछो न कोई मुझसे क्यों पी----------

(1) 'दीपक' था नाम जलना था,जलते रहे ऐ-दिल-2
बुझने से पहले बेवफा इक बार आके मिल-2
देती है ताहने दुनियाँ क्या सचमुच ख़राब हूँ
अब किसको क्या पता मैं इक टूटा सा ख्वाव हूँ-२
--पूछो न कोई मुझसे क्यों पी----------

(2) दो घूँट पी लिए अगर यहाँ किसका क्या गया -2
अपनें,बेगाने सबके ही दिल से निकल गया -2
ग़म के खज़ाने कम नहीं,नाकामयाब हूँ
अब किसको क्या पता मैं इक टूटा सा ख्वाव हूँ-२
--पूछो न कोई मुझसे क्यों पी----------

(3 ) मेरी जिंदगी में हादसों का ऐसा हुआ असर-2
कल तक जो मेरे साथ था आया न वोह नज़र -2
मुझको लगा था दोस्तों मैं लाजवाब हूँ
अब किसको क्या पता मैं इक टूटा सा ख्वाव हूँ-2
--पूछो न कोई मुझसे क्यों पी----------

दीपक शर्मा 'कुल्लुवी'
01 -09 -12 .
09350078399

Views: 471

Comment

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Comment by Deepak Sharma Kuluvi on September 3, 2012 at 9:48am

धन्यवाद सौरभ पांडे जी,रेखा जी राजेश जी......

मेरे गीतों में दर्द तेरा है
चंद लफ़्ज़ों में अक्स तेरा है
तुझे भूल भी कैसे जाऊँ मैं
मीत न सही तू अधूरा गीत तो मेरा है .....?
मय के प्याले तो इक बहाना है
पी के कौन सा भूल जाना है ....?

दीपक कुल्लुवी


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on September 2, 2012 at 7:09pm

दीपक कुल्लुवी जी बहुत अच्छा गीत दिल को छू गया 

Comment by Rekha Joshi on September 2, 2012 at 6:50pm

दो घूँट पी लिए अगर यहाँ किसका क्या गया 
अपनें,बेगाने सबके ही दिल से निकल गया 
ग़म के खज़ाने कम नहीं,नाकामयाब हूँ 
अब किसको क्या पता मैं इक टूटा सा ख्वाव हूँ
--पूछो न कोई मुझसे क्यों पी-,अति सुंदर अभिव्यक्ति आदरणीय दीपक जी ,बधाई 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on September 1, 2012 at 10:53pm

बेहतर प्रयास किया है आपने दीपक जी.

बधाई.. .

Comment by Deepak Sharma Kuluvi on September 1, 2012 at 4:14pm

शुक्रिया बागी जी

यह आज ही लिखा कम्पोज़ भी कर लिया शाम को हरमोनियम पर निकालूँगा फिर कभी आपको सुनाऊंगा  ज़रूर I


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on September 1, 2012 at 2:45pm

मुझको लगा था दोस्तों मैं लाजवाब हूँ
अब किसको क्या पता मैं इक टूटा सा ख्वाव हूँ-2

वाह वाह कुलवी साहब, बहुत ही सुन्दर गीत प्रस्तुत किया है शानदार अभिव्यक्ति पर बधाई स्वीकार करें |

Comment by Deepak Sharma Kuluvi on September 1, 2012 at 12:29pm

मेरा दर्द भी सुन्दर लगता है मेरा ग़म भी सुंदर लगता है
हाल मेरा बेहाल है दोस्त तुम्हे यह भी सुन्दर लगता है

खैर.....शुक्रिया भाई फूल सिंह

Comment by PHOOL SINGH on September 1, 2012 at 12:21pm

शर्मा जी प्रणाम,

सर बहुत ही सुंदर गीत के लिए बधाई ...

फूल सिंह

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