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प्रेम रस का पान आओ फिर करें
सृष्टि का नव गान आओ फिर करें !
*
हम जले दावानलों से,
आँधियों से तुम बिखर।
आ गये  हैं  एक  जैसी,
भाग्य  की  बाँधी डगर।।
*
भूल कर  बीते  दुखों  के दर्द को
मोहिनी मुस्कान आओ फिर करें !
*
सोच मन पर क्या न बीती,
और  घायल  मन  न  कर।।
तय करें फिर साथ मिलकर,
जिन्दगी   का  यह  सफर।।
*
नव सृजन को पथ मिला साथी मिले
नीड़  का  निर्माण  आओ  फिर करें !
*
हम रहे साथी उपेक्षित,
लोक में  नित  खार से।
या मिली अवहेलना हो,
हर  डगर  हर  द्वार  से।।
*
द्वेष की रेखा मिटा मन से चलो
नेह का आह्वान आओ फिर करें!
*
रात सा दिन हो भले ही,
भोर  जैसी  आस  रख।।
बोलना मन से स्वयं के,
चुप अकेले मत बिलख।।
*
एक से बढ़ सौ हुए हम सून्य पा
लक्ष्य का संधान आओ फिर करें !
*
है मरण जीवन सदा से,
इस  जगत  में  राज ही।
राख से  उठना  हमें  यूँ,
है  स्वयं  की  आज  ही।।
*
प्रेम  ही  संजीवनी  हम  को  सुधा
पी इसे  अवदान  आओ फिर करें!

**
मौलिक/अप्रकाशित
लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

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Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on October 4, 2022 at 9:24am

आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन। गीत पर उपस्थितिऔर उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक आभार।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on October 4, 2022 at 9:22am

आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। गीत पर आपकी मनभावन प्रतिक्रिया से असीम उत्साहवर्धन हुआ है। स्नेह के लिए हार्दिक आभार।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on October 4, 2022 at 9:20am

आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन। आपको गीत पसन्द आया यह मेरे लिए सुखद अनुभूति है। स्नेह के लिए आभार।

Comment by Samar kabeer on September 23, 2022 at 7:46pm

जनाब लक्ष्मण धामी मुसाफ़िर जी आदाब , बहुत सुंदर गीत रचना हुई है ,बधाई स्वीकार करें I 

Comment by Chetan Prakash on September 23, 2022 at 12:59pm

आदाब, आ. बहुत खूबसूरत गीत हुआ इस बार! अन्तरों में गीतिका छंद को  दो हिस्सों में विभक्त कर सुन्दर गीत की रचना हुई है, हार्दिक बधाई! 

Comment by Ashok Kumar Raktale on September 23, 2022 at 11:05am

भूल कर बीते दुखों के दर्द को
मोहिनी मुस्कान आओ फिर करें !.......वाह !  खोयी ख़ुशी को फिर अपनी ओर आकृष्ट करने का प्रयास और सकारात्मकता से आगे बढने का आह्वान करता सुन्दर गीत रचा है आदरणीय भाई लक्षमण धामी जी. हार्दिक बधाई स्वीकारें. सादर

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