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Ashok Kumar Raktale
  • Male
  • Ujjain,M.P.
  • India
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Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव’ अंक 135 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय चेतन प्रकाश जी सादर, प्रदत्त चित्र को परिभाषित करता सुन्दर सृजन हुआ है आपके क़लम से. हार्दिक बधाई स्वीकारें. सादर"
Jul 24
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव’ अंक 135 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया प्रतिभा पाण्डे जी सादर, प्रदत्त चित्र पर रचे छंदों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार. सादर"
Jul 24
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव’ अंक 135 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  प्रस्तुत छंदों को चित्रानुरूप पाने के लिए आपका अतिशय आभार. सादर"
Jul 24
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव’ अंक 135 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, जी ! आपके कहे का मैं ध्यान रखूँगा. प्रस्तुति की सराहना के लिए आपका हृदयतल से आभार. सादर"
Jul 24
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव’ अंक 135 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय दयाराम मेठानी जी सादर, प्रदत्त चित्र को परिभाषित करते सुन्दर शक्ति छंद रचे हैं आपने. हार्दिक बधाई स्वीकारें. सादर."
Jul 24
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव’ अंक 135 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया प्रतिभा पाण्डे जी सादर, प्रदत्त चित्र अनुकूल तीनों ही छंद आपने सुन्दर रचे हैं. मदन पास छाता बड़ा है नया। घुसेंगे यहीं सब मजा आ गया।।.....वाह ! बाल मानसिकता को उद्धृत करती सुन्दर पंक्तियाँ. एक बात अवश्य कहना चाहूँगा कि 'मगर' शब्द…"
Jul 24
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव’ अंक 135 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय मुकुल कुमार जी सादर, प्रदत्त चित्र बहुत सुन्दरता से परिभाषित हुआ है. बहुत बधाई स्वीकारें. किन्तु तुकांतता के नियम का कहीं-कहीं पालन नहीं हो सका है. थेली/थैली. सादर"
Jul 24
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव’ अंक 135 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर, प्रदत्त चित्र को परिभाषित करते बहुत ही उत्तम शक्ति छंद रचे हैं आपने. चले बाल वापस सभी गेह को।शरारत उठी मन तभी मेह को।।........वाह ! स्कूली बच्चों के चित्र के लिए कितनी मोहक पंक्तिया. इसी को चले बाल धेरा किए।सरकते…"
Jul 24
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव’ अंक 135 in the group चित्र से काव्य तक
"शक्ति छंद   चले जा रहे साथ बच्चे सभी। लिए हाथ में हाथ सच्चे सभी। ख़ुशी से चले झूमते – झूमते। खुली राह पर घूमते – घुमते।।   इन्हें एक छाता पुराना मिला। नहीं किन्तु इनको ज़रा है गिला। सभी के सरों को न वो ढँक रहा। अधोअंग भी सब गये…"
Jul 23
Ashok Kumar Raktale added a discussion to the group पुस्तक समीक्षा
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समीक्षा : चाक पर घूमती रही मिट्टी

पुस्तक : चाक पर घुमती रही मिट्टी (ग़ज़ल संग्रह)रचनाकार : आराधना प्रसादप्रकाशक : ग्रथ अकादमी, 19, पहली मंज़िल,2, अंसारी रोड,दरियागंज, नई दिल्ली-02मूल्य : 250/- मात्र.पृष्ठ संख्या : 128                    पहले रचनाकार आराधना प्रसाद का परिचय करा दूँ। यह विज्ञान विषय से स्नातकोत्तर हैं। इनके पच्चीस से अधिक साझा ग़ज़ल-संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। दो पुस्तकें प्रकाशनाधीन हैं। इन्हें बिहार उर्दू एकेडमी द्वारा एक से अधिक बार पुरस्कृत किया जा चुका है।                   ‘चाक पर घुमती रही मिट्टी’ ग़ज़ल संग्रह का…See More
Jul 11
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 134 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय दिनेश कुमार विश्वकर्मा जी सादर, प्रदत्त चित्र को परिभाषित करते और पूर्व काल की बैलगाड़ी से जोड़कर सुन्दर छंद रचे हैं आपने. हार्दिक बधाई स्वीकारें. सादर  आवागमन है, गाड़ियों की, शाम हो या भोर ।।....गाड़ियों का"
Jun 19
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 134 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय दयाराम मेठानी साहब सादर, प्रदत्त चित्र पर दोनों ही छंद सुन्दर रचे हैं आपने और ऐसी मुसीबत से बचने के लिए छोटे परिवार का मन्त्र भी अच्छा दिया है. हार्दिक बधाई स्वीकारें. सादर"
Jun 19
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 134 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय चेतन प्रकाश जी सादर, कामरूप छंद पर आपका अच्छा प्रयास है. किन्तु यह छंद दो पंक्तियों का न होकर चार पंक्तियों का होता है. तब आपकी प्रस्तुति की दस पंक्तियों को कितने छंद समझा जाये ? तीन खण्ड के चरण में प्रथम यति पश्चात गुरु लघु के नियम का भी…"
Jun 19
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 134 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब सादर, प्रदत्त चित्र को परिभाषित करने के साथ ही समाज हित की नसीहत देते सुन्दर कामरूप छंद रचे हैं आपने. हार्दिक बधाई स्वीकारें. सादर"
Jun 19
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 134 in the group चित्र से काव्य तक
"कामरूप छंद   अचरज मत करो,बैठ देखो, एक दो छह सात। दे सकोगे तब, चाक दो से, चार को भी मात। कोई नियम या, कायदा है, डाल उस पर धूल। चल भी पड़ो अब, शान से तुम, कुछ न होगी भूल।।   आती हो पुलिस, रोकने या, टोकने बेकार। कुछ भी न सोचो,माँग माफ़ी, डाल दो…"
Jun 19
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 133 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब सादर, प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन हेतु आपका हार्दिक आभार. आपके दोनों ही सुझाव उत्तम है. सादर."
May 22

Profile Information

Gender
Male
City State
Ujjain
Native Place
Ujjain
Profession
service
About me
I am a technical person and always talk in right angle.

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ग़ज़ल

1222 1222 1222



मिला था जो हमें पल खो दिया हमने

मुलायम नर्म मखमल खो दिया हमने ।

*

बचा रख्खे हैं यादों के नुकीले शर

मज़े से झूमता कल खो दिया हमने ।

*

उड़ा दी खुशबुएँ जो साथ रहती थीं

गँवा दी उम्र संदल खो दिया हमने ।

*

मुहब्बत नाम से हर दिन जिहालत की

सुकूँ था एक आँचल खो दिया हमने ।

*

सवालों पर सवालों की थीं बौछारें

जवाब आए तो संबल खो…
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Posted on September 22, 2021 at 8:00pm — 10 Comments

गज़ल

 221 1222 221 1222

 

उसकी ये अदा आदत इन्कार पुराना है

बेचैन नहीं करता ये प्यार पुराना है ।

 

ये हुस्न नया पाया उसने है सताने को

ये जिस्म तमन्नाएं इसरार पुराना है ।…

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Posted on June 4, 2020 at 10:30pm — 11 Comments

गज़ल

उठाओ नजर रहगुज़र देख लो ।

यहाँ जिन्दगी का सफ़र देख लो ।

 

नियम कायदे तो बने हैं कई

मगर भंग हैं सब जिधर देख लो ।

 

न भय है न चिंता न है शर्म ही

बना है बशर जानवर देख लो ।

 

कहीं लूट है तो कहीं क़त्ल है

किसी भी नगर की ख़बर देख लो ।

 

गले मिल रहे दोस्त खंजर लिए

बदलते समय का असर देख लो ।

 

करें फ़िक्र उनकी जो हैं नापसंद

सियासत का है ये हुनर देख लो ।

 

बिछा हर तरफ सिर्फ कंक्रीट…

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Posted on October 2, 2019 at 10:00pm — 8 Comments

सावन आया है

फेलुन फेलुन फेलुन फेलुन

 

गुपचुप उसपर मन आया है

लगता है सावन आया है

 

महका है हर कोना-कोना

अम्बर से चन्दन आया है

 

देखो नभ पर छाये बादल

दूल्हा ज्यों बनठन आया है 

 

भीग रही है प्यासी धरती

ज्यों बीता यौवन आया है

 

रह-रह नाच रही हैं बूँदें

राधा का मोहन आया है

 

झूला झूल रही हैं सखियाँ

सज रक्षा बंधन आया है

 

कागज़ की नैया ले आओ

याद मुझे बचपन आया…

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Posted on November 30, 2018 at 9:00am — 9 Comments

Comment Wall (26 comments)

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At 9:23am on April 21, 2020, dandpani nahak said…
आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी सादर प्रणाम !बहुत धन्यवाद ! कुण्डलिया के लिए बिलकुल नया हूँ ये दूसरी ही कोशिश है आशा है आप के सानिध्य से कुछ सीख सकूंगा !
आपने ऐसे संशोधित किया वाह्ह्हह्ह्ह्ह क्या कहूँ बेहतरीन ! आपकी कृपा बनी रहे !
At 10:20pm on April 13, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी बहुत बहुत शुक्रिया हौसला बढ़ाने का
At 3:43pm on September 4, 2016, kanta roy said…
सार्थक रचना का सम्मानित होना अच्छा लगता ही है।
"मन उस आँगन ले जाय" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित होने के लिये बहुत बहुत बधाई आपको आदरणीय अशोक जी।
At 11:52pm on August 17, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी  गीतिका : मन उस आँगन ले जाय को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 5:31pm on July 23, 2014, seemahari sharma said…
बहुत बहुत आभार आदरणीय अशोक रकताले जी।
At 8:43pm on June 15, 2014, mrs manjari pandey said…
आदरणीय रक्ताले जी बहुत बहुत धन्यवाद। वस्तुतः विषय तो चिंतनीय है ही .
At 5:01pm on July 26, 2013, Dr Ashutosh Vajpeyee said…

ashok ji apne Mujhe aur Om neerav ji ko FB par Block kar diya is baat se ham logon ko ateev kasht hua hai ham dono hi yah jaan lena chahtey hain ki kis apradh ke liye apne hame yah dand diya aur kavita lok group kyon chhoda,,,,uttar ki prateeksha me me vyagra hoon

At 10:35am on June 10, 2013, D P Mathur said…

आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले सर हौंसला बढ़ाने के लिए आपका आभार !

At 6:13pm on May 8, 2013, Dr Dilip Mittal said…

आदरणीय इसी तरह आशीर्वाद बनाए रखें 

हार्दिक आभार 
At 7:40pm on May 4, 2013, Dr Dilip Mittal said…

आपके प्रोत्साहन भरे भावों के लिए शुक्रिया 

 
 
 

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