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प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर
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योगराज प्रभाकर's Discussions

"ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-88 (विषय: 'संतान)
70 Replies

आदरणीय साथियो,सादर नमन।."ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-88 में आप सभी का हार्दिक स्वागत है। इस बार का विषय है 'मार्गदर्शन'। तो आइए इस विषय के किसी भी पहलू को कलमबंद करके एक प्रभावोत्पादक लघुकथा रचकर इस…Continue

Started this discussion. Last reply by Sheikh Shahzad Usmani Aug 1.

"ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-52 में शामिल सभी लघुकथाएँ
1 Reply

(1) . डॉ० टी.आर सुकुल जीघड़ी.उस समय की चौथी क्लास तक पढ़े ‘भदईं’, गाॅंव के कुछ इने-गिने पढ़े लिखे लोगों में माने जाते थे। शहर के किसी बीड़ी उद्योगपति ने गाॅंव में खोली कंपनी की ब्राॅंच में भदईं को मुनीम…Continue

Tags: गोष्ठी, लघुकथा

Started this discussion. Last reply by Sheikh Shahzad Usmani Aug 11, 2019.

"ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-51 में शामिल सभी लघुकथाएँ
1 Reply

(1) . बबिता गुप्ता जी मुसाफ़िर दोपहर के समय वृद्धाश्रम में सभी महिलाएँ कुनकुनी धूप का आनंद ले रही थी। कोई अख़बार, किताब पढ़कर अपना समय व्यतीत कर रहा था, तो कोई दूरदर्शन देख या रेडियो पर महिला जगत…Continue

Tags: गोष्ठी, लघुकथा

Started this discussion. Last reply by Sheikh Shahzad Usmani Aug 11, 2019.

"ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-50 में शामिल सभी लघुकथाएँ
2 Replies

(1) . महेंद्र कुमार जीट्रॉली की समस्या.सालों पहले पूछा गया सवाल आज सच बनकर उसकी ज़िन्दगी के सामने खड़ा था। “रेलवे ट्रैक पर एक अनियन्त्रित ट्रॉली तेज़ गति से आ रही है। जिस ट्रैक पर ट्रॉली आ रही है उसपर…Continue

Tags: गोष्ठी, लघुकथा

Started this discussion. Last reply by Sheikh Shahzad Usmani Aug 11, 2019.

 

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प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-90 (विषय: प्रतीक्षा)
"आप धारा से कटा हुआ किसे कह रहे हैं श्री चेतन प्रकाश जी? महेंद्र कुमार जी को? क्यों? महेंद्र कुमार वर्तमान में लघुकथा जगत के  एक प्रखर आलोचक/ समीक्षक माने जाते हैं. इनके काम की सर्वत्र प्रशंसा हो रही है, और आप इन्हें धारा से कटा हुआ घोषित कर रहे…"
Friday

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-90 (विषय: प्रतीक्षा)
"प्रदत्त विषय पर लघुकथा कहने का सद्प्रयास हुआ है. लेकिन यह प्रयास और भी अच्छा हो सकता था, यदि संप्रेषण बेहतर बनाया जाता. इस प्रस्तुति पर मेरी हार्दिक बधाई प्रेषित है प्रो. चेतन प्रकाश जी."
Friday

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-90 (विषय: प्रतीक्षा)
"रूढ़ियों पर, गली-सड़ी परंपराओं पर तथा अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाना किसी रचनाकार के जीवित होने का प्रमाण होता है. आपने एक पौराणिक संदर्भ का सहारा लेकर अपनी आवाज़ बुलंद की है, प्रशनचिह्न खड़ा किया है, पाखंड के चेहरे से नक़ाब नोचकर उतारा है, यह लघुकथा एकदम…"
Friday

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-90 (विषय: प्रतीक्षा)
"मौत का इंतज़ार कर रहे वृद्ध की करूँ गाथा को बखूबी शब्दों मैं पिरोया है आ० तेजवीर सिंह जी. और जिस तरह एक शक्शातिली पंच-लाइन से इस लघुकथा को समाप्त किया है, उसने रचना का प्रभाव बढ़ाया है. इस मार्मिक और प्रदत्त विषय के साथ न्याय करती लघुकथा के लिए…"
Friday

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-90 (विषय: प्रतीक्षा)
"आ० रवि भसीन शाहिद जी, इस लघुकथा के संवाद चुस्त और चुटीले हैं, रचना में जिस तरह से एक अकेले इंसान के आलम-ए-तन्हाई को उभारा गया है, वह प्रभावित करता है. प्रदत्त विषय के साथ पूर्ण न्याय हुआ है. 'इन्तिज़ार' और 'ज़ियादा' आदि आदि शब्द…"
Friday

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-90 (विषय: प्रतीक्षा)
"आ० मनन कुमार सिंह जी. मुझे यह लघुकथा बहुत पसंद आई, इसका प्रमुख कारण है इसका प्रयोगात्मक होना. दरअसल लघुकथा विधा में आजकल प्रयोग बहुत ही कम हो रहे हैं या यूँ कहें कि रचनाकार प्रयोग करने से डरते हैं. तो मेरी पहले बधाई इसी प्रयोग के लिए है. लेकिन एक…"
Thursday

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post नज़्म (बे-वफ़ा)
"श्री अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी जी. आपने अमित जी के ऐतराज़ को ख़ारिज किया है और मोहतरम जनाब समर कबीर साहिब के लिए भी ना-ज़ेबा अलफ़ाज़ कहें हैं। मैं आपकी इन टिप्पणियों की भाषा को सिरे से खारिज करता हूँ। आपको सही और साहित्यिक भाषावाली में उत्तर…"
Sep 15
Sheikh Shahzad Usmani replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-88 (विषय: 'संतान)
"आज की गोष्ठीमें.सहभागी साथियों से व टिप्पणियों से  बहुत कु सीखने को मिला। हार्दिक धन्यवाद। विउअर्ज़ को भी हार्दिक धन्यवाद। शुभरात्रि।"
Aug 1
Dr.Anita Kapoor replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-88 (विषय: 'संतान)
"आपका आभार आदरणीय"
Jul 31
Dr.Anita Kapoor replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-88 (विषय: 'संतान)
"आपका आभार आदरणीय आपकी सलाह अनुकरणीय है।"
Jul 31
Dr.Anita Kapoor replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-88 (विषय: 'संतान)
"वाह! बहुत ही भावपूर्ण लघुकथा "
Jul 31
Dr.Anita Kapoor replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-88 (विषय: 'संतान)
"मानवता पर विमर्श व चिंतन कराती लघुकथा हेतु हार्दिक बधाई आदरणीय तेजवीर सिंह जी।"
Jul 31
pratibha pande replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-88 (विषय: 'संतान)
"कोरोना ने बहुत सबक दिये हैं।अच्छी लघुकथा है आदरणीया। हार्दिक बधाई"
Jul 31
Sheikh Shahzad Usmani replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-88 (विषय: 'संतान)
"आदाब। कोरोनाकालीन अनुभूतियों और संवेदनाओं को उभारती रचना के बढ़िया प्रयास हेतु हार्दिक बधाई मुहतरमा डॉ. अनीता कपूर साहिबा। टंकण में सावधानी रखनी होगी। घटनाओं के.कहानीनुमा वर्णन के बजाए संवादों का समावेश किया जा सकता है।"
Jul 31
Sheikh Shahzad Usmani replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-88 (विषय: 'संतान)
"आदाब। विषयांतर्गत बेटियों से संबंधित विमर्श पर बढ़िया रचनाहेतु हार्दिक बधाई जनाब मोहन जी।रचना में  प्रवाह बाधित सा लगाजैसे कि कम समय में रचना तैयार की हो।"
Jul 31
Sheikh Shahzad Usmani replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-88 (विषय: 'संतान)
"आदाब। हार्दिक धन्यवाद आदरणीय तेजवीर सिंह जी।"
Jul 31

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कविता: ज़माने में बनी है हिंद की पहचान हिंदी से

अगर है एक तो है एक हिंदुस्तान हिंदी सेI 

ज़माने में बनी है हिंद की पहचान हिंदी सेI

.

ये दुनिया एक ही कुनबा सदा इसने सिखाया है,

मोहब्बत का सदाक़त का मिला वरदान हिंदी सेI 

.

जो तुलसी जायसी के लाल, अंग्रेजी के अनुयायीI 

उन्हें तुम दूर ही रखना मेरे भगवान हिंदी सेI 

.

तुम हिंदी काव्य को रसहीन होने से बचा लेना,  

नहीं तो फिर न निकलेगा कोई रसखान हिंदी सेI 

ये उर्दू फ़ारसी अब तक दिवंगत हो गई होतीं, 

मिला भारत में दोनों को…

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Posted on September 14, 2021 at 11:00am — 10 Comments

तरही ग़ज़ल-2 (आ० समर कबीर जी को समर्पित)

1222 1222 122
.
हमारा धर्म दहशत है? नहीं तो!

तो पूरी क़ौम सहमत है? नहीं तो!
.
तेरे हाथों में ख़ंजर है, मेरे भी
ये क्या अच्छी अलामत है? नही तो



फ़क़त मंदिर ओ मस्जिद के मसौदे,

यही क़ौमी क़यादत है? नही तो!  



अज़ीमुश्शां मक़ाबिर के जो खालिक,

कहीं उनकी भी तुर्बत है? नही तो!


जहाँ पत्थर की हर देवी सुरक्षित,

वहाँ बेटी…
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Posted on May 7, 2017 at 7:30pm — 18 Comments

आते जाते पल (लघुकथा)

वह अपनी धुंधली आँखों से बीत रहे वर्ष की पीठ पर बने रंग बिरंगे चित्रों को बहुत गौर से निहार रही थी, वह अभी उनमें छुपे चेहरों को पहचानने का प्रयास ही कर रही थी कि सहसा वे चित्र चलने फिरने और बोलने लग पड़ेI   

"माँ जी! कितनी दफा कहा है कि इन बर्तनों को हाथ मत लगाया करोI" 

नये टी सेट का कप उससे क्या टूटा उसके घर में कलेश ने पाँव पसार लिए थेI 

अगले दृश्य में नए साल की इस झांकी को होली के रंगों ने ढक लियाI  

"बेटा ये बहू की पहली होली है, तो इस बार त्यौहार धूमधाम से..."…

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Posted on January 1, 2017 at 12:01am — 14 Comments

अधूरी कथा के पात्र (लघुकथा) .

अचानक स्कूटर खराब हो जाने के कारण वापिस लौटने में काफी देर हो चुकी थी अत: वह काफी तेज़ी से स्कूटर चला रहा थाI एक तो अँधेरा ऊपर से आतंकवादियों का डरI इस सुनसान रास्ते पर बहुत से निर्दोष लोगों की हत्याएँ हो चुकी थींI वह अपने अंदर के भय को पीछे बैठी पत्नी से छुपाने का प्रयास तो कर रहा था, किन्तु उसकी पत्नी स्कूटर तेज़ रफ़्तार से सब कुछ समझ चुकी थीI स्कूटर नहर की तरफ मुड़ा ही था कि अचानक हाथों में बंदूकें पकडे पाँच सात नकाबपोश साए सड़क के बीचों बीच प्रकट हो गएI

“रुक जा ओये!” एक…
Continue

Posted on December 27, 2016 at 10:00am — 10 Comments

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At 12:23pm on September 12, 2020, DR ARUN KUMAR SHASTRI said…

ओ बी ओ महोत्सव अंक ११९ के लिए 

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-119 

विषय - "वो भी क्या दिन थे"
स्वरचित - मौलिक - अप्रकाशित 

अतुकांत आधुनिक कविता   
विषय - वो भी क्या दिन थे   

वो भी क्या दिन थे ,
महज १३ साल
का ही तो  था मैं
जिन्दगी की पहली कक्षा
ठीक से खड़े
होने का ढंग 

सीख रहा था
आठवीं की परीक्षा 

और शारीरिक परिवर्तन 

विज्ञान की कार्यशाला 

वनस्पति विज्ञान पादप 

संकलन हेतु
पर्वतीय प्रदेश 

का भ्रमण 

चेहरे पर मासूमियत 

स्त्री पुरुष के अंतर 

ज्ञान का कोतुहल 

तिसपर संगीता जैसे 

सहपाठी का सानिध्य 

न जाने वो भी क्या दिन थे 

सब कुछ सुहाना था 

घर में मन कहाँ लगता था 

माँ पापा से आँखे मिलाते 

एक झिझक , जैसे कोई 

 अपराध करते हुए   

रंगे हाँथ पकडे जाने का डर 

सभी कुछ उलटा पुल्टा 

लेकिन मन था के 

अपनी ही बांचे जा रहा था 

सुनता कहाँ था 

बेर बेर उसी पगडण्डी पर 

लाके पटक देता था 

वनस्पति विज्ञान पादप 

संकलन हेतु
पर्वतीय प्रदेश 

का भ्रमण 

मुहं मांगी मुराद बन गया 

तिस पर संगीता जैसे 

सहपाठी का सानिध्य 

न जाने वो भी क्या दिन थे 

सब कुछ सुहाना था 

सुभह  शाम  सब कुछ 

जल्दी जल्दी बीत रहा था 

मैं भीतर भीतर रीत रहा था 

मास्टर जी ने बारह टोलियाँ 

बनाई एक लड़का एक लड़की 

एक टोली मेरी और संगीता की 

उस दिन न जाने जो भी मांगता 

भोले बाबा ने वही दे देना था 

हमारी टोली को सबसे अच्छे 

संकलन का सम्मान मिला 

संगीता की विदुषितत्व 

का परिणाम मुझे भी मिला 

हम दोनों को एक दुसरे 

का साथ समझ उसदिन 

के एक एक पल में  

सौगात स्वरूप  मिली
न जाने वो भी क्या दिन थे 

सब कुछ सुहाना था 

असला में नारीत्व की 

महिमा को सही से 

मैंने उसी दिन जाना था   

At 9:52am on November 18, 2019, TEJ VEER SINGH said…

आदरणीय योगराज प्रभाकर भाई जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवम शुभ कामनांयें।

At 3:10pm on November 18, 2018, Sheikh Shahzad Usmani said…

आदरणीय मंच संचालक महोदय श्री  योगराज प्रभाकर साहिब जन्मदिन की  सालगिरह पर हार्दिक  बधाई और शुभकामनाएँ।

At 1:36pm on November 18, 2018, राज़ नवादवी said…

आदरणीय योगराज प्रभाकर साहब, जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ. ईश्वर आपको स्वस्थ एवं ख़ुशहाल रखे. सादर. 

At 12:14pm on November 18, 2018, TEJ VEER SINGH said…

आदरणीय योगराज प्रभाकर भाई जी को जन्म दिन की हार्दिक बधाई एवम शुभ कामनायें।प्रभु आपकी समस्त मनोकामनायें पूर्ण करें।माता रानी का सदैव आशीर्वाद मिले। जीवन में सुख, शाँति,समृद्धि और सेहत से मालामाल रहें।सदैव उन्नति के पथ पर अग्रसर रहें।

At 5:54pm on September 15, 2018, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आ० अनुज . आशा है ई स्वस्थ और सानान्न्द होंगे . अवगत कराना है कि मोबाईल पर चार बार असफल कोशिश के बाद  यहाँ सन्देश निवेदित कर रहा हूँ . सूची है कि ओ बी ओ लखनऊ-चैप्टर , प्रतिवर्ष की  भांति इस वर्ष माह नवम्बर 2018 में वार्षिक कार्यक्रम करने हेतु परिकरबद्ध  है और तदनुसार डॉ. शरदिंदु मुकर्जी के संरक्षण में वार्षिक पत्रिका ‘सिसृक्षा’ के अगले अंक का प्रकाशन भी होना है  . इसके लिए  शुभकामना सन्देश के साथ साथ रचनायें  भी  अपेक्षित  हैं  . कृपया अपनी रचना / शुभकामना  सदेश  25 सितम्बर तक srivastavagopalnarain @gmail.com पर अवश्य भेज दें ,  कार्यक्रम तिथि की सूचना शीघ्र ही दी जायेगी . सादर . सानुरोध---------------------- गोपाल नारायण श्रीवास्तव 

At 4:25pm on May 22, 2017, Lajpat Rai Garg said…

यॊगराज जी,
आपकी लघुकथा-अधूरी कथा के पात्र- पंजाब के आतंकवाद की याद ताजा कर गई. सुंदर रचना के लीये बधाई.

At 9:37pm on April 21, 2016, Dr. Ehsan Azmi said…
धन्यवाद सर
At 9:37pm on April 19, 2016, Radha Shrotriya"Asha" said…

Shukriya sir 

At 8:45pm on November 18, 2015, pratibha pande said…

जन्मदिन की ढेरों  शुभकामनाएँ आदरणीय 

 
 
 

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