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'राहगुज़र : दिव्यालोक' [कुछ हाइकु: भाग-3]

1-
आलोक पर्व
सेतु ये जन-हेतु
प्रकाश-स्तंभ


2-
राहगुज़र
अंधेरे का निस्तार
प्रकाश-पर्व


3-
अपनापन
दीप से विस्तारित
आत्मकेंद्रित

4-
रूप चौदस
सौंदर्य प्रसाधन
आध्यात्मिकता

5-
दूज सुबोध
भ्रातृ-भगिनि योग
दिव्य-आलोक


(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment

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Comment by Sheikh Shahzad Usmani on November 8, 2018 at 1:03am

मेरी इन हाइकु रचनाओं पर भी समय देकर अनुमोदन और प्रोत्साहन हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीय डॉ. छोटेलाल सिंह साहिब।

Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on November 7, 2018 at 9:29pm

आदरणीय उस्मानी साहब जीवंत हाइकु का सृजन, बहुत बहुत बधाई

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on November 7, 2018 at 8:43pm

मेरी इस रचना पर  भी  समय देकर अनुमोदन और प्रोत्साहन हेतु सादर हार्दिक धन्यवाद आदरणीय लक्ष्मण धामी  'मुसाफ़िर'  साहिब।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on November 7, 2018 at 10:57am

आ. भाई शैख़ शहज़ाद जी,ये हाइकू भी अच्छे हुए। हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on November 6, 2018 at 4:13pm

मेरी इस रचना पटल पर उपस्थित होकर अनुमोदन और हौसला अफ़जाई हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीय समर कबीर साहिब,  आदरणीय तेजवीर सिंह साहिब और आदरणीया नीलम उपाध्याय साहिबा।

Comment by TEJ VEER SINGH on November 6, 2018 at 2:41pm

हार्दिक बधाई आदरणीय शेख उस्मानी जी।बेहतरीन हाइकू।

Comment by Neelam Upadhyaya on November 6, 2018 at 12:56pm

 आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी,  बेहतरीन हाइकू की प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई। 

Comment by Samar kabeer on November 6, 2018 at 12:11pm

जनाब शैख़ शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,ये हाइकू भी अच्छे हुए, बधाई स्वीकार करें ।

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